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पंजाब में पराली जलाने पर किसानों को चालान जारी, सरकार ने लगाया 9 लाख का जुर्माना

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है, जहां 15 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच 1,212 घटनाएं दर्ज की गईं. इसके साथ ही, किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में 340 रेड एंट्री की गईं और 9 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 7.67 लाख रुपये वसूले गए.

पराली जलाते किसान (फाइल फोटो) पराली जलाते किसान (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 19 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 4:45 PM IST

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में इस सीजन में कमी देखी गई है, जबकि 15 सितंबर से 16 अक्टूबर तक कुल पराली जलाने की 1,212 घटनाएं दर्ज की गईं. इस दौरान, सरकार ने किसानों के खिलाफ 340 चालान जारी किए और 9 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसमें से 7.67 लाख रुपये की वसूली की गई. मौसम में बदलाव के साथ पराली जलाने से प्रदूष की समस्या बढ़ जाती है और ऐसे में यह अहम है कि इन घटनाओं पर लगाम लगाई जाए.

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पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए सरकार किसानों को चेतावनी भी देती रही है. पिछले साल ही सरकार ने जुर्माने के रूप में 1,88,60,500 रुपये की राशि वसूल की थी, जबकि 2,57,60,000 रुपये के जुर्माने लगाए गए थे.

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सबसे ज्यादा अमृतसर में जलाई गई पराली

पंजाब सरकार द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को दी गई जानकारी के मुताबिक, सबसे ज्यादा घटनाएं अमृतसर (400), तरणतारन (261) और पटियाला (134) से दर्ज की गईं. वहीं, सबसे कम घटनाएं पठानकोट में दर्ज की गईं, जहां पराली जलाने की कोई घटना नहीं हुई.

पंजाब में होती है बड़ी धान की खेती

लगातार बढ़ते प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए, अब तक किसानों के खिलाफ 2024 में 51 मामले धारा 188 और 41 मामले CrPC 107/151 के तहत दर्ज किए गए हैं. इसके साथ ही, 2023 में कुल 1,144 एफआईआर दर्ज की गईं. बड़ी धान की खेती के कारण पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा होती हैं. ऐसे में इसपर लगाम लगाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन सरकार ने पेनल एक्शन का प्रावधान शुरू किया है, जिसके बाद इसमें कुछ कमी देखी गई है.

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इस साल घटी पराली जलाने की घटनाएं

2020 में 18 अक्टूबर तक कुल 7,429 घटनाएं दर्ज की गई थीं, लेकिन इस साल यह संख्या घटकर 1,348 हो गई है. राज्य ने 9,492 गांव/क्लस्टर/तहसील/जिला स्तरीय अधिकारियों को तैनात किया है, जो एनजीटी के आदेशों के तहत कार्रवाई और पर्यावरणीय मुआवजा लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं.

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