
संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष के 146 सांसदों को सस्पेंड करने का मामला गरमाया हुआ है. विपक्ष इस मामले में केंद्र को घेरने की पूरी कोशिश कर रहा है. ऐसे में संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) का कहना है कि सरकार चाहती थी कि सभी बिलों पर सदन में चर्चा हो लेकिन कांग्रेस और विपक्ष की नीयत ऐसी नहीं थी. यही समस्या है. जब उन्होंने ये फैसला कर लिया कि वे सदन में किसी भी चर्चा में शामिल नहीं होंगे तो ऐसे में सरकार के पास क्या विकल्प रह जाता?
इंडिया टुडे के साथ इंटरव्यू में प्रह्लाद जोशी ने कहा कि संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने कहा था कि वे सदन में मणिपुर पर चर्चा चाहते हैं. मैंने तुरंत रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और गृहमंत्री अमित शाह से बात की. हम मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार हो गए. लेकिन फिर विपक्ष ने अचानक से कह दिया कि इस मामले पर वे प्रधानमंत्री का बयान चाहते हैं. विपक्ष नहीं चाहता कि संसदीय नियमों से सदन चले. सोए हुए को जगाना आसान है, लेकिन जो सोने का नाटक कर रहा हो, उसे नहीं जगाया जा सकता.
विपक्ष के एक भी सांसद के सस्पेंड पर दुख हुआ
यह पूछने पर कि विपक्ष गृहमंत्री से सिर्फ एक बयान चाहता था. अगर गृहमंत्री बयान दे देते तो संसद की कार्यवाही आसानी से हो जाती. इस पर प्रह्लाद जोशी ने कहा कि जिस दिन संसद की सुरक्षा में सेंधमारी का मामला सामने आया. उसी दिन संसद की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद हमने आश्वासन दिया था कि एक बार मामले की विस्तृत जानकारी सामने आने दीजिए, सरकार इस पर बयान भी देगी और जांच भी होगी लेकिन इसके बावजूद भी विपक्षी पार्टियों ने संसद की कार्यवाही बाधित करनी शुरू कर दी. हमने तो ये भी नहीं कहा कि हम इस पर बयान नहीं देंगे.
राहुल गांधी नहीं चाहते थे कि संसद चले
विपक्षी सांसद ये तय करके आए थे कि वे संसद चलने नहीं देंगे. दरअसल संसद की नई इमारत में पहले दिन की कार्यवाही सफलतापूर्वक होने के बाद स्पीकर की अध्यक्षता में एक मीटिंग बुलाई गई थी. इस मीटिंग में सभी पार्टियां मौजूद थी. इस मीटिंग में स्पीकर ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि हम चाहते हैं कि संसद सुचारू ढंग से चले. उन्होंने आग्रह भी किया कि कोई भी संसद सदस्य सदन में प्लेकार्ड लेकर नहीं आएगा. संसद में प्लेकार्ड पर प्रतिबंध है. सभी ने इस पर सहमति भी जताई. यह भी कहा गया कि अगर कोई सदन में प्लेकार्ड लेकर आएगा तो उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा. कहने का मतलब है कि सबकुछ सही चल रहा था और एक दिन अचानक आपको कहीं से निर्देश मिल गए और आपने संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी.
जोशी ने कहा कि राहुल गांधी के इशारे पर विपक्ष प्रदर्शन कर रहा है. वे नहीं चाहते थे कि संसद की कार्यवाही सुचारू ढंग से चले. खुद विपक्षी सांसदों की वजह से उनका सदन से सस्पेंशन हुआ.
विधानसभा हार से बौखलाया है विपक्ष
संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि विपक्ष विधानसभा चुनावों में मिली हार से बौखलाया हुआ है और उसने अपनी हार का बदला लेने के लिए सस्पेंशन को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया. वे चाहते ही नहीं थे कि विपक्ष सही तरीके से चले.
जोशी ने कहा कि ये आरोप लगाना कि इन तीन नए बिलों को बिना चर्चा के पारित किया गया. यह गलत है. इन बिलों पर छह घंटे तक चर्चा हुई थी, जिसके बाद इन्हें पारित किया गया.
संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि देश ने अब गुजरात मॉडल को स्वीकार कर लिया है. लोकसभा चुनाव में दो बार की जीत इसका प्रमाण है और अब तीसरी बार भी ऐसा ही होगा.