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पेपर लीक की सारी कडियों को एक एक करके सीबीआई जोड़ती जा रही है और अहम किरदार अब शिकंजे में आते जा रहे है. रविवार को भी CBI ने पटना के बेऊर जेल पहुंचकर आरोपियों से पूछताछ की. इससे पहले सीबीआई ने ओएसिस स्कूल हजारीबाग के प्रिंसिपल एहसान उल हक, वाइस प्रिंसिपल इम्तियाज आलम, मनीष और आशुतोष को गिरफ्तार किया था. हम आपको इस पूरी कहानी को सिलसिलेवार समझाते हैं-
किरदार नंबर- एक एहसान उल हक: ओएसिस स्कूल के प्रिंसिपल एहसान उल हक पर आरोप है कि उसने पेपर लीक किया था. इस शख्स पर आरोप है कि उसने अपने ओएसिस स्कूल में पेपर निकाला और आगे माफिया तक पहुंचाया. एहसान उल हक के ही संजीव मुखिया गिरोह से रिश्ते का शक बताया जा रहा है. ये पांच दिन की सीबीआई रिमांड पर है.
किरदार नंबर दो- संजीव मुखिया: संजीव मुखिया अब तक की कहानी के हिसाब से सबसे बडा किरदार बनकर निकल रहा है. शक है कि उसने हजारीबाग से पटना और दूसरे राज्यों तक नेटवर्क फैला रखा था. उसने शातिर तरीके से हजारीबाग से पेपर हासिल किया और फिर आगे अपने गैंग के जरिये बच्चों तक पहुंचाया हजारीबाग से पेपर लीक होने के बाद सबसे पहले माफिया संजीव मुखिया तक ही गया था.
किरदार नंबर 3- इम्तियाज आलम: वाइस प्रिंसिपल इम्तियाज की पेपर लीक में भूमिका रही है. इम्तियाज ही ओएसिस स्कूल सेंटर का इंचार्ज था. शक है कि उसने एहसानउल हक के साथ मिलकर पेपर लीक किया.
किरदार नंबर 4- चिंटू: नई उम्र का यह लड़का संजीव मुखिया का रिश्तेदार है. पेपर हासिल करने के बाद मुखिया ने चिंटू को ही पेपर भेजा था. संजीव मुखिया ने अपने गुर्गे चिंटू को पेपर लीक के बाद प्रश्न पत्र प्रिंटआउट कराने के लिए भेजा. चिंटू ने रॉकी को पेपर दिया ताकि उसको सॉल्व कराया जा सके. रॉकी ने पटना और रांची के MBBS स्टूडेंट के जरिए प्रश्न पत्र सॉल्व कराया बाद में NEET का पेपर और उसका आंसर प्रिंट आउट करा कर चिंटू इसी सेफ हाउस लर्न प्ले हाउस पहुंचा जहां अभ्यर्थियों को रखा गया था.
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किरदार नंबर 5 मुकेश: मुकेश ही बच्चों को सेफ हाउस ले गया. मुकेश उस कार का मालिक है जिसने उन बच्चों को सेफ हाउस लर्न प्ले हाउस पहुंचाया था जहां उनको उत्तर रटवाए जाने थे. वही खेमनीचक स्थित सेफ हाउस में पहुंचा था. आशुतोष लर्न प्ले स्कूल में रहता था . वो पहले ही सारा राज उगल चुका है कि कैसे 20 से 25 बच्चे लर्न प्ले स्कूल लाया गया था और उत्तर रटवाए गए थे.
हजारीबाग में CBI की टीम ने कुल 11 लोगों से तीन दिनों तक पूछताछ की इस दौरान कुरियर कंपनी के स्टाफ, हजारीबाग एसबीआई मेन ब्रांच के स्टाफ और ई रिक्शा वाले से भी CBI ने पूछताछ की पूछताछ के बाद ज्यादातर लोगों को CBI ने छोड़ दिया लेकिन एहसान उल हक और इम्तियाज आलम को लेकर पटना चली आई.
खड़गे ने किया सोरेन और केजरीवाल का जिक्र
खड़गे ने कहा कि आपने हमारी कई सरकारों को तोड़ा. आपने इंडिया गठबंधन के दो मुख्यमंत्रियों को जेल में डाला. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बेल देकर हाईकोर्ट ने कहा कि प्राइमाफेशिया सबूत नहीं हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री छूटकर आए, आपने फिर से डाला.
