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सेम सेक्स मैरेज यानी समलैंगिक विवाह को मान्यता दिया जाना चाहिए या नहीं? इस पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने आज अपना फैसला सुना दिया.चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, एस रवींद्र भट, पीएस नरसिम्हा और हिमा कोहली की कन्स्टीच्यूशनल बेंच ने सुनवाई पूरी होने के बाद 11 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था.आज 160 दिनों के बाद फैसला आया तो जजों की राय बंटी हुई थी. फैसले का लब्बोलुबाब ये रहा कि सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक शादी को मान्यता देने से इनकार कर दिया. कहा, ये संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है. हालांकि कोर्ट ने फैसले में समलैंगिक जोड़ों को कई अधिकार देने की बात को है. क्या हैं वे और फैसले की बड़ी या फिर यूं कहें कि छोटी ही मगर अहम बातें बेहद सीधी-सादी ज़बान में सुनिए 'दिन भर' में.
इज़रायली बमबारी में ताश के पत्तो की तरह बिखरते, मिट्टी के घरों की तरह भरभराकर जमींदोज़ होते सीमेंट की आलीशान इमारतें और फ़िर एम्बुलेंस की सायरन का शोर. गाज़ा में रह रहे लोगों के लिए अब ये आम सी बात है. अहमद शाहीन जो गाज़ा में डॉक्टर हैं. एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसी से बातचीत करते हुए कहते हैं कि "यहां जमींदोज़ हो चुकी इमारतों में लोग फंसे हुए हैं. वो चीख रहे हैं, दर्द से कराह रहे हैं लेकिन हम उनकी मदद नहीं कर पा रहे. अस्पताल मृतकों और घायलों से भरे पड़े हैं. रेफ्रिजरेटर में जगह नहीं बची जहां हम लाशों को सम्मान के साथ रख सकें. न तो यहां बिजली है, न पानी. ईंधन भी ख़त्म होने की कगार पर है और बमबारी अब भी लगातार जारी है, जो यहां का भयावह मंजर है, उसे बयां कर पाना संभव नहीं." दरअसल, पिछले शनिवार को हुए हमास के हमले के बाद ही से इज़रायली सेना गाज़ा पर कहर बरसा रही. गाज़ा के 2800 से अधिक लोगों की जान अब तक जा चुकी है जिसमें एक तिहाई से अधिक बच्चे थे. इज़रायली मूल के 1400 लोग भी मरे. और अब उनकी चिंता है वो 250 लोग जो अब भी गाज़ा में हमास के अल कसाम ब्रिगेड के कब्ज़े में हैं. हमास का कहना है कि जैसे ही परिस्थिति इजाज़त देगी, हम बंधकों को छोड़ देंगे. गाज़ा एक पतली पट्टी नुमा इलाका है. 25 मील लंबा,7 मील चौड़ा. अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन डीसी के साइज़ की तुलना में दोगुना. लेकिन इस बेहद कम भूभाग वाले इलाके में 20 लाख से अधिक लोग रहते हैं. यहां के 80 प्रतिशत से अधिक लोग गरीबी में न सिर्फ़ जी रहे. बाकी के लोग भी संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मदद ही के भरोसे हैं. बेहद घनी आबादी वाले इस इलाके में इज़रायली हमले की वजह से स्थिति किस तरह बिगड़ी है, लोग किस तरह दाने-ढाने को मोहताज़ हैं, सुनिए 'दिन भर' में.
भारत में चुनाव अगर पर्व है तो घोषणापत्र इस त्योहार की सबसे ज़रूरी रस्म. और अपने हिस्से की ये रस्मअदायगी आज मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने की. अघोषित तौर पर मुख्यमंत्री का चेहरा और प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष कमलनाथ, साथी दिग्विजय सिंह और पार्टी के दूसरे लीडरान के साथ मीडिया के सामने आएं. कांग्रेस ने राज्य के लोगों के लिए 25 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फ़ीसदी आरक्षण और राज्य की एक आईपीएल टीम के गठन का वायदा किया है. 106 पन्नों के इस घोषणापत्र में कांग्रेस ने कुल 59 वादे किए हैं. किसानों के लिए दो लाख रुपये तक के कृषि लोन की माफी, महिलाओं के लिए हर महीने 1500 रुपये की मदद तो सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाली समेत समाज के लगभग सभी तबकों के लिए कुछ न कुछ है. 230 विधानसभा सीट वाले मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को वोटिंग है. सवाल है कि ठीक एक महीने पहले कांग्रेस पार्टी ने जो वायदों की झड़ी लगा दी है. वह उनके पिछले मैनिफेस्टो के ऐलानों से कितनी अलग है, माहौल बनाने वाली चीज़ों और ठोस चीज़ों को कितना-कितना वेटेज दिया गया है, सुनिए 'दिन भर' में.
और अब बात उनकी जिनकी बनी बनाई नौकरी एक झटके में छीन ली गई. उत्तरप्रदेश में करीब 6 हज़ार होमगार्ड्स को बिना बताए नौकरी से निकाले जाने की खबरें हैं.
इन होमगार्ड्स की औसत तनख्वाह 12, 000 रुपए प्रति महीने थी. बहुत से होमेगार्ड्स 30 की उम्र के नौजवान हैं और कुछ 40-45 के भी ऊपर के हैं. जिनकी नौकरी छिनी है, उन होम गार्ड्स ने अपनी परेशानी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास जाने की भी कोशिश की. होम गार्ड के ये जवान उत्तर प्रदेश होम गार्ड विभाग के लिए काम करते थे. कुछ वक्त पहले भी होम गार्ड्स भी नियुक्ति और निकाले जाने को लेकर यूपी से खबरें आई थी. किस तरह ये मामला यहां तक पहुंचा जो इन होमगार्ड्स को एक झटके में चलता कर दिया गया, सुनिए 'दिन भर' में.