
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को मदुरै में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के जजों से अनुरोध किया कि वे भाषा को बाधा ना बनने दें. सीजेआई ने कहा कि मैं युवा स्नातकों की समस्या को समझता हूं. भाषा की बाधा और इससे होने वाले प्रभाव के बारे में परिचित हूं. उन्होंने आगे कहा- इसके लिए संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी. CJI ने कहा कि अंग्रेजी हमारी पहली भाषा नहीं है. हम अपनी मातृभाषा में सोचते हैं और अपने विचारों को रखते हैं. हालांकि, मैं उन सभी युवा वकीलों से अनुरोध करता हूं, जिन्हें अंग्रेजी में संवाद करने में कुछ कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, वे निराश ना हों. मैं MHC (मद्रास हाई कोर्ट) के जजों से अनुरोध करता हूं कि वे युवा जूनियर्स को प्रोत्साहित करते रहें और भाषा को बाधा ना बनने दें.
शनिवार को मदुरै में एक कार्यक्रम में आए सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के सामने यहां तमिल को कोर्ट की आधिकारिक भाषा बनाने की मांग की गई थी. उसके बाद उन्होंने जजों से अपील की. सीजेआई का कहना था कि इस संबंध में संविधान के अनुच्छेद 348 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए एक संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी. CJI ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट देश का प्रतिनिधित्व करता है. हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं कि देश के विभिन्न हाई कोर्ट्स और विभिन्न क्षेत्रों को सुप्रीम कोर्ट में प्रतिनिधित्व मिले. मैं तीन मुद्दों पर प्रकाश डालना चाहूंगा. सबसे पहले, जूनियर वकीलों के शुरुआती स्तर के वेतन को बढ़ाने की आवश्यकता है. दूसरा, कार्य संस्कृति से संबंधित रूढ़ियों को तोड़ना महत्वपूर्ण है. तीसरा, बार और बेंच के बीच मजबूत संबंध होना जरूरी है, हम दोनों न्याय प्रणाली के हितधारक हैं और कामकाज और समन्वय में विश्वास की भावना होनी चाहिए.
कानूनी पेशे में महिलाओं की सहभागिता भी जरूरी है
CJI चंद्रचूड़ ने कानूनी पेशे में महिलाओं और पुरुषों के अनुपात को 'निराशाजनक' बताया और महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा- देश में प्रतिभाशाली महिला वकीलों की कोई कमी नहीं है. सीजेआई यहां जिला अदालत परिसर में अतिरिक्त न्यायालय भवनों के शिलान्यास समारोह और जिला एवं सत्र न्यायालय और मयिलादुत्रयी में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.
जजों की नियुक्ति में सामाजिक सुरक्षा देने की मांग
इस कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन समेत अन्य लोगों ने हिस्सा लिया. रिजिजू ने सरकार और न्यायपालिका के बीच कथित असहमति की चर्चाओं पर कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे बीच कोई टकराव था. स्टालिन ने सीजेआई से हाई कोर्ट्स और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति में सामाजिक न्याय सुनिश्चित देने का अनुरोध किया.
'प्रतिभाशाली महिला वकीलों की कमी नहीं है'
इस दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि भर्ती कक्ष महिलाओं को रोजगार देने के बारे में 'संशय' जता रहे थे. उनका मानना था कि उनकी 'पारिवारिक' जिम्मेदारियां उनके पेशे के रास्ते में आएंगी. कानूनी पेशे में महिला-पुरुष अनुपात का हवाला देते हुए उन्होंने कहा- आंकड़े हमें बताते हैं कि तमिलनाडु में 50,000 पुरुषों ने नामांकन कराया है. जबकि सिर्फ 5,000 महिलाओं का नामांकन हैं. उन्होंने कहा- युवा महिला अधिवक्ताओं की भर्ती के बारे में चैंबर्स को संदेह है. हालांकि, प्रतिभाशाली युवा महिलाओं की कोई कमी नहीं है.