खड़गे ने कहा, 'आपके पास कई तरीके हैं सताने के. आप हमारी 10 साल की सरकार को गाली देते थे. मोदी साहब कहते थे खिचड़ी सरकार है. देश की छवि खराब हुई. कहते थे मिलीजुली सरकारों ने 30 साल खराब किए. अब जनता ने आपको गठबंधन की सरकार पर ला दिया है. अब एनडीए की सरकार बोल रहे हो, बीजेपी की सरकार भी नहीं बोलते थे. कहते थे ये मोदी की सरकार. पीएम ने ढेरों सभाओं में कहा- 10 साल तो बस ट्रेलर था, असली पिक्चर बाकी है. पिछले एक महीने में इसका अंदाजा लगा है. नीट पेपर लीक से लेकर रद्द परीक्षाओं, राम मंदिर लीक, बिहार में पांच पुल टूटने, ट्रेन हादसों का जिक्र किया और विपक्ष के नेता ने कहा कि 20 लाख बच्चों का भविष्य बर्बाद हो गए. सात साल में 70 पेपर लीक हुए और दो करोड़ नौजवानों का भविष्य बर्बाद हुआ है. आप दुरुस्त करो, आपको कौन रोका है.'
खड़गे ने कहा कि पटना से पेपर लीक की खबरें आईं, शिक्षा मंत्री ने पेपर लीक मानने से इनकार कर दिया. फजीहत हुई तो मानना पड़ा. हरियाणा में एक बीजेपी नेता का नाम आ रहा है. यूपी में एनडीए के एक नेता का नाम आ रहा है. कोटा में कई कोचिंग हैं तो कहीं उसका प्रेशर तो नहीं है. साहब आप जांच कीजिए जरा अपनी ओर से. इस पर सभापति ने कहा कि आप तो चर्चा कर रहे हैं. खड़गे ने कहा कि आप ऑथेंटिकेट बोलते हैं न, ऑथेंटिक चर्चा कीजिए. धनखड़ ने कहा कि आपका बयान ऑथेंटिक नहीं है. खड़गे ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करते हुए रूल बनाने की मांग की. इस पर सभापति ने कहा कि ये विचार ज्यादा क्रांतिकारी है, इस पर विचार होना चाहिए. खड़गे ने इस पर कहा कि ये हमारा विचार है.
पेपर लीक का लातूर कनेक्शन
लातूर और पूरे महाराष्ट्र में नीट धांधली के ऐसे सबूत मिले है जो अपने आप में इस पूरे घोटाले की धज्जियां उडाने के लिए काफी है. यहां लातूर बीड और आसपास के जिलों में दलाल पहुंचे. बच्चों और उनके पैरेंट्स से लाखों रुपए लिए और फिर इनको पटना ले जाकर परीक्षा दिलाई. ये खेल सालों से चल रहा था. नीट के काउंसलर एनटीए को सबूतों के साथ बता रहे थे कि ये बड़ा खेल चल रहा है लेकिन एनटीए कानों में तेल डालकर बैठा रहा.
पटना का पेपर लीक गैंग दूसरे राज्यों में भी जडें फैलाए हुआ था. 2024 ही नहीं पिछले कुछ सालों से ये घोटाला चल रहा था. एजेंट लातूर से लेकर दूसरे शहरों में एक्टिव थे जो महाराष्ट्र के बच्चों को पटना या कर्नाटक के शहरों में नीट परीक्षा दिलाते थे. पहले घोटाले का लेवल समझिए. लातूर से पटना 2000 किलोमीटर है. लातूर का बच्चा परीक्षा सेंटर पटना चुनता है क्योंकि यहां पैसे देकर अच्छे नंबर मिलते है.
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जांच की गई तो सामने आये महाराष्ट्र के पटना कनेक्शन के सबूत. ऐसे सबूत कि बच्चों ने लाखों रुपए देकर मेरिट में जगह पाई और फिर महाराष्ट्र के टॉप कॉलेज में एडमिशन पाया. 2022 में कुछ बच्चों को नीट में 150 नंबर मिले 2023 में पैसा चुकाया पटना सेंटर चुना और 2023 की परीक्षा में उन्हीं बच्चों को 650 से ज्यादा नंबर मिले.
गुजरात के गोधरा में मिले सबूत
गुजरात के नए नए जिलों में इस धांधली के तार जुड़ते दिख रहे हैं. गोधरा में नकल के आरोप के बाद गुजरात पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया था. इनमें तुषार भट्ट, रॉय, पुरुषोत्तम शर्मा, शिक्षा सलाहकार विभोर आनंद और स्कूल शिक्षकों से जुड़े मध्यस्थ आरिफ वोहरा का नाम शामिल है. पहला एक्शन 15 रोज पहले पंचमहल जिले के गोधरा में हुआ लेकिन अब अहमदाबाद से खेड़ा-आनंद तक के नाम सामने आ रहे है. कई जिलों में सीबीआई की छापेमारी हो रही है. जिस तरीके से पटना के सेंटरों पर माफिया ने सब कुछ मैनेज कर रखा था एसा लगता है कि गोधरा के एक स्कूल पर भी सब कुछ सेट था.
