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हाथ में कैमरा, सामने शेर... गिर नेशनल पार्क में दिखा लॉयन सफारी करते PM मोदी का अलग अंदाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को अलग अंदाज में नजर आए. उन्होंने गुजरात के गिर नेशनल पार्क में जंगल सफारी की. इस दौरान प्रधानमंत्री हाथ में कैमरा लिए हुए और गिर नेशनल पार्क में शेरों के फोटो क्लिक करते दिखे.

गिर नेशनल पार्क में पीएम मोदी लॉयन सफारी के दौरान हाथ में कैमरा लेकर तस्वीरें क्लिक करते नजर आए. गिर नेशनल पार्क में पीएम मोदी लॉयन सफारी के दौरान हाथ में कैमरा लेकर तस्वीरें क्लिक करते नजर आए.
ब्रिजेश दोशी
  • अहमदाबाद,
  • 03 मार्च 2025,
  • अपडेटेड 2:08 PM IST

गुजरात के गिर नेशनल पार्क पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (3 मार्च) को अलग अंदाज में दिखे. लॉयन सफारी करते समय पीएम मोदी हाथ में कैमरा लिए हुए थे और एक के बाद एक शेरों के फोटो क्लिक कर रहे थे. पीएम मोदी सफारी के लिए एक खुली जीप में सवार थे.

दरअसल, पीएम मोदी गुजरात के सासन गिर में 'विश्व वन्यजीव दिवस' के दौरान पहुंचे. उन्होंने गिर नेशनल पार्क की लॉयन सफारी की. प्रधानमंत्री बनने के बाद सासन और लॉयन सफारी का यह पीएम मोदी का पहला कार्यक्रम है.

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बता दें कि गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने सासन को विश्व के बड़े पर्यटन स्थलों के रूप में जगह दिलाई. सफारी के बाद वह सासन के सिंह सदन में वन्य जीव बोर्ड की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें कुल 47 सदस्य हैं. इनमें सेना प्रमुख, विभिन्न राज्यों के सदस्य, एनजीओ, वन सचिव आदि शामिल हैं. इसके बाद वह दोपहर 12 बजे सोमनाथ मंदिर पहुंचेंगे. वहां पर दर्शन करने के बाद पीएम मोदी राजकोट से दोपहर 3 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे.

दरअसल, एशियाई शेरों के एकमात्र घर सासन गिर के विकास के लिए गुजरात के सीएम रहते हुए पीएम मोदी ने बड़े फैसले लिए थे, जिसकी वजह से आज देश-विदेश से लाखों पर्यटक सासन गिर में शेर देखने आते हैं. वर्तमान में गुजरात के 9 जिलों के 53 तालुकाओं में लगभग 30,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में शेरों की आबादी है.

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सीएम रहते हुए किए कई प्रयास

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के सासन गिर में रहने वाले एशियाई शेरों के संरक्षण और गिर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कई प्रयास किए. उन्होंने स्वयं 2007 में गिर वन क्षेत्र का दौरा किया था और वहां की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की थी. इसके बाद उन्होंने गिर क्षेत्र के समग्र विकास, शेरों के संरक्षण और गिर के वन्य जीवन के संरक्षण के लिए कठोर प्रयास किए.

साल 2007 में उठाए थे ये बड़े कदम

> 2007 में शेर के शिकार की घटना के बाद, गुजरात सरकार ने जूनागढ़ में ग्रेटर गिर वन्यजीव संरक्षण टास्क फोर्स डिवीजन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य वन्यजीव अपराधों की निगरानी करना, खुफिया जानकारी एकत्र करना और एशियाई शेरों और एशियाई शेरों के क्षेत्र में रहने वाले अन्य वन्यजीवों के संरक्षण को मजबूत करना था.

> सीएम रहते हुए नरेन्द्र मोदी ने ग्रेटर गिर की अवधारणा दी, जिसमें गिर का मतलब सिर्फ गिर राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्य ही नहीं है, बल्कि बरडा से बोटाद तक 30 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला वह क्षेत्र भी है, जहां एशियाई शेरों की आबादी पाई जाती है. सीएम मोदी ने गिर के विकास के साथ-साथ वहां के स्थानीय लोगों के विकास को भी सुनिश्चित किया है.

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> तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार गिर क्षेत्र के लिए वन विभाग में महिला बीट गार्ड और वनपालों की भर्ती की गई. आज, गिर में लगभग 111 महिला श्रमिक सक्रिय रूप से कार्यरत हैं.

> गिर क्षेत्र और गिर शेरों की स्थिति की समीक्षा के लिए जूनागढ़ रेंज के महानिरीक्षक (आईजी) की अध्यक्षता में मासिक समीक्षा बैठकें शुरू की गईं.

> साल 2007 में गुजरात राज्य शेर संरक्षण सोसायटी (जीएसएलसीएस) की स्थापना की गई, जो जन भागीदारी के माध्यम से एशियाई शेरों के संरक्षण का समर्थन करती है. यह पशु चिकित्सा अधिकारियों, पशुपालकों, ट्रैकर्स और शेर संरक्षण के लिए आवश्यक अन्य लोगों को वित्त पोषण प्रदान करता है. गिर इको-पर्यटन से प्राप्त राजस्व जीएसएलसीएस को दिया जाता है, जो इस धन का उपयोग वन्यजीव संरक्षण और वन विभाग के बुनियादी ढांचे के लिए करता है.

> गुजरात सरकार ने शेर संरक्षण प्रयासों को बढ़ाने के लिए वन्य पनु मित्र योजना शुरू की. इस पहल का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, शेरों और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखना तथा बचाव कार्यों और संरक्षण प्रयासों में वन विभाग की सहायता करना है.

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