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राजस्थान: बजट सत्र के दौरान प्रदेश कांग्रेस चीफ सहित 6 MLA विधानसभा से निलंबित

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, "देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले नेता पर ओछी मानसिकता वाली टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी."

गोविंद सिंह डोटासरा (फाइल फोटो) गोविंद सिंह डोटासरा (फाइल फोटो)
देव अंकुर
  • जयपुर,
  • 21 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 7:42 PM IST

राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) सहित पांच अन्य नेताओं को शुक्रवार को पूरे बजट सत्र के लिए विधानसभा से निलंबित कर दिया गया. राज्य विधानसभा में हंगामा करने के आरोप में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सहित कुल 6 कांग्रेस विधायकों को पूरे बजट सत्र के लिए विधानसभा से निलंबित कर दिया गया है.

राजस्थान सरकार के मंत्री अविनाश गहलोत शुक्रवार को राजस्थान विधानसभा में सरकार की योजना 'लखपति दीदी' के बारे में बता रहे थे. मंत्री ने इंदिरा गांधी के कथित संदर्भ में कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में 'आपकी दादी के नाम' पर योजनाएं चलाई जाती थीं. इस पर हंगामा हुआ और विपक्षी नेताओं ने स्पीकर वासुदेव देवनानी से मंत्री की टिप्पणी को हटाने की मांग की.

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कई बार बाधित हुई कार्यवाही

विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष की मांग नहीं मानी, जिससे हंगामा शुरू हो गया. हंगामे की वजह से विधानसभा की कार्यवाही कई बार रोकनी पड़ी. जब विधानसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, अमीन कागज़ी, रामकेश मीना, हाकम अली सहित 6 कांग्रेस विधायकों के निलंबन का प्रस्ताव रखा. प्रस्ताव पारित होने के बाद विधायकों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया.

निलंबन के विरोध में कांग्रेस नेता राजस्थान विधानसभा के अंदर धरने पर बैठ गए. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों के निलंबन को लेकर सत्तारूढ़ बीजेपी पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा, "पहले तो बीजेपी सरकार के एक मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी पर अभद्र टिप्पणी की और फिर इसके लिए माफी न मांगने पर विरोध जताने वाले कांग्रेस विधायकों को सदन से निलंबित कर दिया. इससे पता चलता है कि राजस्थान विधानसभा में भी लोकसभा और राज्यसभा जैसा ही तरीका अपनाया जा रहा है. जिस तरह वहां अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए सांसदों को निलंबित किया जाता है, वैसा ही यहां भी किया गया है."

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'क्या यह ध्यान भटकाने की कोशिश...'

अशोक गहलोत ने आगे सवाल उठाते हुए कहा, "आखिर मंत्री जी को प्रश्नकाल के दौरान अपने जवाब के अलावा इस तरह की टिप्पणी करने की क्या जरूरत थी? देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले नेता पर इस तरह की ओछी मानसिकता वाली टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी."

उन्होंने आगे कहा, "ऐसा लगता है कि पूरी सरकार तमाशा बन गई है. सरकार के पास एक साल में गिनाने के लिए कोई काम नहीं है, इसलिए विपक्ष के नेता को अभिभाषण के दौरान अपनी नाकामियों को उजागर करने की अनुमति नहीं दी गई."

अशोक गहलोत ने कहा, "अब हमारे प्रदेश अध्यक्ष सहित दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के विधायकों को बजट सत्र से निलंबित कर दिया गया है. क्या यह बजट पर चर्चा से ध्यान भटकाने की कोशिश नहीं है?"

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