गुजरात में नीट परीक्षा धांधली को लेकर सीबीआई पांच दिन से जांच कर रही है लेकिन अब तक की जांच से ये साफ हो गया है कि गोधरा में जो धांधली पकड़ी गई उसका लिंक भी कई राज्यों से है. ऐसा इसलिए क्योंकि गोधरा में परीक्षा देने वाले कुछ बच्चे ऐसे थे जो दूरदराज के राज्यों से आए थे. सवाल ये कि अपने राज्य छोडकर इन बच्चों को गोधरा और वडोदरा के पते देकर गोधरा सेंटर पर परीक्षा देने की जरूरत क्यों हुई? राजस्थान, महाराष्ट्र, यूपी, बिहार के छात्रों ने गोधरा सेंटर सलेक्ट किया था.
पटना से हजारीबाग तक गिरफ्तारियां
और इधर पटना में इस घोटाले को लेकर सबसे तेज जांच चल रही है. स्कूल टीचर से लेकर प्रिंसिपल तक शिकंजे में फंस चुके है. हजारीबाग से लेकर पटना तक गिरफ्तारियां हुई हैं और सबने दो नाम अब तक उगले हैं. संजीव मुखिया और सिकंदर यादवेंदु. पटना में एक्शन तो हो रहा है लेकिन मुखिया अब तक फरार है. एहसान उल हक और इम्तियाज आलम से अब सीबीआई हर राज उगलवाने की कोशिश करेगी. शक ये है कि दोनों संजीव मुखिया गिरोह से ही जुडे थे और पेपर लीक कराने के काम में शामिल थे.
अभी तक की सारी कडियां ये बता रही हैं कि संजीव मुखिया ने आसान टारगेट के रूप मे्ं ओएसिस स्कूल को चुना था. हजारीबाग और नालंदा में मुखिया का अच्छा खासा नेटवर्क है. और इसी की मदद से उसने पटना तक पेपर मंगाया.
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संजीव मुखिया अभी तक पकड़ से दूर
मुखिया के गैंग के गुर्गे एक-एक करके पकड़े जा रहे हैं. हजारीबाग से लेकर पटना तक गिरफ्तारियां हो रही हैं लेकिन मुखिया फरार है. अग्रिम जमानत हासिल करने की कोशिश कर रहा है. कभी ये शख्स पेपर लीक के सबसे बडे खिलाडी रंजीत डॉन के साथ काम करता था .उसके साथ मिलकर कई पेपर लीक किए और फिर इतना शातिर हो गया कि खुद का गिराह खड़ा कर लिया. मुखिया का नेटवर्क कई राज्यों में फैल गया मुखिया ने ताजा पेपर लीक मामले में अग्रिम जमानत की याचिका भी दायर की है लेकिन उसको अब तक राहत नहीं मिली है.
मुखिया ने गिरोह खड़ा किया
हम आपको पेपर लीक के इस सबसे दागदार खिलाड़ी की पूरी क्राइम कुंडली बताते हैं. मुखिया की देश भर के पेपर लीक माफिया के साथ नेटवर्किंग है. वो पेपर लीक करके 700 करोड़ रुपए कमाने का इरादा पाले हुए था. पेपर लीक के धंधे में संजीव मुखिया ने बाद में अपने बेटे को भी शामिल कर लिया. उसका बेटा शिव पेपर लीक के मामले में पहले से जेल में था. मुखिया के पास ऐसे एक्सपर्ट हैं जिनको देश के अलग-अलग हिस्सों में बॉक्स तोडकर पेपर निकालने के लिए बुलाया जाता था.
पहली बार बीपीएससी का पेपर लीक हुआ था, इसमें भी इनवॉल्व रहा. यहां जिस गाड़ी से पेपर जा रहा था, उसी गाड़ी को पकड़ लिया था. चलती गाड़ी में पेपर बदल दिया. उस गाड़ी के साथ ही इन लोगों ने खेल कर दिया. गाड़ी में पेपर बदल दिया गया. पेपर पूरी तरह से सील था लेकिन बाप-बेटे इस काम में एक्सपर्ट हैं इसलिए पेपर बदल लिया. अब तक तीन प्रश्न पत्र लीक में एक ही गैंग का हाथ उजागर हुआ है.
ये तीन पेपर लीक मामले नीट यूजी, बिहार टीचर भर्ती और बिहार सिपाही भर्ती से जुडे हैं. 2016 में पहली बार संजीव मुखिया को गिरफ्तार किया गया था. और अब एक बार फिर सीबीआई को इसकी तलाश है. देर सवेर वो जांच एजेंसियों के हत्थे चढेगा और तब पेपर लीक के खेल के सारे बडे चेहरे बेनकाब होंगे.