
भारत और चीन इस वक्त लद्दाख सीमा पर आमने-सामने हैं. मई में शुरू हुआ तनाव अगस्त के खत्म होते-होते एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. इसी दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस दौरे पर पहुंचे हैं, जहां पर उन्हें शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लेना है. बैठक से इतर चीन के रक्षा मंत्री वे फेंग ने राजनाथ सिंह से मुलाकात की इच्छा जताई है. हालांकि, अभी कुछ तय नहीं है क्योंकि पिछले रूस दौरे पर भी राजनाथ ने किसी द्विपक्षीय बैठक में हिस्सा नहीं लिया था.
क्या चीनी समकक्ष से मिलेंगे राजनाथ सिंह?
SCO की बैठक में संबंधित देशों के रक्षा मंत्री मौजूदा हालातों पर चर्चा करेंगे. इसी कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए राजनाथ सिंह पहुंचे हैं, लेकिन चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच राजनाथ के चीनी समकक्ष ने उनसे मिलने की बात कही है. मई से ही चीन और भारत में तनाव है और तब से अबतक सैन्य-कूटनीतिक लेवल पर कई राउंड की बात हो चुकी है.
अगर दोनों देशों के रक्षा मंत्री मिलते हैं तो ये अबतक की सबसे हाईलेवल मुलाकात होगी, जो तनाव शुरू होने के बाद होगी. हालांकि, अभी राजनाथ सिंह के चीनी रक्षा मंत्री से मिलने पर संशय बरकरार है.
पिछले रूस दौरे पर भी नहीं मिले थे राजनाथ
जून में गलवान में जब चीन और भारत के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, उसके बाद भी राजनाथ सिंह रूस पहुंचे थे. तब रूस की विक्ट्री परेड का जश्न मनाया जा रहा था. उस वक्त भी चीन के प्रतिनिधि वहां मौजूद थे, लेकिन राजनाथ सिंह ने चीनी अधिकारियों से बैठक नहीं की. चीन की ओर से तब भी ऐसी ही मांग की गई थी, जिसपर भारत की ओर से अधिक गौर नहीं दिया गया.
राजनाथ सिंह के अलावा विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी कुछ दिन में रूस जाएंगे. जहां पर वो SCO के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में शामिल होंगे. यहां भी चीन और भारत के विदेश मंत्रियों की मुलाकात हो सकती है. इस मसले पर गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अभी ये मुलाकात तय नहीं है, लेकिन फिक्स होती है तो जानकारी दी जाएगी.
बता दें कि हाल ही में रूस में हो रहे एक सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने से भारत ने इनकार कर दिया था. क्योंकि इसमें चीन और पाकिस्तान की सेनाएं भी हिस्सा ले रही थीं, जो चीन के लिए कूटनीतिक तौर पर एक झटका ही साबित हुआ. चीन पहले ही सीमा पर कई झटके खा चुका है. यही कारण है कि अब इस मसले का हल बातचीत से निकालने की कोशिश है.