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मुंद्रा पोर्ट ने रचा इतिहास, 200 MMT कार्गो संभालने वाला पहला भारतीय बंदरगाह बना

APSEZ ने पूरे वित्त वर्ष में कुल 450.2 एमएमटी कार्गो हैंडल किया, जिसमें कंटेनर और लिक्विड-गैस कार्गो की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही. इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स रेल वॉल्यूम 0.64 मिलियन टीईयू (+8%) और GPWIS वॉल्यूम 21.97 एमएमटी (+9%) तक पहुंच गया.

मुंद्रा पोर्ट ने इतिहास रच दिया है (फाइल फोटो) मुंद्रा पोर्ट ने इतिहास रच दिया है (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 8:33 PM IST

भारत के सबसे बड़े निजी बंदरगाह मुंद्रा पोर्ट ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. वित्त वर्ष 2025 में इस पोर्ट ने 200.7 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) कार्गो हैंडल किया, जिससे यह 200 एमएमटी का आंकड़ा पार करने वाला देश का पहला बंदरगाह बन गया.

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) ने मार्च 2025 में 41.5 एमएमटी कार्गो संभालते हुए 9% की सालाना वृद्धि दर्ज की. इसमें मुख्य रूप से कंटेनर ट्रैफिक में 19% और लिक्विड-गैस कार्गो में 5% की बढ़ोतरी देखने को मिली.

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पूरे वित्त वर्ष में, APSEZ ने कुल 450.2 एमएमटी कार्गो हैंडल किया, जिसमें कंटेनर और लिक्विड-गैस कार्गो की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही. इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स रेल वॉल्यूम 0.64 मिलियन टीईयू (+8%) और GPWIS वॉल्यूम 21.97 एमएमटी (+9%) तक पहुंच गया.

भारत में समुद्री व्यापार तेजी से बढ़ रहा है और बंदरगाहों की आधुनिक संरचना इसके विकास में बड़ी भूमिका निभा रही है. कभी सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत करने वाला देश, आज अपने बंदरगाहों के जरिए वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है.

आधुनिक मशीनरी, स्मार्ट पोर्ट्स और ऑटोमेटेड लॉजिस्टिक्स ने भारत के बंदरगाहों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि देश की लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक स्थिति को और मजबूत करेगी, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर एक अहम समुद्री व्यापार केंद्र के रूप में उभर सकता है.

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