Advertisement

पुणे पोर्श कांड: SC का नाबालिग ड्राइवर के दोस्त के पिता को अग्रिम जमानत देने से इनकार

पुणे पोर्श कांड से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग आरोपी के दोस्त के पिता को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है. आवेदक अरुण कुमार पर सरकारी ससून अस्पताल के डॉक्टरों की मिलीभगत से अपने बेटे के ब्लड सैंपल बदलने का आरोप लगाया गया था.

पुणे पोर्श कांड. (फाइल फोटो) पुणे पोर्श कांड. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 05 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 4:51 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पुणे पोर्श हादसे से संबंधित एक मामले में एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है. इस कार हादसे में दो इंजीनियर्स की जान चली गई थी. 

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के इस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. पीठ ने कहा कि आपके मुकदमे का ट्रायल चल रहा है और आप पर केस हो सकता है.

Advertisement

इससे पहले आवेदक ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने नाबालिग ड्राइवर के दोस्त के पिता अरुण कुमार देवनाथ सिंह को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद आवेदक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

हादसे में हुई थी दो लोगों की मौत

आवेदक का नाबालिग बेटा कथित तौर पर लक्जरी कार की पिछली सीट पर था, जिसे कथित तौर पर एक अन्य नाबालिग चला रहा था. 19 मई की तड़के जब पुणे के कल्याणी नगर में कार ने मोटरसाइकिल पर सवार दो लोगों को कुचल दिया, तब दोनों नाबालिग कथित तौर पर नशे में थे. बाद में पीड़ितों, एक पुरुष और एक महिला, की पहचान आईटी पेशेवर के रूप में की गई थी.

ब्लड सैंपल बदलवाने का है आरोप

Advertisement

नाबालिग आरोपी चालक के माता-पिता ने कथित तौर पर उसके ब्लड सैंपल को उसकी मां के ब्लड सैंपल से बदलने के लिए डॉक्टरों को रिश्वत दी थी. इसी तरह अरुण कुमार पर सरकारी ससून अस्पताल के डॉक्टरों की मिलीभगत से अपने बेटे के ब्लड सैंपल बदलने का आरोप लगाया गया था.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 23 अक्टूबर को अपने आदेश में कहा कि आवेदक के खिलाफ "प्रथम दृष्टया अपराध की सामग्री" बनती है, इस संकेत को रेखांकित करते हुए कि उसके नाबालिग बेटे के ब्लड सैंपल के नमूने बदले गए थे ताकि वह निर्दोष साबित हो सके.

अभियोजन पक्ष से सहमत होते हुए कि आवेदक के फरार होने से जांच में बाधा उत्पन्न हुई, हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पूर्व जमानत याचिका खारिज कर दी.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement