
इंडिया फाउंडेशन के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य राम माधव ने कहा कि मणिपुर हिंसा में कोई धार्मिक एंगल नहीं है बल्कि यह जमीन का मामला है. 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ' में पहुंचे राम माधव ने कहा कि चीन को लेकर भारत के सामने कई चुनौतियां हैं और सरकार इस दिशा में कदम भी उठा रही है. मणिपुर में हुई हिंसा को लेकर उन्होंने कहा, 'मणिपुर की समस्या कोई धार्मिक समस्या नहीं है. यह आदिवासी बनाम गैर-आदिवासी समस्या नहीं है, यह सब जमीन को लेकर हुई हिंसा है. 10 प्रतिशत घाटी पर 60 प्रतिशत लोगों का घर है. यह राज्य के बीच तनाव का एक कारण रहा है.'
उन्होंने कहा कि मुद्दे के तूल पकड़ने से पहले हमें ज्यादा सक्रिय होने की जरूरत थी और बेहतर प्रयास किए जा सकते थे. उन्होंने कहा कि तनाव कम करने के लिए आपको एक निर्वाचित सरकार की जरूरत है और गृह मंत्री ने वहां बहुत समय बिताया है और चीजें सामान्य स्थिति में लौट रही हैं.
चीन को लेकर उन्होंने कहा कि चीन कई वर्षों से भारत के लिए एक रणनीतिक चुनौती रही है. वे भारतीय नौसेना को अपंग करने की कोशिश करते हैं. हिंद महासागर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'हिंद महासागर विश्व की तीसरे सबसे बड़ी वाटर बॉडी है. विश्व की 30 फीसदी इकोनॉमी यहां स्थित है. 80 फीसदी एनर्जी ट्रेड इस क्षेत्र से होता है. 38 देश इससे जुड़े हैं..ना ही चीन और ना ही अमेरिका इंडियन ओसन पावर हैं. वो क्षेत्र से बाहर हैं, इसका मतलब ये नहीं है कि उनका इसमें कोई स्टेक नहीं है... दोनों ताकतों को क्षेत्रीय संतुलन को नहीं बिगाड़ना चाहिए. चीन के मैरीटाइम सिल्क रोड जैसेी योजनाओं से कई देशों का क्या हुआ सब जानते हैं. उनके कर्ज देने की डिप्लोमैसी कई देश प्रभावित हुए हैं.'
भारत की रणनीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,'हमारा स्लोगन है कि हिंद महासागर से आने वाले देशों को ही हिंद महासागर का लीडर बनना चाहिए. 240 मिलियन इंडोनेशिया, 200 मिलियन लोग पाकिस्तान, 160 मिलियन लोग बांग्लादेश और हम तो विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश हैं ही. लेकिन हम इस रीजन पर उतना प्रभाव नहीं डाल पाए हैं. जब आप इंडो पैसेफिक की बात करते हैं तो आपके दिमाग में क्या आता है, ताइवान, हिंद महासागर.. लेकिन और भी मुद्दे हैं..'
केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, 'आजादी के बाद पड़ोसी मुल्कों के साथ जमीनी मुद्दों की वजह से इस क्षेत्र में ध्यान कम दिया गया. पिछले 8 -9 साल के दौरान पीएम मोदी की सरकार ने इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया है और भारतीय नौसना की ताकत में लगातार इजाफा हो रहा है. हमारी ताकत अब समुद्र में बढ़ रही है, पोतों की संख्या अब दोगुनी हो गई है. हमारी ब्लू वाटर नेवी की ताकत बढ़ रही है. आज 18 देशों के साथ हम नौसेना अभ्यास कर रहे हैं. अब हम लगातार अपनी उपस्थिति हिंद महासागर में बढ़ा रहे हैं. यहां बहुत बड़ी संख्या में व्यापार हो रहा है. आज हम ग्लोबल साउथ की बात करते हैं, ग्लोबल साउथ क्या है? ये ही हिंद महासागर है. हिंद महासागर समूह और प्रशांत महासागर को मिलाकर हम 58 देश हैं, जो सबसे बड़ा ग्रुप है.'
राम माधव ने कहा कि आजादी मिलने के बावजूद भी हमारा माइंडसेट नहीं बदला जो एंटी कोलोनियल होना चाहिए था, वो कोलोनियल है... इस रीजन के महत्व को हम जानते हैं. उन्होंने कहा, 'हम अभी बांग्लादेश, म्यामार में पोर्ट बना रहे हैं, मालदीव में हमारा अच्छा बेस है, मारीशस में बातचीत चल रही है. हम पोर्ट बिल्डिंग के लिए इस क्षेत्र में अपने पांव पसार रहे हैं. चीन हमसे कहीं आगे हैं उसने 20 साल पहले ये शुरू कर दिया था. जब हमने चाबहार बनाया तो वो ग्वादर शुरू कर चुका था. दोनों में कंपटीशन है. हमने कई देशों के साथ समुद्री कनेक्टिविटी बनाई है. 2014 में मोदी सरकार आने के बाद पिछले साल पहला मुक्त व्यापार समझौता हुआ है. इसमें भी सात साल लगे. आज हमारे जीसीसी देशों (खाड़ी सहयोग परिषद) के साथ शानदार संबंध हैं जो इंडियन ओसन का हिस्सा हैं.'
उन्होंने कहा, 'हमारे सामने कई चुनौतियां हैं, जिसके लिए पैसा भी जरूरी है. जैसे बांग्लादेश को हमने कुछ दिया लेकिन उसके बाद चीन ने हमसे तीन गुना ज्यादा का ऑफर उसे दे दिया. चीन हमेशा से ही भारत के लिए चुनौती रहा है. उसने हमारे चारों ओर पोर्ट का निर्माण किया. उनके पास बड़ा पैसा है, कर्ज डिप्लोमेसी के जरिए वो ऐसा कर रहे हैं. चीन भारत के पड़ोसी देशों में लगातार बड़े बुनियादी निर्माण कर रहा है.'