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'राम मंदिर आंदोलन सभी के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए...', प्राण प्रतिष्ठा से पहले बोले नितिन गडकरी

अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन सभी के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान था. उन्होंने जोर दिया कि हिंदुत्व का इतिहास हमारे देश का इतिहास है.

Union Minister Nitin Gadkari Union Minister Nitin Gadkari
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 1:07 PM IST

अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होनी है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को राम मंदिर आंदोलन को याद करते हुए कहा कि ये सिर्फ एक मंदिर के लिए नहीं बल्कि सभी के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान था.  

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदुत्व का इतिहास हमारे देश का इतिहास है. बीजेपी नेता नागपुर में एक पुस्तक विमोचन समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे.  

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गडकरी ने कहा कि भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी की 'रथ यात्रा' ने अयोध्या राम मंदिर मुद्दे को देश में सबसे आगे ला दिया. उन्होंने कहा कि वीएचपी के अशोक सिंघल, वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, कई साधुओं और शंकराचार्यों ने इसके लिए संघर्ष किया.  

जहां राम का जन्म हुआ, उस जगह मंदिर...

गडकरी ने कहा, राम जन्मभूमि आंदोलन सिर्फ एक मंदिर के बारे में नहीं था. उन्होंने कहा, "ये प्रयास भारत के इतिहास, संस्कृति और विरासत को गौरव और सम्मान वापस दिलाने के लिए थे." गडकरी ने कहा कि जहां भगवान राम का जन्म हुआ था, वहां राम मंदिर की मौजूदगी देश में रहने वाले सभी लोगों के लिए गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक है. 

उन्होंने कहा कि ये मुद्दा सांप्रदायिकता या जाति संबंधी नहीं था, यह राष्ट्रीय था. नितिन गडकरी ने कहा कि लोग अब खुश हैं कि भगवान राम के जन्मस्थान पर एक भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है और हम सभी को 22 जनवरी को दर्शन करने का अवसर मिलेगा. 
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "अतीत में राजनीतिक लाभ के लिए 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द की गलत व्याख्या की गई थी, लेकिन हमारा समाज शुरु से ही 'धर्मनिरपेक्ष' है. धर्मनिर्पेक्षता का अर्थ है 'सर्व धर्म सत्भाव' यानी सभी धर्मों के लिए समान सम्मान.''   

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राम मंदिर आंदोलन सभी के साथ न्याय के लिए: गडकरी

गडकरी ने कहा कि अयोध्या राम मंदिर आंदोलन सभी के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए जन जागरूकता अभियान था और यह नई तुष्टीकरण नीति के खिलाफ था, जिसे हमारे देश के गौरव, संस्कृति और इतिहास को किनारे रखकर लाया गया था.   

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के 2019 के अयोध्या फैसले के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा, "उस समय हम उम्मीद कर रहे थे कि इतिहास, सच्चाई और सबूतों के आधार पर न्याय दिया जाना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट ने प्रभु राम चंद्र के अनुयायियों को वह न्याय दिया." 

गडकरी ने कहा, "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार कहा करते थे कि भारत में सभी शासक हिंदू होने के बावजूद, कुछ संख्या में विदेशियों ने हम पर इसलिए शासन किया क्योंकि हमारे बीच एकता की कमी थी."
उन्होंने कहा, भारतीयों को जाति से ऊपर उठकर खुद को हिंदू संस्कृति, हिंदू इतिहास और हिंदू जीवन शैली के प्रति समर्पित करना चाहिए. 

उन्होंने कहा कि हिंदू भारतीय संस्कृति है और भारतीय संस्कृति हिंदुत्व का पर्याय है. हिंदुत्व संकीर्ण नहीं है, संप्रदायवादी नहीं है और जातिवादी नहीं है. हिंदू सभी को सम्मिलित करता है, राष्ट्र का गौरव है और हिंदुत्व का इतिहास राष्ट्र का इतिहास है.

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