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शरद पवार गुट के नए चुनाव चिह्न पर VHP की आपत्ति, कहा- वट वृक्ष हमारा सिम्बल

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने शरद गुट की नई पार्टी के चुनाव चिह्न पेड़ पर आपत्ति जताई है. वीएचपी का कहना है कि वटवृक्ष उनके संगठन का रजिस्टर्ड सिंबल है. 

शरद पवार शरद पवार
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 08 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 6:19 PM IST

महाराष्ट्र में शरद पवार गुट को अब नया नाम और चुनाव चिह्न मिल गया है. चुनाव आयोग ने शरद पवार गुट की पार्टी के नए नाम 'एनसीपी शरद चंद्र पवार' को मंजूरी दी थी. शरद गुट का चुनाव चिह्न पेड़ है, जिसे लेकर अब विश्व हिंदू परिषद ने आपत्ति जताई है.

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने शरद गुट की नई पार्टी के चुनाव चिह्न पेड़ पर आपत्ति जताई है. वीएचपी का कहना है कि वटवृक्ष उनके संगठन का रजिस्टर्ड सिंबल है. 

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बता दें कि चुनाव आयोग ने शरद पवार गुट को नई पार्टी का नाम और निशान तय करने के लिए विकल्प सुझाने हेतु बुधवार शाम तक की समयसीमा दी थी, जिसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी के नए नाम पेश किए थे, जिनमें से एक को बाद में चुनाव आयोग ने मंजूरी दे दी थी.

यह भी पढ़ें: शरद पवार के हाथ से कैसे निकली NCP? इन 3 पॉइंट्स से तय होता है पार्टी और सिंबल पर किसका कब्जा

चुनाव आयोग ने अजित गुट को माना था असली NCP

चुनाव आयोग ने मंगलवार को शरद पवार गुट को झटका देते हुए अजित गुट को ही असली एनसीपी बताया था. आयोग ने कहा था कि सभी सबूतों को ध्यान में रखते हुए अजित गुट ही असली एनसीपी है.

चुनाव आयोग के इस फैसले के साथ ही अजित पवार गुट को एनसीपी का चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने का अधिकार दिया गया. आयोग ने सभी दस्तावेजी सबूतों का विश्लेषण कर कहा था कि स्पष्ट है कि अजित गुट का पार्टी और पार्टी के अलावा संगठन पर वर्चस्व है. उनके गुट के लोग भी ज्यादा हैं. इस वजह से पार्टी का नाम और निशान दोनों अजित गुट को दिए जाते हैं.

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चुनाव आयोग ने फैसले में क्या कहा था?

चुनाव आयोग ने शरद पवार बनाम अजित पवार गुट मामले में 147 पेजों का आदेश दिया है. इस आदेश में आयोग ने दोनों गुटों की तमाम बातों और सबूतों का विश्लेषण किया है. आयोग ने सभी दस्तावेजी सबूतों का विश्लेषण कर कहा है कि इससे स्पष्ट है कि अजित गुट का पार्टी और पार्टी के अलावा संगठन पर वर्चस्व है. उनके गुट के लोग ज्यादा भी हैं. इस वजह से पार्टी का नाम और निशान दोनों अजित गुट को दिए जाते हैं.

महाराष्ट्र से राज्यसभा की छह सीटों के चुनाव के मद्देनजर शरद पवार गुट को चुनाव आचरण नियम 1961 के नियम 39AA का पालन करने के लिए विशेष रियायत दी. उन्हें बुधवार शाम चार बजे तक नई पार्टी गठन के लिए तीन नाम देने को कहा गया है.

कैसे हुई थी एनसीपी दो फाड़?

पिछले साल अजित पवार ने बगावत करते हुए एनसीपी दो फाड़ कर दी थी. उन्होंने महाराष्ट्र में शिंदे सरकार को समर्थन दे दिया था. अजित के साथ कई विधायक भी सरकार में शामिल हो गए थे. इसके बाद अजित ने पार्टी पर अधिकार का दावा किया था और अपने गुट को असली एनसीपी बताया था. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने भी अजिट गुट को असली एनसीपी करार दे दिया था. इस फैसले को शरद पवार गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. वहीं अब चुनाव आयोग ने भी अजित गुट को ही असली एनसीपी बताते हुए शरद पवार को बड़ा झटका दिया है.

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