
आईसीआईसीआई बैंक ने सेबी प्रमुख पर कांग्रेस पार्टी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का खंडन किया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सेबी की सदस्य रहते माधबी बुच ने बैंक की तरफ से रेगुलर इनकम के तौर पर 16.8 करोड़ रुपये हासिल किए. बैंक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें सैलरी नहीं दी जा रही थी, बल्कि रिटायरमेंट बेनिफिट दिए जा रहे थे.
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि बुच ने 2017 से 2024 के बीच आईसीआईसीआई बैंक, आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल, ईएसओपी से 16.80 करोड़ रुपये हासिल किए थे. कांग्रेस का दावा था कि बुच ने सेबी चीफ रहते इतनी सैलरी नहीं पाई, जितनी कि उन्हें प्राइवेट बैंक से मिल रहे थे.
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रिटायरमेंट के बाद सैलरी नहीं, रिटायरमेंट बेनिफिट मिला!
आईसीआईसीआई बैंक ने एक बयान में स्पष्ट किया कि बुच को उनकी रिटायरमेंट के बाद बैंक या उसकी समूह कंपनियों द्वारा कोई सैलरी नहीं दिया गया है या कोई ईएसओपी भी नहीं दिया गया है, सिवाय उनके रिटायरमेंट बेनिफिट्स के.
बैंक की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, "यह ध्यान देने वाली बात है कि उन्होंने 31 अक्टूबर, 2013 से रिटायरमेंट का विकल्प चुना था. आईसीआईसीआई समूह में अपने रोजगार के दौरान, उन्हें लागू नीतियों के मुताबिक, सैलरी, रिटायरमेंट बेनिफिट्स, बोनस और ईएसओपी के रूप में मुआवजा मिला.
सेबी की सैलरी से ज्यादा बैंक से हासिल करने का दावा
आरोपों के मुताबिक चीफ बुच ने 2017-2024 के बीच सेबी से मिलने वाली 3.3 करोड़ रुपये सैलरी से पांच गुना से भी ज्यादा रेगुलर इनकम प्राइवेट बैंक से हासिल किए. सेबी प्रमुख हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद से विपक्षी दलों के निशाने पर हैं, जिसमें अडानी ग्रुप में निवेश के दावे किए गए थे.
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अडानी मामले की जांच की जिम्मेदारी, लेकिन खुद घिरीं बुच
मामले ने इसलिए तुल पकड़ा क्योंकि, माधबी बुच उसी रेगुलेटर बॉडी की अगुवाई कर रही हैं, जिनपर अडानी मामले की जांच की जिम्मेदारी है. मामले के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने अलग कमेटी बनाकर अडानी मामले की जांच की मांग की थी.