
Reasons For Flood In India: महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार और हिमाचल में बारिश आफत की शक्ल में बरस रही है. इन 5 राज्यों में बाढ़ से 8 लाख हेक्टेयर से ज्यादा इलाके में खरीफ की फसल तबाह हो गई हैं. फसलें तबाह हो गईं हैं और पुल-पुलिया बह गए हैं. वहीं सैकड़ों लोगों की मौत भी हो चुकी है. ऐसे में एक सवाल जो हमेशा सामने आता है कि भारत में इतनी भयंकर बाढ़ क्यों आती है? आइए जानते हैं इसका कारण...
भारत तीन ओर से समुद्र, अरब सागर, हिन्द महासागर और बंगाल की खाड़ी से घिरा है. भारत के ज्योलॉजिक सर्वे ऑफ इंडिया का कहना है कि भारत के तीनों ओर से समुद्र से घिरे होने के कारण बाढ़ की विभीषिका को लेकर भारत ज्यादा संवेदनशील है. इसिलिए समूचे देश में ऐसे कई इलाके हैं, जो कि हर साल बाढ़ का सामना करते हैं.
दरअसल, समुद्र में बनने वाले मौसमी सिस्टम की वजह से पूरे भारत में बारिश होती है. इस दौरान समुद्री क्षेत्र में कई दवाब क्षेत्र भी बनते हैं जिसके कारण सामान्य बारिश भी भारी बारिश में बदल जाती है. वहीं, कई बार एक ही दिन में औसतन बारिश के मुकाबले कई गुणा ज्यादा बारिश हो जाती है, जिसकी वजह से नदी-नालों में जलस्तर बढ़ जाता है और उनका पानी ओवर फ्लो होने से बाढ़ आ जाती है.
वर्तमान में देश में बाढ़ का सामना करने वाले कुल इलाकों की संख्या 12.5 प्रतिशत है. बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, केरल, असम, बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बाढ़ का असर ज्यादा होता है. वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में बाढ़ से होने वाली कुल मौतों में से 20 फीसदी अकेले भारत में होती हैं.
Factors responsible for flood: बाढ़ के प्रमुख कारण
मौसम संबंधी तत्त्व
मॉनसून के सीजन में तीन से चार महीने तक देश में भारी बारिश होती है. इसके कारण नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है, जो बाढ़ का कारण बनता है. एक दिन में 15 सेंटीमीटर या उससे अधिक बारिश होने पर नदियों में पानी तेजी से बढ़ता है और ये बाढ़ का रूप ले लेता है.
बादल का फटना
पहाड़ी इलाकों में जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में इस वर्ष भी बादल के फटने से भारी नुकसान हुआ है. साथ ही कई लोगों की जान भी गई है. दरअसल, पहाड़ी इलाकों में बादल के फटने और भारी बारिश से पहाड़ी नदियों के जलस्तर बढ़ जाता है और वो उफान पर आ जाती हैं, जिसके बाद उनका पानी नदी के तट को पार कर जाता है और तेजी से नीचे की ओर बहता है. इस दौरान रास्ते में आने वाले घर तबाह हो जाते हैं.
गाद
पहाड़ी इलाकों में बहने वाली नदियां अपने साथ गाद, रेत और मलबा लेकर आती हैं. इसके बाद लंबे समय तक इनकी सफाई न होने के कारण नदियों का रास्ता रुक जाता है और पानी का स्तर बढ़ने पर ये आस-पास के इलाकों में फैल जाता है जो बाढ़ का रूप ले लेता है.
तटबंध और जंगल की कटाई
शहरों के विकास, सड़क और रेल मार्ग, लोगों को पानी की आपूर्ति और बिजली बनाने समेत कई कारणों ने नदियों पर बांध बनाए जाते हैं. इसके कारण नदियों की प्रवाह गति कम हो जाती है, जो कि बाढ़ का बड़ा कारण बनती है. इसके अलावा पेड़ों की कटाई भी बारिश के पानी के लिए रुकावट पैदा करती है, जिसकी वजह से बाढ़ के हालात उत्पन्न होते हैं.
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट कहती है कि भारत में पिछले 64 सालों में 1,07,487 लोगों की मौत बाढ़ या उससे हुए हादसों में हुई है. यही नहीं साल 1953 से 2017 के बीच बाढ़ से देश को 3.65 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जो जीडीपी का 3 फीसदी बताया जाता है.