
कोरोना संकट के दौरान अस्पतालों की मनमानी का सवाल शनिवार को राज्यसभा में भी उठा. कई सांसदों ने सरकार से मांग की कि सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकार या प्राइवेट अस्पताल मनमानी न करें.
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य रामगोपाल यादव महामारी संशोधन विधेयक 2020 पर चर्चा के दौरान कई सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि असामान्य परिस्थिति में सरकार को निश्चित करना चाहिए कि सरकारी हॉस्पिटल में ही नहीं बल्कि प्राइवेट हॉस्पिटल में भी एक निश्चित अमाउंट लगे. प्राइवेट अस्पताल में 1 दिन का लाख रुपये या उससे ज्यादा का खर्चा आता है, जो कि चुका पाना बहुत मुश्किल होता है. सरकार को यह निश्चित करना चाहिए ज्यादा वसूली न हो.
वहीं बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) के सांसद वीर सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान प्राइवेट हॉस्पिटल में मनमाने दाम वसूलने पर लगाम लगनी चाहिए.
महामारी संशोधन बिल 2020 पर शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा में कहा कि कुछ लोग इस मौके पर राजनीति भी करते हैं. महामारी के मौके पर सरकार को गिराने की कोशिश करते हैं. अगर उनके पास इतना ही धन बल है तो वह प्राइम मिनिस्टर केयर फंड में जमा करा दें. दान दें और इस महामारी से लड़ने में मदद करें.
वहीं बसपा के राजाराम ने शनिवार को उच्च सदन में जम्मू क्षेत्र में अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का मुद्दा उठाया. उन्होंने दावा किया कि ओबीसी की आबादी लगभग 35 और एससी आबादी लगभग 17 प्रतिशत होने के बावजूद दोनों समूहों को क्रमश: 2 और 8 प्रतिशत कोटा मिलता है. उन्होंने कहा कि बसपा ने देश के बाकी हिस्सों की तरह इस क्षेत्र में आरक्षण बढ़ाने की शर्त पर धारा 370 को खत्म करने का समर्थन किया, लेकिन एक साल बाद भी ऐसा नहीं हुआ है.
वहीं कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने महामारी के दौरान ऑनलाइन चल रही कक्षाओं के बीच 'डिजिटल डिवाइड' का मुद्दा उठाया. उन्होंने इस उद्देश्य के लिए गरीब परिवारों के लिए वित्तीय सहायता की भी मांग की.