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Explainer: चंडीगढ़ के कर्मचारियों को सेंट्रल पूल में लाने से क्या कुछ बदलेगा, क्यों विपक्ष इसे बता रहा पंजाब से राजधानी छीनने वाला कदम?

चंडीगढ़ को लेकर पंजाब और केंद्र सरकार आमने-सामने आ गई हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया है कि अब चंडीगढ़ के कर्मचारियों को केंद्रीय सेवा नियम के दायरे में लाया जाएगा. इसके बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे पंजाब पुनर्गठन एक्ट के खिलाफ बताया है.

चंडीगढ़ को लेकर पंजाब और केंद्र आमने-सामने आ गए हैं. (फाइल फोटो-PTI) चंडीगढ़ को लेकर पंजाब और केंद्र आमने-सामने आ गए हैं. (फाइल फोटो-PTI)
मनजीत सहगल/कमलजीत संधू
  • नई दिल्ली,
  • 28 मार्च 2022,
  • अपडेटेड 2:07 PM IST
  • चंडीगढ़ को लेकर पंजाब-केंद्र आमने-सामने
  • चंडीगढ़ में अब केंद्रीय सेवा नियम लागू होंगे
  • मान बोले- ये पंजाब पुनर्गठन एक्ट के खिलाफ

Punjab Reorganisation Act 1966: पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद राज्य बनाम केंद्र की तकरार शुरू हो गई है. इस तकरार का कारण 'चंडीगढ़' है. 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने ऐलान किया है कि 1 अप्रैल से चंडीगढ़ के सभी सरकारी कर्मचारी केंद्रीय सेवा नियम के दायरे में लाए जाएंगे. इन कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र भी 58 से बढ़कर 60 साल हो जाएगी. कुल मिलाकर ये है कि चंडीगढ़ के कर्मचारियों को भी वही सब सुविधा मिलेगी, जो केंद्र के कर्मचारियों को मिलती है.

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अमित शाह के इस ऐलान के बाद सियासत भी तेज हो गई है. पंजाब के नए-नए मुख्यमंत्री बने भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने इसका विरोध किया है. उनका कहना है कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ प्रशासन में दूसरे राज्यों के अधिकारियों और कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से लगा रही है. ये पंजाब पुनर्गठन एक्ट 1966 के खिलाफ है. भगवंत मान ने कहा कि पंजाब सरकार चंडीगढ़ पर अपने सही दावे के लिए मजबूती से लड़ेगा.

पंजाब लगातार दावा करता रहा है क चंडीगढ़ उसका अभिन्न हिस्सा है. 1985 में हुए राजीव-लोंगोवाल समझौते में भी इस बात का जिक्र है. केंद्र सरकार के हालिया फैसले का अकाली दल ने भी विरोध किया है. अकाली दल का कहना है कि इससे पंजाब के राजधानी के अधिकार को 'कमजोर' करने की कोशिश की गई है, क्योंकि अब यहां कर्मचारियों पर पंजाब सेवा नियम लागू नहीं होंगे.

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सेंट्रल पूल में आने से क्या बदल जाएगा?

- चंडीगढ़ के कर्मचारियों को सेंट्रल पूल में लाने से कई सारे नियम बदल जाएंगे. अमित शाह के मुताबिक, चंडीगढ़ के कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र 58 से बढ़कर 60 साल हो जाएगी.

- इसके अलावा शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र भी बढ़कर 65 साल हो जाएगी. महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर के लिए 2 साल की छुट्टी भी मिलेगी. 

चंडीगढ़ को लेकर क्या है विवाद?

- 18 सितंबर 1966 को पंजाब पुनर्गठन एक्ट पास हुआ. इस एक्ट से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ अस्तित्व में आया. अकाली नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा के मुताबिक, इस एक्ट में प्रावधान है कि चंडीगढ़ के 60% कर्मचारी पंजाब से और 40% हरियाणा से होंगे.

- कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा चंडीगढ़ को विवादित क्षेत्र मानते हैं. पंजाब के अलावा हरियाणा भी चंडीगढ़ पर अपना दावा करता है. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा का कहना है कि चंडीगढ़ हरियाणा का था और हमेशा हरियाणा का रहेगा. हरियाणा के नेताओं का कहना है कि चंडीगढ़ अंबाला जिले का हिस्सा था जो हरियाणा का हिस्सा है.

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पंजाब-हरियाणा ही नहीं, हिमाचल का भी दावा

सिर्फ पंजाब और हरियाणा ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश भी चंडीगढ़ पर अपना दावा करता है. 27 सितंबर 2011 को एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पंजाब पुनर्गठन एक्ट के तहत चंडीगढ़ की 7.19% जमीन पर हिमाचल का भी हक है. 

हिमाचल के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर दावा करते हैं कि हिमाचल नवंबर 1996 से भाखड़ा नंगल पावर प्रोजेक्ट से पैदा होने वाली बिजली का 7.19% हिस्सा पाने का भी हकदार था. जयराम ठाकुर कहते हैं कि हिमाचल को चंडीगढ़ में उसका वैध हिस्सा मिलना चाहिए.

 

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