
PM Modi Independence Day Speech: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी. इस मौके पर लगातार 11वीं बार लालकिले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार के बड़े सुधारों की वजह से भारतीय बैंक वैश्विक स्तर पर मजबूत बैंकों में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि कि मजबूत बैंकिंग प्रणाली औपचारिक अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है.
इस अवसर पर पीएम मोदी ने बिना किसी का नाम लेते हुए कहा कि कुछ लोग निराशावादी होते हैं जो देश को पीछे ले जाना चाहते हैं और ऐसे लोगों से बचकर रहे हैं. ऐसे मुट्ठीभर निराशा की गर्त में डूबे हुए लोगों की गोद में विकृति पलती है जो विनाश का कारण बन जाती है.
कुछ लोग प्रगति देख नहीं सकते- पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा, 'ये भी सच है कि कुछ लोग होते हैं जो प्रगति देख नहीं सकते हैं, कुछ लोग होते हैं जो भारत का भला सोच नहीं सकते हैं, जब तक खुद का भला नहीं होता, तब तक उन्हें किसी का भला अच्छा नहीं लगता है.ऐसे विकृत मानसिकता से भरे हुए लोगों की कमी नहीं है. देश को ऐसे लोगों से बचना होगा, क्योंकि वो निराशा की गर्त में डूबे हुए लोग हैं. ऐसे मुट्ठीभर निराशा की गर्त में डूबे हुए लोग, जब उनके गोद में विकृति पलती है तो वह विनाश का कारण बन जाती है, सर्वनाश का कारण बन जाती है, एनार्की (अराजकता)का मार्ग ले लेती है और तब देश को इतनी बड़ी हानि हो जाती है जिसकी भरपाई करने में हमको नए सिरे से मेहनत करनी पड़ती है.'
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पीएम मोदी ने कहा, 'जो छिटपुट निराशावादी तत्व होते हैं, उनसे बचना होगा. उनकी गोद में विकृति पल रही है.ये विकृति विनाश और सर्वानाश के ताने-बाने देख रही है. देश को इसे समझना होगा. मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं कि हम अपनी नेक नियत और ईमानदारी से, राष्ट्र के प्रति हमारे समर्पण से, हम सारी परिस्थितियों के बावजूद भी, विपरीत मार्ग पर जाने वालों के भी दिल जीतकर हमें देश को आगे बढ़ाने के अपने संकल्प में कभी पीछे नहीं हटेंगे. ये मैं विश्नास दिलाना चाहता हूं.'
चुनौतियां अंदर और बाहर दोनों जगह हैं- पीएम
देश की चुनौतियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, 'चुनौतियां बहुत हैं, चुनौतियां भीतर भी हैं और बाहर भी हैं. जैसे-जैसे हम ताकतवर बनेंगे वैसे-वैसे चुनौतियां और बढ़ेंगी. बाहर की चुनौतियां और बढ़ेंगी. मुझे उसका भलीभांति अंदाज हैं. मैं ऐसी शक्तियों के लिए कहना चाहता हूं कि भारत का विकास किसी के लिए संकट लेकर नहीं आता है. जब हम विश्व में समृद्ध थे तब भी हमने किसी को दुनिया में युद्ध में नहीं झोंका.'
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