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राम मंदिर को BJP ने बताया अगले 1000 साल के राम राज्य का प्रतीक, पारित किया प्रस्ताव

'राम मंदिर भारत में अगले एक हजार साल के लिए "राम राज्य" की स्थापना का प्रतीक है. राम मंदिर भारत की दृष्टि, दर्शन और पथ का प्रतीक है. श्रीराम मंदिर वास्तव में राष्ट्रीय चेतना का मंदिर बन गया है." यह बातें बीजेपी ने राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने एक प्रस्ताव में कही aa

राम मंदिर राम मंदिर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 18 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 9:04 PM IST

अयोध्या के राम मंदिर को बीजेपी ने भारत में अगले एक हजार साल के लिए "राम राज्य" की स्थापना का प्रतीक माना है. पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में इसको लेकर एक प्रस्ताव पारित किया गया है. प्रस्ताव में कहा गया है कि पिछले महीने जिस मंदिर में भव्य प्रतिष्ठा समारोह हुआ है वह "राष्ट्रीय चेतना" का मंदिर बन गया है और "विकसित भारत" के निर्माण में तमाम संकल्पों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा.

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बीजेपी के प्रस्ताव में कहा गया है, "प्राचीन पवित्र शहर अयोध्या में उनके जन्मस्थान पर भगवान श्रीराम के भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण देश के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली उपलब्धि है. यह अगले 1,000 वर्षों के लिए भारत में 'राम राज्य' की स्थापना का प्रतीक है और एक नए कालचक्र की शुरुआत है."

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'राम मंदिर भारत की दृष्टि, दर्शन और पथ का प्रतीक'

प्रस्ताव में कहा गया है, "भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का यह सम्मेलन भगवान राम के अभिषेक को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) के नेतृत्व को हार्दिक बधाई देता है." राम मंदिर भारत की दृष्टि, दर्शन और पथ का प्रतीक है श्रीराम मंदिर वास्तव में राष्ट्रीय चेतना का मंदिर बन गया है." प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि भारतीय भगवान श्रीराम के दिव्य अभिषेक को देखकर खुश है.

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'भारतीय सभ्यता और संस्कृति के हर पहलू राम-सीता'

22 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में एक प्रतिष्ठा समारोह में मंदिर में भगवान राम की नई मूर्ति स्थापित की गई. लाखों लोगों ने अपने घरों और पड़ोस के मंदिरों में टेलीविजन पर "प्राण प्रतिष्ठा" समारोह देखा और इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का हिस्सा बने. प्रस्ताव में कहा गया कि भगवान राम, सीता और रामायण भारतीय सभ्यता और संस्कृति के हर पहलू में मौजूद हैं.

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'महात्मा गांधी के दिल में भी थी राम राज्य की कल्पना'

"भारत के संविधान की मूल प्रति में भी मौलिक अधिकारों की धारा पर विजय के बाद अयोध्या लौटने पर भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की तस्वीर इस बात का प्रमाण है कि भगवान श्रीराम मौलिक अधिकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं." प्रस्ताव में कहा गया, ''राम राज्य की कल्पना बापू महात्मा गांधी के दिल में भी थी."

प्रस्ताव के मुताबिक, "वह (महात्मा गांधी) कहा करते थे कि 'राम राज्य' का विचार ही सच्चे लोकतंत्र का विचार है. भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलते हुए प्रधानमंत्री ने देश में सुशासन स्थापित कर 'राम राज्य' की भावना को सही अर्थों में क्रियान्वित किया है." प्रस्ताव में कहा गया है कि भगवान राम ने अपने शब्दों और विचारों में जो मूल्य स्थापित किए, वे 'सबका साथ, सबका विकास' की प्रेरणा हैं और 'सबका विश्वास, सबका प्रयास' का आधार हैं.

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