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खत्म हुआ इंतजार! CBI को मिली शाहजहां शेख की कस्टडी, मेडिकल जांच के बाद CID ने सौंपा

इससे पहले ममता बनर्जी सरकार को संदेशखाली और शेख शाहजहां के मामले पर सुप्रीम कोर्ट से भी फौरी राहत नहीं मिली थी. ममता सरकार ने इस मामले पर तुंरत सुनवाई के लिए कोर्ट से अपील की थी लेकिन अदालत ने इससे इनकार कर दिया था. हालांकि, हाई कोर्ट के आदेश पर अब सीआईडी ने सीबीआई को उनकी कस्टडी सौंप दी है.

Sheikh Shahjahan Sheikh Shahjahan
सृष्टि ओझा/संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 06 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 11:20 PM IST

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को कलकत्ता हाईकोर्ट से बुधवार को बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने शाहजहां शेख को आज 4 बजकर 15 मिनट तक सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था, लेकिन इस डेडलाइन के डेढ़ घंटे बाद शाहजहां को सीबीआई को सौंपा गया. इस बार सीबीआई अपने साथ केंद्र सुरक्षा बल लेकर पहुंची थी. इससे पहले सीआईडी की टीम शाहजहां को मेडिकल के लिए लेकर गई थी.

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बुधवार को सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हम पांच मार्च को दिए गए अपने आदेश को लेकर गंभीर हैं. सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी गई है लेकिन अब तक हमारे आदेश पर कोई स्टे नहीं आया है इसलिए बुधवार शाम 4.15 मिनट तक शाहजहां को सीबीआई को सौंप दिया जाए.

कोर्ट ने कहा कि हमने अवमानना को लेकर नोटिस जारी किया है और दो हफ्ते में बंगाल सीआईडी विभाग को हलफनामे जवाब दाखिल करने को कहा है. कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ईडी ने दलील दी कि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के बावजूद राज्य पुलिस ने इस आदेश का पालन नहीं किया है, आरोपी को यह कहते हुए नहीं सौंपा गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर किया गया था.

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सीबीआई ने कहा कि बंगाल पुलिस ने हमारे अधिकारियों को गुमराह करने वाला गलत बयान दिया कि उनकी चुनौती पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. ईडी ने कहा कि हमें केवल 15 दिनों की हिरासत मिल सकती है. अगर ये दिन बीत गए तो हमारी हिरासत का कोई मतलब नहीं रह जाएगा.

इससे पहले ममता बनर्जी सरकार को संदेशखाली और शेख शाहजहां के मामले पर सुप्रीम कोर्ट से भी फौरी राहत नहीं मिली थी. ममता सरकार ने इस मामले पर तुंरत सुनवाई के लिए कोर्ट से अपील की थी. लेकिन अदालत ने इससे इनकार कर दिया था. राज्य सरकार ने अपनी अर्जी में हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक का अनुरोध किया था.

ममता सरकार ने लगाए थे ये आरोप

 ंबंगाल की ममता सरकार ने कहा था कि इस मामले में बेबुनियाद आरोप लगाकर सीबीआई को केस ट्रांसफर किया गया जबकि हमारी एसआईटी जांच कर रही थी. राज्य सरकार ने कहा था कि सीबीआई को केस ट्रांसफर करना गलत है. ये सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का उल्लंघन है. राज्य की पुलिस ने इस मामले मे तेजी दिखाई है और इसकी अभी भी जांच चल रही है. 

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वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पश्चिम बंगाल पुलिस से हाई कोर्ट के आदेश को इस तरह समझा कि हाई कोर्ट ने सिर्फ ED के साथ हुई घटना की जांच के लिए SIT बनाने पर रोक लगाई है. इसलिए हमने शाहजहा शेख पर अपनी कार्रवाही जारी रखते हुए उसे गिरफतार कर लिया.

पांच जनवरी को हुआ था ED पर हमला

पांच जनवरी को पश्चिम बंगाल राशन घोटाला मामले में अकुंजीपारा स्थित शेख के आवास पर छापेमारी करने पहुची ED अधिकारियों को करीब 200 स्थानीय लोगों हमला किया. इस झड़प के दौरान कई ED अधिकारी घायल हो गए थे. पश्चिम बंगाल पुलिस ने 55 दिनों बाद आखिरकार 29 फरवरी को इसे गिरफ्तार किया. जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि चीफ जस्टिस से सम्पर्क करें. वो मामले को सुनवाई के लिए जल्द लिस्ट करने पर फैसला लेंगे. लंच के समय चीफ जस्टिस तय करेंगे कि कब और किस पीठ के समक्ष सुनवाई हो.

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राज्य सरकार ने अत्यंत तत्परता के साथ जांच को आगे बढ़ाया. शेख शाहजहां को उच्च न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट किए जाने के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया गया कि उनकी गिरफ्तारी पर कोई रोक नहीं है. राज्य सरकार का कहना है, हाई कोर्ट का आदेश विकृत, अवैध और मनमाना है और इसे खारिज किया जाना चाहिए.राज्य सरकार पर निराधार आरोप लगाए गए हैं. 

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सरसरी तौर पर जांच को सीबीआई को हस्तांतरित करना इस माननीय न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून का उल्लंघन है. मौजूदा मामले में राज्य पुलिस द्वारा उठाए गए व्यापक कदमों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है.

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