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राहुल के दौरे पर सपा-कांग्रेस में तकरार! रामगोपाल बोले- संसद में मुद्दा उठा नहीं रहे और संभल जा रहे

सपा नेता रामगोपाल यादव का कहना है कि कांग्रेस पार्टी संसद में संभल मुद्दा उठा नहीं रही है लेकिन राहुल गांधी संभल जा रहे हैं. इसे अब क्या कहें?  कांग्रेस औपचारिकता कर रही है. पुलिस उन्हें जाने नहीं देगी.

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी (फाइल फोटो) राहुल गांधी और प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 04 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आज उत्तर प्रदेश के संभल जाने वाले थे. वे हिंसा में मारे गए लोगों से मुलाकात करने के लिए संभल जाना चाहते हैं. लेकिन उनके काफिले को प्रशासन ने गाजीपुर बॉर्डर पर ही रोक दिया है. इस पर समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने प्रतिक्रिया दी है.

सपा नेता रामगोपाल यादव का कहना है कि कांग्रेस पार्टी संसद में संभल मुद्दा उठा नहीं रही है लेकिन राहुल गांधी संभल जा रहे हैं. इसे अब क्या कहें?  कांग्रेस औपचारिकता कर रही है. पुलिस उन्हें जाने नहीं देगी.

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#WATCH | On Lok Sabha LoP Rahul Gandhi's visit to Sambhal, SP MP Ram Gopal Yadav says, "Our party was already going there and they too were not allowed. They (Rahul Gandhi and other Congress leaders) are going only now..." pic.twitter.com/bnwSMEx3x8

सपा नेता रामगोपाल यादव का कहना है कि कांग्रेस पार्टी संसद में संभल मुद्दा उठा नहीं रही है लेकिन राहुल गांधी संभल जा रहे हैं. इसे अब क्या कहें?  कांग्रेस औपचारिकता कर रही है. पुलिस उन्हें जाने नहीं देगी.

वहीं, कांगेस नेता जयराम रमेश ने राहुल और प्रियंका गांधी को संभल नहीं जाने देने के स्थानीय प्रशासन के फैसले पर कहा कि ये तानाशाही है, हमारे नेताओं को रोका जा रहा है. हम शांति के साथ संभल जा रहे थे लेकिन रोका जा रहा है. संभल में दंगे हुए इसलिए हम वहां जा रहे थे. वहां जाना हमारा अधिकार है.

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बता दें कि स्थानीय प्रशासन की रोक बीच कांग्रेस ने सिर्फ पांच लोगों को संभल जाने की इजाजत देने की मांग की थी लेकिन ये मांग भी ठुकरा दी गई.

मालूम हो कि इससे पहले समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल भी संभल जाने वाला था. सपा अध्यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी का 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल संभल का दौरा करने जाने वाला था लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी थी.

इसके बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि प्रतिबंध लगाना बीजेपी सरकार के शासन, प्रशासन और सरकारी प्रबंधन की नाकामी है. ऐसा प्रतिबंध अगर सरकार उन पर पहले ही लगा देती, जिन्होंने दंगा-फसाद करवाने का सपना देखा और उन्मादी नारे लगवाए तो संभल में सौहार्द-शांति का वातावरण नहीं बिगड़ता. बीजेपी जैसे पूरी की पूरी कैबिनेट एक साथ बदल देते हैं, वैसे ही संभल में ऊपर से लेकर नीचे तक का पूरा प्रशासनिक मंडल निलंबित करके उन पर साजिशन लापरवाही का आरोप लगाते हुए, सच्ची कार्रवाई करके बर्खास्त भी करना चाहिए और किसी की जान लेने का मुकदमा भी चलना चाहिए. बीजेपी हार चुकी है.

क्या है पूरा मामला?

24 नवंबर को संभल में जामा मस्जिद के बाहर स्थानीय लोगों की पुलिस के साथ झड़प हो गई थी, जब कोर्ट के आदेश के बाद संभल की जामा मस्जिद का सर्वे करने ASI की एक टीम पहुंची थी. इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे. हिंसा के बाद चार दिनों तक बाजार बंद रहे और इलाके में तनाव का माहौल बना रहा. संभल प्रशासन ने जिले में हालात सामान्य करने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है. पुलिस उपद्रवियों की पहचान में जुटी है. अभी तक 300 से ज्यादा आरोपियों के पोस्टर जारी किए जा चुके हैं.

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दरअसल, हिंदू पक्ष ने कोर्ट में याचिका दाखिल करके दावा किया था कि संभल की शाही जामा मस्जिद, श्री हरिहर मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी. हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन का दावा है कि बाबर ने यहां मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण करवाया था. हिंदू पक्ष की इन दलीलों पर संभल की अदालत ने मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया था, जिसके बाद से ही इलाके में बवाल मचा हुआ है.

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