
कुवैत पहुंचने के तुरंत बाद शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो स्थानीय लोगों अब्दुल्ला अल बैरन और अब्दुल्लातीफ अलनेसेफ से मुलाकात की. ये वही लोग हैं जिन्होंने भारतीय महाकाव्य रामायण और महाभारत का अरबी में अनुवाद करके प्रकाशित किया है.
अल बरून ने जहां रामायण और महाभारत दोनों का अरबी में अनुवाद किया है, वहीं अल नेसेफ ने रामायण और महाभारत के अरबी संस्करण प्रकाशित किए हैं. प्रधानमंत्री ने अपने मासिक प्रसारण कार्यक्रम “मन की बात” के हालिया संस्करण में इन दोनों लोगों और उनके प्रयासों के बारे में भी बात की थी.
पीएम से मुलाकात के बाद अब्दुल्लातीफ अलनेसेफ ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "मैं बहुत खुश हूं, यह मेरे लिए सम्मान की बात है. पीएम मोदी इससे बहुत खुश हैं. ये पुस्तकें बहुत महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने (प्रधानमंत्री मोदी ने) दोनों पुस्तकों पर हस्ताक्षर किए."
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूछा कि अनुवाद में कितने साल लगे, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें दो साल और आठ महीने लगे. अब्दुल्लातीफ अलनेसेफ और अब्दुल्ला बैरन ने दुनिया भर से 30 से अधिक पुस्तकों और महाकाव्यों का अरबी में अनुवाद किया है.
पीएम मोदी ने किताब पर हस्ताक्षर करने के साथ ही जय श्रीराम भी लिखा. बीजेपी के आईटी मीडिया सेल प्रभारी ने एक्स पर लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जय श्रीराम के साथ अरबी भाषा में अनुवादित रामायण का समापन किया."
बता दें कि पीएम मोदी ऐतिहासिक दो दिवसीय यात्रा पर कुवैत पहुंचे हैं. यह 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की देश की पहली यात्रा है. मोदी की कुवैत यात्रा, 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है, जो सीरिया में बशर अल-असद के शासन के पतन के दो सप्ताह बाद और गाजा में इजरायल और हमास के बीच संभावित युद्धविराम समझौते के संकेतों के बीच हो रही है. कुवैत की यात्रा करने वाली आखिरी भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं, जिन्होंने 1981 में यात्रा की थी.