
गुजरात के गांधीनगर में 19 अक्टूबर 2022 यानी आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने डिफेंस एक्सपो 2022 (Defence Expo 2022) का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने गुजरात के डीसा एयरफील्ड (Deesa Airfield) का शिलान्यास भी किया. एक नया डिफेंस एयरबेस. यानी भारतीय वायुसेना की ताकत और बढ़ने वाली है. पाकिस्तान की हालत खराब होने वाली है.
डीसा एयरफील्ड भारत और पाकिस्तान की सीमा से मात्र 130 किलोमीटर दूर है. एयरफील्ड को डीसा के नानी गांव में बनाया जाएगा. इसे बनाने में करीब 935 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. यह एयरफील्ड 4518 एकड़ जमीन में फैला हुआ है. बनासकांठा जिले के थरड़ राजमार्ग के पास बना है. अब आप सोचेंगे कि इससे एयरफील्ड से फायदा क्या होगा? तो पहले आपको बता दें कि यह वायुसेना का 52वां स्टेशन होगा. यह एयरफील्ड देश की सुरक्षा और इलाके के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होने वाला है.
पीएम मोदी ने बिना नाम लिए कहा कि पश्चिमी सीमा पर किसी भी तरह के दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देना और आसान हो जाएगा. क्योंकि यहां वायुसेना की ताकतवर टीम मौजूद रहेगी. इससे रक्षा मामलों में जो फायदा होगा, वो तो होगा ही इसके अलावा इसके कई सिविलियन फायदे भी हैं.
कांडला पोर्ट-जामनगर रिफायनरी से आर्थिक विकास बढ़ेगा
डीसा एयरफील्ड के बनने कच्छ और दक्षिणी राजस्थान के इलाकों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे. उड़ान (UDAN) स्कीम के तहत लोकल फ्लाइट सर्विस भी शुरू हो सकेगी. यह एयरफील्ड कांडला पोर्ट और जामनगर रिफायनरी से पूर्व की दिशा में स्थित है. यानी ऊर्जा संबंधी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.
अहमदाबाद-वड़ोदरा जैसे केंद्रों को मिलेगी ज्यादा सुरक्षा
डीसा एयरफील्ड सीमा से 130 KM दूर है. यानी भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) पश्चिमी सीमा पर किसी भी तरह के ऑपरेशंस को अंजाम दे सकती है. चाहे वह जमीन पर हो या फिर समुद्र में हो. पश्चिमी सीमाओं पर किसी भी तरह के जरूरी हवाई सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहेगा. ताकि अहमदाबाद और वड़ोदरा जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्रों को दुश्मन के हमलों से बचाया जा सके.
HADR जैसे ऑपरेशंस को पूरा करने में मिलेगी मदद
इसके अलावा यहां से ह्यूमेनिटेरियन एसिसटेंस और डिजास्टर रिलीफ (HADR) ऑपरेशंस को करना आसान होगा. इसकी जरूरत प्राकृतिक आपदाओं और युद्ध के समय पड़ती है. इस एयरफील्ड पर जो रनवे बनने वाला है, उसपर बोईंग सी-17 ग्लोबमास्टर जैसे बड़े विमान भी उतर सकेंगे. पूरा एयरबेस बनने में दो साल लग जाएंगे. साल 2024 में यह एयरबेस बनकर पूरी तरह से तैयार हो जाएगा.
गुजरात-राजस्थान के एयरबेस से बढ़ेगा कॉर्डिनेशन
यह एयरबेस वायुसेना के दक्षिण-पश्चिम कमांड का बेहद रणनीतिक एयरबेस होगा. क्योंकि इसकी मदद से गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र तीनों की सुरक्षा की जा सकेगी. इसके बनने से भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स की क्षमता और रेंज काफी ज्यादा हो जाएगी. इसके बनने से भारतीय वायुसेना के अन्य पड़ोसी बेस को भी फायदा होगा. जैसे- गुजरात में मौजूद भुज और नलिया. राजस्थान में मौजूद जोधपुर, जयपुर और बाड़मेर. ये सब आपस में कॉर्डिनेट कर सकेंगे.
दो चरणों में पूरा होगा डीसा एयरफील्ड का काम
माना जा रहा है कि डीसा एयरफील्ड (Deesa Airfield) को खास तौर से मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज बनाएगी. फिलहाल डीसा एयरफील्ड पर एक रनवे हैं. यह करीब 1000 मीटर लंबा है. इसपर अभी सिविलियन और चार्टर एयरक्राफ्ट आते हैं. या फिर वीवीआईपी मूवमेंट्स के दौरान हेलिकॉप्टर उतरते हैं. पहले दौर में इस एयरबेस पर रनवे, टैक्सीवे और एयरक्राफ्ट हैंगर्स बनाए जाएंगे. इसके बाद दूसरे फेज में अन्य टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए जाएंगे. एयरबेस पर स्मार्ट फेंसिंग की जाएगी. ग्राउंड वाटर रीचार्जिंग होगी, सेंसर आधारित लाइट्स होंगे. सोलर इलेक्ट्रिसिटी फार्म्स भी होंगे. .