
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज झा ने राज्यसभा में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष (लालू यादव) AIIMS में इलाजरत हैं. कल उनका एक वीडियो कट करके सोशल मीडिया पर खूब चलाया गया. उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं कि आज दोनों ही पक्ष तैयारियों के साथ आए हैं. हम गर्दनों के साथ हैं वो आरियों के साथ.
उन्होंने कहा कि आज देश का माहौल कैसा है इस पर एक नजर डाली जाए. गाहे-बगाहे आर्थिक बायकॉट की बात होती है, मस्जिद के नीचे कुछ ढूंढी जाती है. प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट पर सवाल उठता है, ऐसे माहौल में आपके वक्फ बिल का कॉन्टेंट और इंटेंट... दोनों सवालिया निशान खड़े करता है. आप भी चुनकर आए हैं, हम भी चुनकर आए हैं. लेकिन बहुमत बुद्धिमत्ता की गारंटी नहीं होता है. खानपान, वस्त्र, आभूषण, भाषा, इबादत पर इतनी तकरार एक समुदाय को नजर आ रही है.
मनोज झा ने कहा कि वर्तमान में लोगों को हाशिए पर छोड़ने की आदत बनती जा रही है. हम लगातार समुदायों को हाशिए पर छोड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने एक कहानी लिखी थी 'ईदगाह'. उस कहानी में बताया गया है कि हामिद ने अपनी दादी अमीना के लिए चिमटा खरीदा था, क्या कोई बता सकता है कि दुकानदार हरेंद्र था या सोहाबुद्दानी था? लेकिन आज चल रहा है कि हरेंद्र चिमटा खरीदेगा तो वो हरफू के पास ही जाएगा. कुछ चीजें एक दूसरे से एक बावस्ता (कनेक्ट) होती हैं जिन्हें अलग-अलग देखने को जी नहीं चाहता. उन्होंने कहा कि इस देश के हिंदुओं को मुसलमानों की आदत है, और मुसलमानों को हिंदुओं की आदत है. ये आदतें मत बदलवाइए.
आरजेडी सांसद ने कहा कि हम राजतंत्र में नहीं, बल्कि लोकतंत्र में हैं. डेमोक्रेसी में एक-एक पाई पर हर नागरिक का हक है, इसमें वो नागरिक भी शामिल है, जो हाशिए पर है. उन्होंने कहा कि मैं कल गृहमंत्री अमित शाह को सुन रहा था, वह वक्फ का ऑरिजिन बता रहे थे. वक्फ अऱेबिक का शब्द है. उन्होंने कहा कि हम किसी भी धर्म के मानने वाले हों, राष्ट्र की अवधारणा से पहले नदियां ऐसे नहीं बंटी थी. संस्थाएं ऐसे नहीं बंटी थीं, समय के साथ ये बनते गए, उनमें सुधार भी हुए. बीजेपी इनमें पहली बार सुधार नहीं कर रही है. आगे भी सुधार होते रहेंगे. दिक्कत तब होती है जब कॉन्टेंट और इंटेंट मैच करता है तो डर लगता है.