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'हुआ तो हुआ', 'पुलवामा जैसे हमले होते रहे हैं', Inheritance Tax से पहले पित्रोदा के इन बयानों पर भी हुआ बवाल

सैम पित्रोदा ने 2019 में पिछले लोकसभा चुनाव में 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर एक बयान दिया था. बीजेपी के इन आरोपों पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के इशारे पर सिख दंगे हुए थे. पित्रोदा ने इसे झूठ बताते हुए कहा था कि अब क्या है, 84 का? आपने क्या किया 5 साल में, उसकी बात करिए. 1984 में हुआ तो हुआ. 

सैम पित्रोदा सैम पित्रोदा
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 24 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 3:16 PM IST

इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा का विरासत टैक्स को लेकर दिया गया उनका बयान चर्चा में है. अमेरिका में विरासत टैक्स की पैरवी करने के उनके बयान से बीजेपी एक बार फिर कांग्रेस पर हमलावर हो गई है.

लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब पित्रोदा के किसी बयान पर बवाल मचा है. वह समय-समय पर ऐसे बयान देते रहे हैं, जो विवादित रहे हैं.

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'1984 दंगा हुआ तो हुआ'

सैम पित्रोदा ने 2019 में पिछले लोकसभा चुनाव में 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर एक बयान दिया था. बीजेपी के इन आरोपों पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के इशारे पर सिख दंगे हुए थे. पित्रोदा ने इसे झूठ बताते हुए कहा था कि अब क्या है, 84 का? आपने क्या किया 5 साल में, उसकी बात करिए. 1984 में हुआ तो हुआ. 

2019 लोकसभा चुनाव के दौरान उनके हुआ तो हुआ बयान पर खूब हंगामा मचा था. पीएम मोदी ने फरवरी 2024 में संसद के भीतर कहा था कि कांग्रेस पार्टी के एक मार्गदर्शक अमेरिका में बैठे हैं, जो अपने हुआ तो हुआ बयान से लोकप्रिय हुए हैं. कांग्रेस परिवार उनके बेहद नजदीक है. 

'मिडिल क्लास स्वार्थी नहीं बने'

सैम पित्रोदा ने ऐसा ही एक और विवादित बयान अप्रैल 2019 में भी दिया था. उन्होंने टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा था कि देश के मिडिल क्लास को स्वार्थी नहीं बनना चाहिए और उन्हें पार्टी की प्रस्तावित न्याय योजना को फंड करने के लिए अधिक से अधिक टैक्स देने के लिए तैयार रहना चाहिए.

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पित्रोदा ने कहा था कि मिडिल क्लास को अधिक अवसर और रोजगार मिलेंगे. अगर न्याय योजना को अमल में लाया जाता है तो इससे मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है. ऐसे में मिडिल क्लास को स्वार्थी नहीं बनना चाहिए. उनके इस बयान से बहुत विवाद खड़ा हुआ था और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को डैमेज कंट्रोल में जुटना पड़ना था. 

'पुलवामा जैसे हमले होते रहते हैं'

पुलवामा हमले के जवाब में फरवरी 2019 में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी. लेकिन पित्रोदा ने इस एयरस्ट्राइक पर भारत सरकार के दावों पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि पुलवामा जैसे हमले होते रहते हैं. मैं इन हमलों के बारे में ज्यादा नहीं जानता. ये हर समय होते रहते हैं. मुंबई में भी हमला हुआ था. हमने इस पर प्रतिक्रिया दे सकते थे और हमारे प्लेन भेज सकते थे लेकिन ये सही तरीका नहीं है. मेरे अनुसार आप वैश्विक समस्याओं से ऐसे डील नहीं कर सकते. साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि कुछ मुट्ठीभर लोगों के हमले की वजह से पाकिस्तान के सभी नागरिकों को जिम्मेदार ठहराना गलत है. उन्होंने भारत सरकार से बालाकोट एयस्ट्राइक ऑपरेशन के सबूत भी मांगे थे.

'मंदिरों से रोजगार नहीं मिलता'

जून 2023 में सैम पित्रोदा के एक और बयान से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था. उन्होंने कहा था कि मंदिरों से बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी भारत की समस्याओं का हल नहीं होगा. हमारे देश में बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा जैसी समस्याएं हैं. इनके बारे में कोई बात नहीं करता. लेकि नहर कोई राम, हनुमान और मंदिर की बात करते हैं. मैंने पहले भी कहा है कि मंदिरों के निर्माण से आपको रोजगार नहीं मिलेगा. पित्रोदा ने ये बयान अमेरिका में राहुल गांधी की मौजूदगी में दिया था. 

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क्या है सैम पित्रोदा का ताजा बयान?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने बीते दिनों एक बयान में कहा था कि अगर चुनाव बाद उनकी सरकार सत्ता में आई तो एक सर्वे कराया जाएगा और पता लगाया जाएगा कि किसके पास कितनी संपत्ति है. उनके इस बयान के बारे में जब सैम पित्रोदा से पूछा गया तो उन्होंने अमेरिका में लगने वाले विरासत टैक्स का जिक्र किया.

पित्रोदा ने कहा कि अमेरिका में विरासत टैक्स लगता है. अगर किसी शख्स के पास 10 करोड़ डॉलर की संपत्ति है. उसके मरने के बाद 45 फीसदी संपत्ति उसके बच्चों को ट्रांसफर हो जाती है जबकि 55 फीसदी संपत्ति पर सरकार का मालिकाना हक हो जाता है.

उन्होंने कहा कि ये बहुत ही रोचक कानून है. इसके तहत प्रावधान है कि आपने अपने जीवन में खूब संपत्ति बनाई है और आपके जाने के बाद आपको अपनी संपत्ति जनता के लिए छोड़नी चाहिए. पूरी संपत्ति नहीं बल्कि आधी, जो मुझे सही लगता है. लेकिन भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है. यहां अगर किसी के पास 10 अरब रुपये की संपत्ति है. उसके मरने के बाद उनके बच्चों को सारी की सारी संपत्ति मिल जाती है, जनता के लिए कुछ नहीं बचता. मुझे लगता है कि इस तरह के मुद्दों पर लोगों को चर्चा करनी चाहिए. मुझे नहीं पता कि इस चर्चा का निचोड़ क्या निकलेगा. हम नई नीतियों और नए प्रोग्राम की बात कर रहे हैं, जो लोगों के हित में हो ना कि सिर्फ अमीरों के हित में हो.

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