
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मानव तस्करी के एक मामले के सिलसिले में छह राज्यों में 22 स्थानों पर छापेमारी की. तड़के सुबह से ही एनआईए की अलग-अलग टीमों ने राज्य पुलिस के साथ मिलकर यह अभियान चलाया. यह ऑपरेशन संगठित तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से चलाया गया था, जिसमें संदिग्ध व्यक्तियों के परिसरों को निशाना बनाया गया था.
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इन तलाशी अभियानों के तहत कई राज्यों को शामिल किया गया, जहां उन लोगों और संगठनों पर ध्यान केंद्रित किया गया जो कि कमजोर लोगों की तस्करी में संलिप्त हो सकते हैं. ये समन्वित छापेमारी अभियानों का हिस्सा हैं जो एक आपराधिक नेटवर्क की जांच के अंतर्गत आती हैं, जो कि अवैध उद्देश्यों, जैसे कि जबरन श्रम और शोषण के लिए तस्करी में लिप्त है.
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सीमा पार की जाती थी तस्करी
एनआईए ने स्थानीय पुलिस से इस मामले (RC-10/2024/NIA/DLI) को अपने अधीन ले लिया. बताया जा रहा है कि इस मामले में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की राज्य की सीमाओं के पार और शायद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी शामिल है. एनआईए, जो कि भारत की प्रमुख आतंकवाद विरोधी और जांच एजेंसी है, ने इस मामले को संभाला, जिसमें सीमा पार सिंडिकेट्स से जुड़े बड़े संगठित नेटवर्क की आशंका थी.
पिछले कुछ वर्षों में, मानव तस्करी से निपटने के प्रयासों को और तेज कर दिया गया है, जिसमें तस्करों की आपूर्ति शृंखला को बाधित करना और पीड़ितों को बचाना शामिल है. एनआईए की यह छापेमारी ऐसी गतिविधियों का ध्वस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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कमजोर लोगों को बनाया जाता है निशाना
भारत लंबे समय से मानव तस्करी के मुद्दे से जूझ रहा है, जहां हर साल हजारों लोग, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों से, तस्करों का शिकार बनते हैं. कठोर कानूनों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के बावजूद, तस्करी नेटवर्क क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय रहते हैं, अक्सर प्रवर्तन में कमजोरियों का फायदा उठाते हैं.