
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को हावड़ा में एक कार्यक्रम में कहा कि हमने विश्व को एक धर्म दिया है. हम हिंदू समाज बनाएंगे. हम इसके बारे में बोलेंगे और लिखेंगे. उन्होंने कहा कि यदि ईश्वर की इच्छा है कि सनातन धर्म का उत्थान हो जिससे भारत का उत्थान हो तो हम इसके लिए आगे बढ़ेंगे. हम किसी विचारधारा की नहीं बल्कि सच्चाई की बात कर रहे हैं. सच तो यह है कि सब अपने हैं और सबको रास्ता हमें ही दिखाना है.
मोहन भागवत ने कहा, गांधी, बोस, अंबेडकर, टैगोर ने हमें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया. आजादी के बाद हम उस रास्ते पर नहीं चले. हम दूसरी दिशा में चले गए, अब हम धीरे-धीरे उस दिशा में जा रहे हैं. हेडगेवार ने कांग्रेस को 2 अंक दिए थे, उन्होंने नहीं माने.
एक थी गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और दूसरा थी पूर्ण स्वतंत्रता. वह चाहते थे कि भारत दुनिया को एक ऐसी लॉबी से छुटकारा दिलाए जो पूंजीवादी और साम्यवादी दोनों को चलाती थी और अपनी शर्तें तय करती थी.
संघ से जुड़ी बंगाली पत्रिका ‘स्वास्तिक’ के 75वें वर्षगांठ समारोह में भागवत ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद भारत ने अपने स्वतंत्रता सेनानियों और महान विचारकों के सिद्धांतों का पूरी तरह से पालन नहीं किया.
राष्ट्र द्वारा “अमृत काल” मनाए जाने पर उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के प्रति कर्त्तव्य (कर्तव्यों) को प्राथमिकता देने के लिए “कर्तव्य काल” पर जोर दिया जाना चाहिए. संघ प्रमुख ने कहा कि इस देश के युवाओं और बुद्धिजीवियों का एक वर्ग “पश्चिम” से गलत तरीके से प्रभावित हुआ है. उन्होंने कहा, “जो लोग गलत काम होते हुए भी चुप रहते हैं, वे ऐसा करने वालों की तुलना में समाज को अधिक नुकसान पहुंचाते हैं. जहां कोई गलत काम हो, झूठ हो, हमें बोलना चाहिए.”
मोहन भागवत ने कहा, भारत की अध्यक्षता में जी20 शिखर सम्मेलन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि दुनिया नेतृत्व और मार्गदर्शन के लिए तेजी से देश की ओर रुख कर रही है.