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ना पुलिस ने बुलाया, ना हिरासत में लिया... फिर पुलिस थाने में धरने पर क्यों बैठे सत्यपाल मलिक?

जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के एक थाने में धरने पर बैठ गए. कुछ ही देर में अफवाह फैल गई कि पुलिस ने मलिक को अरेस्ट कर लिया. हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि ना तो मलिक को थाने बुलाया गया. ना ही उनकी गिरफ्तारी हुई है. मलिक के समर्थन में हरियाणा से कुछ किसान नेता दिल्ली में उनके आवास पर पहुंचे थे. वहां बिना इजाजत मीटिंग की जा रही थी.

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के समर्थन में जुटी भीड़. पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के समर्थन में जुटी भीड़.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 5:10 PM IST

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक शनिवार को दिल्ली पुलिस से बहस के बाद राष्ट्रीय राजधानी के एक थाने में धरने पर बैठ गए. पुलिस बिना अनुमति के मीटिंग करने के आरोप में मलिक के समर्थकों को लेकर थाने पहुंची थी. यहां पीछे से मलिक भी पहुंच गए और कुछ ही देर में गिरफ्तारी की अफवाह फैल गई. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने साफ किया कि मलिक की गिरफ्तारी नहीं हुई है. गिरफ्तारी की बात पूरी तरह से भ्रामक है. पुलिस के अनुसार, मलिक से आरके पुरम इलाके के एक सार्वजनिक पार्क में बिना अनुमति के बैठक आयोजित करने के बाद पूछताछ की गई है.

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बताते चलें कि सत्यपाल मलिक को भ्रष्टाचार के एक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से समन मिलने के एक दिन बाद यह घटनाक्रम सामने आया है. पुलिस का कहना है कि मलिक दिल्ली के आरके पुरम के एक पार्क में बिना इजाजत के मीटिंग कर रहे थे, जिसके बाद उनसे पूछताछ की गई. हरियाणा के कुछ किसान नेता सत्यपाल मलिक के समर्थन में राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे थे. यहां उन किसानों के भोजन की व्यवस्था भी की गई थी. दिल्ली पुलिस ने हिरासत से इनकार किया है. वहीं, कुछ नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. पुलिस के एक्शन की खबर मिलते ही मलिक थाने पहुंच गए और धरना देने की घोषणा कर दी. 

दिल्ली पुलिस ने मलिक को हिरासत में नहीं लिया

पुलिस का कहना है कि सत्यपाल मलिक का बेटा और बेटी आरकेपुरम इलाके में रहते हैं. मलिक यहां बड़ी संख्या में लोगों के साथ एक पार्क में मीटिंग कर रहे थे. जब पुलिस ने उनसे पूछा कि सार्वजनिक जगह पर मीटिंग की परमिशन है तो उन्होंने मना कर दिया. इस बीच, दिल्ली पुलिस ने ट्वीट किया और स्पष्ट किया कि सत्यपाल मलिक को हिरासत में नहीं लिया गया है. पुलिस ने कहा कि पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक को हिरासत में लेने के संबंध में सोशल मीडिया हैंडल पर गलत सूचना फैलाई जा रही है, जबकि वह खुद अपने समर्थकों के साथ आरके पुरम थाने पहुंचे थे. उनसे कहा गया है कि वे अपनी मर्जी से वापस जाने के लिए स्वतंत्र हैं. पुलिस ने कहा कि सत्यपाल मलिक अपनी कार से थाने आए थे. पुलिस ने न तो उन्हें बुलाया और ना ही हिरासत में लिया.

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सीबीआई करेगी सत्यपाल मलिक से पूछताछ

बता दें कि सीबीआई ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में कथित बीमा घोटाले के संबंध में मलिक से कुछ सवालों के जवाब मांगे हैं. जम्मू कश्मीर में उनके राज्यपाल रहते हुए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश के मामले में उनसे पूछताछ की जाएगी. सत्यपाल मलिक ने आजतक को बताया था कि सीबीआई ने मुझे पेश होने को कहा है. वे भ्रष्टाचार के इस मामले में कुछ चीजों पर मुझसे स्पष्टीकरण चाहते हैं. उन्होंने मुझसे मौखिक तौर पर 27 और 28 अप्रैल को मेरी सुविधानुसार पेश होने को कहा है. हालांकि, अभी तक सीबीआई ने सत्यपाल मलिक के इस दावे की पुष्टि नहीं की है. सात महीने में यह दूसरी बार है जब विभिन्न राज्यों के राज्यपाल रह चुके मलिक से सीबीआई पूछताछ करेगी. उनसे पिछले साल अक्टूबर में पूछताछ की गई थी. मलिक बिहार, जम्मू और कश्मीर, गोवा और अंत में मेघालय में राज्यपाल रहे. 

पुलवामा हमले को लेकर मलिक ने दिया था बयान

हाल ही में मलिक ने एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले को लेकर कुछ दावे किए थे. उन्होंने कहा था कि सुरक्षा प्रोटोकॉल में खामियां थीं, जिसके कारण फरवरी 2019 का हमला हुआ था, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे. इस बयान के बाद भाजपा ने कहा था कि मलिक की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं. बीजेपी ने हाल के वर्षों में मलिक के द्वारा दिए गए विभिन्न बयानों का हवाला देते हुए यह बात कही थी. मलिक के बयान के एक सप्ताह बाद सीबीआई की तरफ से नोटिस जारी किया गया है.

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मलिक ने ट्वीट कर कहा- घबराऊंगा नहीं...

सीबीआई के तलब किए जाने पर सत्यपाल मलिक ने ट्वीट किया और लिखा- मैंने सच बोलकर कुछ लोगों के पाप उजागर किए हैं. शायद इसलिए मुझे बुलाया गया है. मैं किसान का बेटा हूं, घबराऊंगा नहीं. मैं सच के साथ खड़ा हूं, अंत में उन्होंने हैशटैग #CBI भी लिखा.

क्या है मामला?

सत्यपाल मलिक को साल 2018 में बतौर राज्यपाल जम्मू-कश्मीर भेजा गया था. मलिक के कार्यकाल में ही केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा दिया था. इसके बाद उन्हें बतौर राज्यपाल मेघालय भेज दिया गया था, लेकिन इस बीच उन्होंने दावा किया था कि उन्हें 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 के बीच जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान दो फाइलों को मंजूरी देने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी.

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मलिक ने कहा था- मंजूरी के लिए फाइलें आई थीं

मलिक ने कहा था कि कश्मीर जाने के बाद उनके पास मंजूरी के लिए दो फाइलें आई थीं. इनमें से एक फाइल अंबानी की और दूसरी आरएसएस से जुड़े व्यक्ति की थी, जो पिछली महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में मंत्री थे और प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) का बहुत करीब होने का दावा करते थे. मलिक ने कहा था कि मुझे दोनों विभागों के सचिवों द्वारा सूचित किया गया था कि ये एक घोटाला है और मैंने उसके अनुरूप ही दोनों डील्स को रद्द कर दिया था. मलिक ने यह भी बताया था कि सचिवों ने उनसे कहा था कि आपको हर फाइल को पास करने के लिए 150 करोड़ रुपये मिलेंगे.

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