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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बिहार के सासाराम में चुनावी रैली की. इस दौरान उन्होंने स्वामित्व योजना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार की स्वामित्व योजना में सब कुछ टेक्नोलॉजी के माध्यम से हो रहा है. इसके माध्यम से गांव के हर एक व्यक्ति को उनके घर का, उनकी जमीन का स्वामित्व कार्ड दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने कुछ दिन पहले ही गांवों के लिए इस योजना शुरुआत की थी. उन्होंने कहा कि प्रॉपर्टी कार्ड मिलेंगे तो किसी के घर पर कब्जा नहीं होगा, बिहार में चुनाव के बाद इसे लागू किया जाएगा.
क्या है स्वामित्व कार्ड?
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इसी साल 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के दिन स्वामित्व (SVAMITVA) योजना की शुरुआत की थी. इसी के तहत प्रॉपर्टी कार्ड दिए गए हैं. इस कार्ड के माध्यम से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक के हजारों गांवों के लोगों को लाभ मिल चुका है. हालांकि, पीएम मोदी ने इस योजना की शुरुआत करते वक्त ही कहा था कि अगले चार साल में इसके तहत देश के करीब 6.20 लाख गांवों को शामिल किया जाएगा.
कैसे होता है स्वामित्व कार्ड के लिए सर्वे?
'स्वामित्व' योजना के तहत गांवों की भूमि की पैमाइश ड्रोन के जरिए होगी. ड्रोन से गांवों की सीमा के भीतर आने वाली हर प्रॉपर्टी का एक डिजिटल नक्शा तैयार होगा. साथ ही हर ब्लॉक यानी विकास खंड की सीमा भी तय होगी. SVAMITVA का पूरा नाम है Survey of Villages Abadi and Mapping with Improvised Technology In Village Areas यानी गांवों का सर्वेक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में नवीतनम तकनीक के साथ मैपिंग. इसके द्वारा गांवों में जमीन के सभी रिकॉर्ड डिजिटल हो जाएंगे. यह पंचायती राज मंत्रालय, राज्यों के पंचायती राज विभाग, राज्यों के राजस्व विभाग और सर्वे ऑफ इंडिया का संयुक्त प्रयास है.
हर संपत्ति की होगी मैपिंग
आसान भाषा में समझें तो इसके तहत देश के सभी गांवों में ड्रोन के माध्यम से गांव की हर संपत्ति की मैपिंग की जाएगी. इसके बाद गांव के लोगों को उस संपत्ति का मालिकाना प्रमाणपत्र दिया जाएगा. इसका मतलब ये हुआ कि स्वामित्व योजना के जरिए संपत्ति को लेकर भ्रम और झगड़े खत्म हो जाएंगे. इससे गांव में विकास योजनाओं की प्लानिंग में मदद मिलेगी. वहीं शहरों की तरह गांवों में भी आप बैंकों से लोन ले सकेंगे. इसके लिए ग्रामीणों से न्यूनतम डॉक्युमेंट मांगे जाएंगे.
कैसे बनेगा स्वामित्व कार्ड?
इस योजना के तहत प्रॉपर्टी कार्ड के लिए आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी. जैसे-जैसे मैपिंग, सर्वे का काम पूरा होगा, सरकार खुद ही सभी लोगों को उनकी प्रॉपर्टी का कार्ड देती जाएगी. गांव का सर्वे पूरा होने के बाद प्राप्त डेटा को पंचायती राज मंत्रालय के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा. इसके बाद प्रॉपर्टी कार्ड बनना शुरू हो जाएगा.
इसके बाद जमीन मालिकों को संपत्ति कार्ड जिला स्तर पर कैंप लगा कर सौंपे जाएंगे. जब आपके जिले के कलेक्टर के दिशा-निर्देश में ड्रोन मैपिंग सर्वे पूरा करा लिया जाएगा, तब उन जमीनों पर काबिज लोगों से संपत्ति के प्रूफ मांगे जाएंगे. जिनके पास प्रूफ हैं, वह तुरंत इसकी फोटोकॉपी जमा कर सकते हैं, लेकिन कागजात न होने की स्थिति में भूमि पर काबिज व्यक्तियों को घरौनी नामक दस्तावेज बना कर दिया जाएगा.
डिजिटल रूप में यह कार्ड आपको जिला प्रशासन के पंचायती राज विभाग के द्वारा अथवा मोबाइल पर भेजे गए SMS से प्राप्त होगा. इससे आप डिजिटल कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे और इसके आधार पर आप फिजिकल कार्ड भी ले सकेंगे. आपको इसके लिए इन दस्तावेजों को देने की जरूरत होगी- आधार नंबर, भूमि की खसरा खतौनी की नकल, भूमि दस्तावेज नहीं होने पर घरौनी की नकल.
स्वामित्व कार्ड से क्या होगा फायदा?
प्रॉपर्टी के मालिक को उसका मालिकाना हक आसानी से मिलेगा. एक बार प्रॉपर्टी कितनी है, तय होने पर उसके दाम भी आसानी से तय हो पाएंगे. प्रॉपर्टी कार्ड का इस्तेमाल कर्ज लेने में किया जा सकेगा. पंचायती स्तर पर टैक्स व्यवस्था में सुधार होगा. प्रॉपर्टी का कार्ड होने से ग्रामीण लोग आसानी से बैंकों से लोन भी हासिल कर सकेंगे.
गौरतलब है कि देश की करीब 70 फीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है, जहां जमीन-प्रॉपर्टी के स्वामित्व का लोगों के पास कोई प्रमाण नहीं होता. लोगों के पास मालिकाना हक का पुख्ता प्रमाण न होने से अक्सर विवाद और मुकदमेबाजी की स्थिति रहती है. SVAMITVA से ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन के अधिकार को लेकर स्पष्टता आएगी. इससे ग्राम पंचायतों के विकास की योजना बेहतर तरीके से हो सकेगी. इसके बाद ग्रामीणों को आसानी से उनके प्रॉपर्टी के मालिकाना हक वाला कार्ड दिया जा सकेगा, जिससे किसी तरह के विवाद की स्थिति नहीं रहेगी.
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