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राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति चुनाव में भी सनी देओल ने नहीं डाला वोट, कहां हैं गुरदासपुर के BJP सांसद?

अभिनेता से नेता बने सनी देओल पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर गुरदासपुर सीट से चुनाव मैदान में उतरे सनी ने कांग्रेस के उम्मीदवार रहे दिग्गज नेता सुनील जाखड़ को 82459 वोट के भारी-भरकम अंतर से हराया था. सनी देओल ने राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं किया था और अब वे उपराष्ट्रपति के लिए हुई वोटिंग से भी नदारद रहे.

सनी देओल (फाइल फोटो) सनी देओल (फाइल फोटो)
उदित नारायण
  • नई दिल्ली,
  • 07 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 7:46 PM IST

देश में राष्ट्रपति और उसके बाद अब उपराष्ट्रपति पद के लिए भी चुनाव हो गया है. दोनों चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है. मगर, इन दोनों चुनाव में अभिनेता से नेता बने सनी देओल ने मतदान नहीं किया. वे दोनों चुनाव के वक्त वोटिंग से दूर रहे. ऐसे में चर्चा तेज हो गई है कि जब बीजेपी एक-एक वोट को लेकर काफी गंभीर थी, सांसद सनी देओल ने वोटिंग में हिस्सा क्यों नहीं लिया?

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सनी देओल पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट से बीजेपी के सांसद हैं. उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रहे दिग्गज नेता सुनील जाखड़ को 82459 वोट के भारी-भरकम अंतर से हराया था. सनी देओल को 5 लाख 58 हजार 719 और सुनील जाखड़ को 4 लाख 76 हजार 260 वोट मिले थे. हालांकि, पंजाब में विधानसभा चुनाव के बाद सुनील जाखड़ भी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं.

पीठ में चोट लगने से ऑपरेशन कराने अमेरिका गए सनी

लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद सनी देओल पर अक्सर आरोप लगते रहे हैं कि वे अपने संसदीय क्षेत्र में समय नहीं दे रहे हैं. उनकी संसद में भी कम उपस्थिति देखने को मिलती है. पिछले साल गुरदासपुर में सनी के लापता वाले पोस्टर भी लगाए गए थे. हाल ही में 18 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव में भी सनी देओल वोट नहीं दे पाए थे. ANI के मुताबिक, सनी देओल एक शूटिंग के दौरान पीठ में चोट लगने की वजह से घायल हो गए थे. वे सर्जरी कराने के लिए अमेरिका गए हैं. अब कहा ये जा रहा है कि विदेश में होने की वजह से वे वोटिंग में शामिल नहीं हो सके हैं. 

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सनी की आमदनी फिल्मों से है: निजी सहायक

सनी देओल के संसदीय क्षेत्र गुरदासपुर में सांसद ग्राम योजना के तहत गांव भोपर सेदा को गोद लेने की प्रक्रिया के मौके पर भी अनुपस्थित रहे. 22 जुलाई को आयोजित हुए इस कार्यक्रम में सनी के निजी सहायक पंकज शर्मा ने औपचारिकताएं पूरी कीं. सांसद सनी देओल के निजी सहायक पंकज शर्मा ने कहा कि सांसद के पास समय नहीं है. उन्होंने कहा कि सनी देओल की आमदनी फिल्मों से है. सांसद बनना उनके लिए एक सेवा है, इसलिए वह फिलहाल अपने काम में व्यस्त हैं. उन्होंने ये भी कहा कि सनी देओल राष्ट्रपति चुनाव के वक्त विदेश में थे, व्यस्तता के चलते नहीं आ पाए.

अब 6 अगस्त को उपराष्ट्रपति चुनाव में भी सनी देओल ने मतदान नहीं किया. मीडिया रिपोटर्स के मुताबिक, सनी को चोट लगने के बाद पहले मुंबई के अस्पताल में एडमिट कराया गया था. बाद में वे ऑपरेशन कराने के लिए अमेरिका चले गए. रिकवर होने के बाद भारत वापस लौटेंगे. यही कारण है कि सनी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह में भी नजर नहीं आए थे.

देओल परिवार राजनीति में नहीं कर सका कमाल

फिल्मी दुनिया में पर्दे पर छाए रहने वाले देओल परिवार का राजनीति से भी पुराना नाता रहा है. हालांकि, ये परिवार राजनीति में कुछ खास कमाल नहीं कर सका है. देओल परिवार के सदस्य सनी देओल, हेमा मालिनी और धर्मेंद्र जब-जब सांसद निर्वाचित हुए, तब-तब उनके निर्वाचन क्षेत्र से ये शिकायतें आती रहीं कि नेताजी उपलब्ध नहीं हैं.

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दरअसल, पंजाब के पठानकोट बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर पिछले साल सनी देओल की गुमशुदगी के पोस्टर भी लगाए गए थे. पोस्टर में सांसद सनी देओल पर यूथ कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि जब से कोरोना शुरू हुआ है तब से सांसद गायब हैं.

हेमा के मथुरा में लगे थे लापता वाले पोस्टर

इसी तरह, बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल यानी हेमा मालिनी के संसदीय क्षेत्र मथुरा में भी उनके गुमशुदगी के पोस्टर कई बार लगते रहे हैं. पिछले साल मई माह में मथुरा के युगल घाट पर सांसद हेमा मालिनी के लापता होने के पोस्टर लगाए गए थे. साथ ही इन पोस्टर्स पर लापता होने के साथ इनाम भी देने की बात कही गई थी. लोगों का कहना था कि पूरे कोरोनाकाल में हेमा संसदीय क्षेत्र में नजर नहीं आईं.

धर्मेंद्र जीतने के बाद एक या दो बार ही बीकानेर गए

धर्मेंद्र भी 2004 से 2009 तक बीकानेर से बीजेपी के सांसद रहे. स्थानीय लोग बताते हैं कि चुनाव जीतने के बाद धर्मेंद्र एक या दो बार ही बीकानेर आए. उसके बाद कभी लोगों के बीच नहीं पहुंचे. उनके लापता होने के विज्ञापन अखबारों में भी छपे थे. हालांकि, उस वक्त उनके प्रवक्ता ने ये कहा था कि धर्मेंद्र बीमार होने की वजह से बीकानेर नहीं आ पा रहे हैं.

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