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अल-कायदा के 2 सदस्यों के खिलाफ NIA का बड़ा एक्शन, स्पेशल कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा

एनआईए की जांच के अनुसार दोनों दोषियों को AQIS के विदेशों में बैठे हैंडलर्स ने कट्टरपंथी बनाया था और अपनी टीम में भर्ती किया था और वे सक्रिय रूप से AQIS की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में लगे हुए थे. AQIS द्वारा भर्ती के बाद ये लोग विभिन्न टेलीग्राम समूहों में शामिल हो गए.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
राजेश साहा
  • कोलकाता,
  • 27 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 8:20 PM IST

NIA की स्पेशल कोर्ट ने आज इंडियन सब-कॉन्टिनेंट अल-कायदा (AQIS) के 2 आतंकियों को दोषी ठहराते हुए 7 साल कैद की सजा सुनाई. NIA अदालत ने असम के अख्तर हुसैन लश्कर उर्फ मोहम्मद हुसैन पर 41 हजार और पश्चिम बंगाल के अब्दुल अलीम मंडल उर्फ मोहम्मद जुबा पर 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. NIA ने 30 अगस्त 2022 को IPC की धारा 153ए, 153बी, 120बी, 121, 121ए, 114 और 511 और UAPA अधिनियम की धारा 10, 13, 15, 16, 18 और 20 के तहत मामला दर्ज किया था.

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अल-कायदा के 2 आतंकियों के खिलाफ एक्शन प्रतिबंधित संगठन अलकायदा के 'हैंडलर्स' की पहचान करने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के एनआईए की एक बड़ी सफलता है.

एनआईए की जांच के अनुसार दोनों दोषियों को AQIS के विदेशों में बैठे हैंडलर्स ने कट्टरपंथी बनाया था और अपनी टीम में भर्ती किया था और वे सक्रिय रूप से AQIS की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में लगे हुए थे. AQIS द्वारा भर्ती के बाद ये लोग विभिन्न टेलीग्राम समूहों में शामिल हो गए.

NIA की जांच से यह भी पता चला है कि इन लोगों ने हिजरा को अफगानिस्तान के खुरासान प्रांत में ले जाने की साजिश रची थी, जहां उनका ट्रेनिंग लेने का इरादा था. इसके अलावा दोनों ने आतंक और हिंसा के माध्यम से भारत विरोधी एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए AQIS की साजिश के तहत खुरासान में ट्रेनिंग लेने के बाद भारत में एक विशेष समुदाय के सदस्यों के खिलाफ जिहाद करने की योजना बनाई थी. वे अफगानिस्तान के खुरासान में अन्य युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और एक्यूआईएस में भर्ती करने की प्रक्रिया में भी थे.

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