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...जब संसद में हुआ IAS पूजा खेडकर का जिक्र, NCP सांसद ने दिव्यांग कोटे के लिए की इन बदलावों की मांग

महाराष्ट्र से एनसीपी सांसद फौजिया खान ने राज्यसभा में सरकारी नौकरियों में दिव्यांग कोटे का मुद्दा उठाया. एनसीपी सांसद ने आईएएस पूजा खेडकर के साथ ही चार बार यूपीएससी परीक्षा क्वालिफाई करने वाले कार्तिक कंसल का जिक्र करते हुए मेडिकल बोर्ड्स के लिए एक यूनिफॉर्म गाइडलाइंस जारी किए जाने की मांग की.

chairman Jagdeep Dhankhar, Fauzia Khan chairman Jagdeep Dhankhar, Fauzia Khan
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 25 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 1:28 PM IST

संसद के मॉनसून सत्र के चौथे दिन बजट पर चर्चा की शुरुआत से पहले राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान दिव्यांग कोटे का मुद्दा उठा. महाराष्ट्र से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की सांसद डॉक्टर फौजिया खान ने राज्यसभा में सरकारी नौकरियों में दिव्यांग कोटा को लेकर चिंता जताई और अलग-अलग नौकरियों के लिए अलग-अलग मानदंडों का जिक्र करते हुए यूनिफॉर्म गाइडलाइंस जारी करने की भी मांग की. उन्होंने उच्च सदन में महाराष्ट्र की चर्चित आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर का भी जिक्र किया.

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एनसीपी सांसद फौजिया खान ने कहा कि एक तरफ पूजा खेडकर हैं जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद पोस्टिंग भी ले ली. और दूसरी तरफ हम देख रहे हैं कि एक कार्तिक कंसल हैं जिन्होंने चार बार यूपीएससी की परीक्षा पास की लेकिन सर्विस देने से इनकार कर दिया गया. उन्होंने इसका कारण भी बताया और कहा कि कार्तिक कंसल की फिजिकल डिसएबिलिटी, मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी (मांसपेशियों के विकास से संबंधित बीमारी) की है.

फौजिया खान ने कहा कि इससे दुखद और क्या हो सकता है कि 2021 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा क्लियर किया और आईएएस के लिए क्वालिफाई किया लेकिन मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी को तब एलिजिबल कंडिशन के रूप में मान्यता नहीं थी. उन्होंने अलग-अलग भर्तियों के लिए दिव्यांग कोटे को लेकर अलग-अलग मानदंडों का भी जिक्र किया. एनसीपी सांसद ने कहा कि इसका समाधान यही है कि अलग-अलग नौकरियों में मेडिकल बोर्ड्स के लिए यूनिफॉर्म गाइडलाइंस जारी की जाएं और फेयर इवैल्यूएशन हो.

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उन्होंने यह भी कहा कि दिव्यांग कोटे में इन बदलावों के साथ सिस्टम उम्मीदवारों का सहयोग करे और प्रक्रिया में निष्पक्षता को प्रमोट किया जाए. उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म डिसएबिलिटी असेसमेंट भी इसका भाग होना चाहिए. उन्होंने अपने संबोधन का समापन 'हम बेबस-लाचार नहीं, हमारा हौसला ही साथी है' पंक्तियों के साथ किया.

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