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यूक्रेन-रूस विवाद की जड़ में सोवियत के बाद की राजनीति, NATO का विस्तार भी वजह: एस जयशंकर

India on Russia Ukraine crisis: विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar Ukraine) ने कहा है कि भारत ने भी फ्रांस और अन्य देशों की तरह यूक्रेन से रूस के विवाद का कूटनीतिक समाधान निकाले जाने की मांग की है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर (फाइल फोटोः पीटीआई) विदेश मंत्री एस जयशंकर (फाइल फोटोः पीटीआई)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 23 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 9:17 AM IST
  • विदेश मंत्री ने यूरोप से रूस के बदलते रिश्तों को भी बताया वजह
  • एस जयशंकर ने फ्रांस को बताया भारत का विश्वसनीय भागीदार

रूस और यूक्रेन के बीच बने युद्ध जैसे हालात को लेकर पूरी दुनिया में हलचल है. फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका खुलकर रूस के खिलाफ यूक्रेन के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं वहीं कई देश तटस्थ हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी बैठक में भारत ने तटस्थ रवैया अपनाया था और ये कहा था कि विवाद का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत के जरिये निकाला जाना चाहिए. अब इसे लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फ्रांस में बयान दिया है.

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि यूक्रेन और रूस के बीच जारी गतिरोध की जड़ें सोवियत के बाद की सियासत में हैं. उन्होंने कहा कि यूक्रेन के मौजूदा हालात की जड़ें नाटो (NATO) के विस्तार और यूरोपीय देशों के साथ रूस के बदलते संबंधों में भी हैं. ये पिछले 30 साल में बनीं जटिल परिस्थितियों का परिणाम है. फ्रांस के समाचार पत्र ले फिगारो के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस की तरह सक्रिय देश इस मसले के कूटनीतिक समाधान की मांग कर रहे हैं.

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय कई तरह के संकट से जूझ रही है. ऐसे में इस तरह के हालात अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों को और बढ़ा रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा है कि भारत इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों के साथ रूस से बात कर सकता है. हम फ्रांस जैसी पहल का भी समर्थन करेंगे. एस जयशंकर ने ये बातें एक सवाल के जवाब में कहीं जिसमें रूस की ओर से यूक्रेन की सीमा पर सैनिक तैनात किए जाने की भारत की ओर से निंदा न किए जाने को लेकर पूछा गया था.

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फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस में भारतीय विदेश मंत्री ने फ्रांस के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि भारत समुद्र से लेकर अंतरिक्ष तक सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करने में फ्रांस को विश्वसनीय भागीदार के रूप में देखता है. उन्होंने कहा, "विश्वास के साथ कह सकता हूं कि 75 साल पहले एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में हमारी यात्रा शुरू होने के बाद से यह (भारत-फ्रांस संबंध) अब तक का सबसे मजबूत संबंध है." विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग शुरू कराने के लिए 2008 में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से छूट प्राप्त करने में भी फ्रांस ने भारत का सहयोग किया.

ताइवान को लेकर और यूक्रेन के हालात अलग

एस जयशंकर ने ताइवान और यूक्रेन की तुलना से संबंधित एक सवाल के जवाब में कहा कि दोनों के हालात अलग हैं, उत्पत्ति की पृष्ठभूमि अलग है. उन्होंने चीन से संबंध को लेकर कहा कि पूर्वी लद्दाख की सीमा पर 13 दौर की सैन्य वार्ता के बाद कई जगह समाधान निकला. कुछ जगह अब भी टकराव है जिसका समाधान किया जाना है. विदेश मंत्री ने साफ किया कि हम वास्तविक नियंत्रण रेखा में एकतरफा बदलाव के किसी भी प्रयास रो स्वीकार नहीं करेंगे.

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