
संसद के मॉनसून सत्र (Monsoon Session) में विपक्ष के निशाने पर केंद्र सरकार है. हाल ही में फोन हैकिंग मामले के खुलासे को लेकर विपक्ष एकजुट है और सरकार से जवाब मांग रहा है. कांग्रेस, लेफ्ट समेत अन्य पार्टियों द्वारा अब इस मसले पर ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) जांच कराने की मांग की गई है. वहीं, संसद के दोनों सदनों में भी विपक्ष की ओर से इस मसले को उठाया जा रहा है.
कांग्रेस ने की जेपीसी जांच की मांग
कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने इस विवाद पर कहा कि कांग्रेस इस पूरे मसले पर जेपीसी जांच की मांग करती है. कांग्रेस के ही गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार ने जो जवाब दिया है, वह निराशाजनक है. सरकार सिर्फ NSO ग्रुप को बचा रही है, बल्कि उसे जांच बैठानी चाहिए. गौरव गोगोई ने कहा कि पूर्व आईटी मंत्री इस मामले में जांच चाहते थे, लेकिन नए मंत्री ऐसा नहीं कर रहे हैं.
लोकसभा में कांग्रेस (Congress) के नेता अधीर रंजन चौधरी ने इस मसले पर केंद्र सरकार को घेरा. अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि बीजेपी लोकतंत्र के बजाय जासूसी तंत्र चला रही है. हमारे नेता राहुल गांधी की भी जासूसी की गई है, गृह मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए. अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इसकी न्यायिक जांच बिठानी चाहिए. जो भी सरकार के खिलाफ है, उसकी जासूसी हो रही है. सरकार चर्चा से भाग नहीं सकती है.
शिवसेना के सांसदों की ओर से भी जासूसी मामले में जेपीसी जांच की मांग की गई है, इसके मद्देनज़र सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से मुलाकात की.
सीताराम येचुरी ने सरकार को घेरा
सीपीआई (एम) के नेता सीताराम येचुरी ने भी इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के जज की अगुवाई में जेपीसी जांच की मांग की है, साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. सीताराम येचुरी ने कहा कि Pegasus का स्पाइवेयर जो कंपनी चलाती है उसने स्पष्ट कहा है कि सिर्फ सरकारों के साथ सौदा करती है. ऐसे में सरकाकर को बचाना चाहिए कि वो एग्रीमेंट क्या है और किस-किस पर जासूसी हो रही थी.
सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार की पूरी कोशिश देश को एक पुलिस स्टेट बनाने की है और उनके खिलाफ जो भी आवाज आती है उनकी जासूसी की जाए. 2 साल पहले भी बात आई थी तभी हम ने संसद में कहा था कि इसकी जांच होनी चाहिए और सरकार स्वच्छ सामने आए लेकिन सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया.
मायावती और अखिलेश ने सरकार पर उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने इस विवाद पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया. मायावती ने ट्वीट किया कि जासूसी का गंदा खेल व ब्लैकमेल आदि कोई नई बात नहीं, लेकिन काफी महंगे उपकरणों से निजता भंग करके मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, अफसरों व पत्रकारों आदि की सुक्षम जासूसी करना अति-गंभीर व खतरनाक मामला जिसका भंडाफोड़ हो जाने से यहां देश में भी खलबली व सनसनी फैली हुई है.
मायावती ने कहा कि केन्द्र की बार-बार अनेकों प्रकार की सफाई, खण्डन व तर्क लोगों के गले के नीचे नहीं उतर पा रहे हैं. सरकार व देश की भी भलाई इसी में है कि मामले की गंभीरता को ध्यान में रखकर इसकी पूरी स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच यथाशीघ्र कराई जाए ताकि आगे जिम्मेदारी तय की जा सके.
वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मसले पर कहा कि फोन की जासूसी करवाकर लोगों की व्यक्तिगत बातों को सुनना ‘निजता के अधिकार’ का घोर उल्लंघन है. अगर ये काम भाजपा करवा रही है तो ये दंडनीय है और अगर भाजपा सरकार ये कहती है कि उसे इसकी जानकारी नहीं है तो ये राष्ट्रीय सुरक्षा पर उसकी नाकामी है. फ़ोन-जासूसी एक लोकतांत्रिक अपराध है.