
महाराष्ट्र के पुणे में हुआ पोर्श (Porsche) हादसा चर्चा में बना हुआ है. इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इस मामले के चश्मदीद और नाबालिग आरोपी को पुलिस को सौंपने वाले संकेत ने इस घटना का आंखों देखा हाल बताया.
चश्मदीद संकेत ने बताया कि घटना के दिन पोर्श कार की स्पीड बहुत ज्यादा थी. कार ने मोटरसाइकिल को इतनी जोर से टक्कर मारी कि हम कुछ समझ ही नहीं पाए. लड़की की मौके पर ही मौत हो गई थी. वह मेरे सामने ही आसमान में 15 फीट ऊपर तक उछलकर गिरी थी. लड़के का शरीर क्षत-विक्षत हो गया था.
संकेत ने बताया कि आरोपी को घटनास्थल से भागने का मौका ही नहीं क्योंकि कार के सभी एयरबैग्स खुल गए थे. कार में नाबालिग आरोपी के अलावा दो से तीन शख्स और थे. एयरबैग खुलने की वजह से ये सभी लोग कार से बाहर निकल आए थे, जिसके बाद भीड़ ने आरोपी को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया. मैंने आरोपी को पकड़कर रखा था और जैसे ही पुलिस मौके पर पहुंची. उसे पुलिस को सौंप दिया.
नाबालिग आरोपी ही गाड़ी चला रहा था
संकेत ने बताया कि पोर्श कार नाबालिग ही चला रहा था. वह बुरी तरह से नशे में था. वह इतना नशे में था कि भीड़ उसे मार रही थी लेकिन उस पर कोई असर नहीं हो रहा था. उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था. मैं उसे एक्सीडेंट साइट पर लेकर गया और उसे दिखाया कि देखो तुमने ये क्या कर दिया है.
चश्मदीद संकेत बताते हैं कि जब भीड़ नाबालिग को पीट रही थी कि किसी को कोई अंदाजा नहीं था कि वह कौन है. बाद में भीड़ में से किसी ने कहा, 'अरे ये तो अग्रवाल का लड़का है... ये ब्रह्मा रियलटी बिल्डर का बेटा है..'
क्या है मामला?
पुणे के कल्याणी नगर इलाके में रियल एस्टेट डेवलपर विशाल अग्रवाल के 17 साल के बेटे ने अपनी स्पोर्ट्स कार पोर्श से बाइक सवार दो इंजीनियरों को रौंद दिया था, जिससे दोनों की मौत हो गई थी. इस घटना के 14 घंटे बाद नाबालिग आरोपी को कोर्ट से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई थी. कोर्ट ने उसे 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव-समाधान पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का निर्देश दिया था. हालांकि, पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी शराब के नशे में था और बेहद तेज गति से कार को चला रहा था. नाबालिग इस समय सुधार गृह में है.
पुलिसकर्मियों की लापरवाही
हादसे के बाद सबसे पहले यरवदा पुलिस स्टेशन के दो अफसर घटनास्थल पर पहुंचे. लेकिन उन्होंने ना अफसरों को सूचना दी और ना कंट्रोल रूम को बताना जरूरी समझा. जोन-1 के डीसीपी गिल भी नाइट राउंड पर थे. उन्हें भी जानकारी नहीं दी गई थी. बाद में पुलिस ने दोनों अफसरों पर एक्शन लिया और उन्हें सस्पेंड कर दिया. दोनों अफसरों के नाम पुलिस निरीक्षक राहुल जगदाले और एपीआई विश्वनाथ टोडकरी हैं. आरोप है कि संबंधित अफसरों ने अपराध की देरी से रिपोर्ट की और कर्तव्य में लापरवाही बरती. आरोपी नाबालिग को मेडिकल परीक्षण के लिए भी लेकर नहीं गए थे.
जांच प्रभावित करने की कोशिश!
घटना के बाद वडगांव शेरी के विधायक सुनील टिंगरे भी सुबह-सुबह यरवदा पुलिस स्टेशन पहुंचे. उनके थाने जाने से विवाद खड़ा हो गया था. आरोप है कि उन्होंने नाबालिग के पक्ष में जांच को प्रभावित करने की कोशिश की. क्योंकि उन्हें रियल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल का करीबी माना जाता है. हालांकि, टिंगरे ने पुलिस पर दबाव बनाने के आरोपों को खारिज कर दिया.