
भारत में इसी महीने हुए जी20 के आयोजन की हर तरफ जमकर तारीफें हुईं. इसको सफल बनाने के लिए जिन लोगों ने दिन-रात काम किया, अब पीएम मोदी उनसे मिलने वाले हैं. दरअसल, जी20 शिखर सम्मेलन को सफल बनाने में करीब 3 हजार लोग जुटे थे. इन सभी से पीएम मोदी 22 सितंबर को शाम 6 बजे भारत मंडपम में मुलाकात करेंगे.
सरकार की तरफ से जारी सूचना के मुताबिक पीएम सभी लोगों से बातचीत करेंगे और इन्हें संबोधित करेंगे. इसके बाद इन सभी के लिए भारत मंडपम में ही डिनर का आयोजन भी किया जाएगा. इन 3 हजार लोगों में विशेष रूप से वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने शिखर सम्मेलन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया है. इनमें विभिन्न मंत्रालयों के सफाईकर्मी, ड्राइवर, वेटर और अन्य कर्मचारी शामिल हैं. इस दौरान तमाम विभागों के मंत्री और अधिकारी भी मौजूद रहेंगे.
भारत की अध्यक्षता में जी-20 का सफल आयोजन
भारत की अध्यक्षता में जी-20 का नई दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को सफल आयोजन हुआ है. इस समिट में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, इटली, सऊदी अरब, अर्जेंटीना समेत दुनिया के तमाम शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए थे. जी-20 में नई दिल्ली घोषणा पत्र पर भी आम सहमति बनी है. इसे भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया जा रहा है. जी-20 समिट की सफलता के लिए पीएम मोदी को दुनियाभर से बधाई मिलीं.
फिलहाल कौन से देश हैं इसमें साल 1999 में दुनिया की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं का एक संगठन बना. तब इसमें कुछ ही देश शामिल थे. जैसे-जैसे दूसरे कई देश मजबूत हुए, वे भी इसका हिस्सा बनते गए. साल 2008 में इसकी पहली आधिकारिक बैठक अमेरिका में हुई. फिलहाल G20 में भारत के अलावा रूस, ब्राजील, कनाडा, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, अमेरिका, चीन, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, तुर्की, ब्रिटेन और एक यूरोपीय संघ शामिल है.
अफ्रीकन यूनियन बना 21वां सदस्य
G20 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समूह में अफ्रीकी संघ के प्रवेश की बात की, जिसपर सारे लीडर्स ने सहमति जताई. यहां सवाल उठता है कि अफ्रीकन यूनियन को क्यों मेंबरशिप मिली. तो इसकी वजह साफ है. ये 55 देशों का ग्रुप है, जिसके पास कच्चे माल का भंडार और मैनपावर दोनों है. आगे चलकर ये दुनिया की इकनॉमी को नई दिशा दे सकता है. यही सारे पहलू देखते हुए यूनियन को क्लब की एंट्री मिली.