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सीवर की सफाई के दौरान 4 साल में 377 लोगों की मौत, लेकिन हाथ से मैला ढोने की रिपोर्ट नहीं: रामदास अठावले

मंत्री रामदास अठावले ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा, '2019 से 2023 तक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई के कारण कुल 377 लोगों की मौत हुई है.'

रामदास आठवले. (फाइल फोटो). रामदास आठवले. (फाइल फोटो).
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 31 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 8:20 PM IST

राज्यसभा में बुधवार को बताया गया कि सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 2019 से 2023 के बीच कुल 377 लोगों की जान गई. लेकिन देश में हाथ से मैला ढोने की कोई रिपोर्ट नहीं है.सदन में एक सवाल का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोजगार पर प्रतिबंध और उनके पुनर्वास अधिनियम 2013 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उठाए गए कदमों को सूचीबद्ध किया.

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मैला ढोने के काम में लगे लोगों की संख्या पर एक अन्य सवाल के जवाब में अठावले ने कहा, 'देश में फिलहाल मैला ढोने की प्रथा की कोई रिपोर्ट नहीं है.'

4 साल में 377 लोगों की मौत

मंत्री रामदास अठावले ने एक लिखित जवाब में कहा, '2019 से 2023 तक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई के कारण कुल 377 लोगों की मौत हुई है.'

बता दें कि सीवेज की सफाई के दौरान मजदूरों की मौत की घटनाएं सामने आती रही है. सरकारें दावा करती हैं कि सीवर की सफाई के लिए अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन फिर इस तरह की घटनाएं सामने आती है. कुछ साल पहले ही ग्रेटर नोएडा में सीवर सफाई के लिए रोबोट तकनीक का इस्तेमाल किए जाने का प्रस्ताव सामने आया था. कहा गया था कि ग्रेटर नोएडा में अब मजदूरों और सफाईकर्मियों को सीवर के दलदल में नहीं उतरना पड़ेगा. इससे पहले गुरुग्राम में भी सीवर साफ करने वाला रोबोट आ चुका है. 

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कहा गया था कि इस रोबोट के जरिए जमीन से 8 मीटर नीचे मैनहोल, स्लज और ब्लॉकेज की सफाई की जा सकेगी. इस रोबोट में एक स्वचालित कैमरा भी लगा हुआ है, जिससे बाहर बैठकर ही आसानी से मॉनिटरिंग की जा सकेगी. इस रोबोट से एक दिन में 10 मैनहोल की सफाई की जा सकेगी. रोबोट आने के बाद अब किसी भी कर्मचारी को सफाई के लिए मैनहोल में नहीं उतरना पड़ेगा.

60 की उम्र से पहले हो जाती है सफाई कर्मचारियों की मौत

आपको जानकार हैरानी होगी कि गटर-सीवर साफ करने वाले 90 फीसदी कर्मचारी 60 साल की उम्र से पहले ही अपनी जान गंवा देते हैं. देश में गंदगी के बीच रहने और गंदगी साफ करने वाले 8 सफाई कर्मचारियों की मौत हर घंटे होती है. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि 'यह किस तरह का सरकारी तंत्र है. सरकारी तंत्र में जो लोग बैठे हैं, उनमें क्या संवेदनशीलता नहीं हैं. जो गरीब होने के कारण मजबूरी में विकट परिस्थितियों में ऐसे कठिन काम करते हैं. और उनकी जब मौत हो जाती है तो सरकार उन्हें कोई मुआवजा तक नहीं देती.'

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