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अंगदान को लेकर मुस्लिम समुदाय की बड़ी पहल, WORK ने की ऐतिहासिक घोषणा

वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ रिलीजन एंड नॉलेज (WORK) के अध्यक्ष अल्लामा सैयद अब्दुल्ला तारिक ने बताया कि अबतक लगभग 400 मुस्लिमों ने अंगदान की शपथ ली है. यह पहल इस्लामी फतवों के खिलाफ एक साहसिक कदम है, जिनमें पहले अंगदान को हराम घोषित किया गया था.

वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ रिलीजन एंड नॉलेज के अध्यक्ष अल्लामा सैयद अब्दुल्ला तारिक और अन्य पदाधिकारी वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ रिलीजन एंड नॉलेज के अध्यक्ष अल्लामा सैयद अब्दुल्ला तारिक और अन्य पदाधिकारी
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 7:04 AM IST

वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ रिलीजन एंड नॉलेज (WORK) ने गुरुवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की. इस दौरान संगठन के अध्यक्ष अल्लामा सैयद अब्दुल्ला तारिक ने मुस्लिम समुदाय द्वारा अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की घोषणा की.

उन्होंने कहा कि 25 अगस्त को WORK अपने 36वें स्थापना दिवस के अवसर पर 36 संगठनों को मानवता और समाज के प्रति उनके असाधारण योगदान के लिए सम्मानित करेगा, जिनमें आर्ट ऑफ लिविंग (AOL), गायत्री परिवार और धर्म संसद जैसे प्रतिष्ठित संगठन शामिल होंगे.

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400 मुस्लिम ले चुके हैं अंगदान की शपथ

अल्लामा सैयद अब्दुल्ला तारिक ने बताया कि अबतक लगभग 400 मुस्लिमों ने अंगदान की शपथ ली है. यह पहल इस्लामी फतवों के खिलाफ एक साहसिक कदम है, जिनमें पहले अंगदान को हराम घोषित किया गया था. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो महीनों में, WORK के दो समर्पित स्वयंसेवकों की मृत्यु के बाद उनकी आंखें दान की गईं, जो कि भारत में मुस्लिम समुदाय के बीच पहली बार हुआ है.

यह भी पढ़ें: इस्लाम में अंगदान: आस्था और जरूरत की कश्मकश में फंसा मुसलमान

पहल से होगा अहम बदलाव- अब्दुल्ला

यह कार्यक्रम मुस्लिम समुदाय में अंगदान के प्रति जागरूकता और सहमति को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. अल्लामा सैयद अब्दुल्ला तारिक ने इस पहल को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर करार दिया.

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यह प्रेस कॉन्फ्रेंस WORK के विभिन्न कार्यों और भविष्य की योजनाओं को साझा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी था. इस दौरान समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े मीडिया प्रतिनिधियों की उपस्थिति भी देखी गई, उम्मीद जताई जा रही है कि ऐसे कार्यक्रमों से मुस्लिम समुदाय में अंगदान के प्रति सकारात्मक रुझान पैदा होगा.

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