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आज का दिनः शिवसेना पर दावा मजबूत करने के लिए क्या है शिंदे की नई चाल?

एकनाथ शिंदे या उद्धव ठाकरे, कौन करेगा इस बार शिवाजी पार्क में दशहरा रैली? AAP क्यों मांग रही दिल्ली LG का इस्तीफ़ा? ED-CBI के शिकंजे के फंसे TMC नेताओं के समर्थन में क्यों आईं ममता बनर्जी? और क्यों देश में बढ़ रहीं हैं आत्महत्याएं?

उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
अमन गुप्ता
  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 9:17 AM IST

आजतक रेडियो पर हम रोज लाते हैं देश का पहला मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट ‘आज का दिन’ जहां आप हर सुबह अपने काम की शुरुआत करते हुए सुन सकते हैं आपके काम की खबरें और उन पर क्विक एनालिसिस. साथ ही, सुबह के अखबारों की सुर्खियां और आज की तारीख में जो घटा, उसका हिसाब किताब. जानिए, आज के एपिसोड में हमारे पॉडकास्टर अमन गुप्ता किन ख़बरों पर बात कर रहे हैं?

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क्यों उपराज्यपाल का इस्तीफ़ा मांग रही है AAP?

ये किसी स्कूल या कॉलेज फेस्ट में देशभक्ति गीत गा रहे लड़कों की आवाज़ नहीं है. ये आवाज़ है...दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायकों की, जो कल पूरी रात विधानसभा में धरने पर बैठे रहे. वजह बताने से पहले कहानी के बैकड्रॉप पर आते हैं. 19 अगस्त को मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई की रेड हुई थी, इसके बाद आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच तलवारें खिंच गई हैं. कोई ऐसा दिन नहीं बीता, जब AAP और बीजेपी के बड़े नेताओं के बीच ज़ुबानी जंग देखने को न मिली हो. बीजेपी लिकर पॉलिसी में कथित भ्रष्टाचार को लेकर केजरीवाल सरकार के खिलाफ हमलावर है. वहीं, आम आदमी पार्टी का आरोप है कि बीजेपी उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है. कल दिल्ली विधानसभा में अरविंद केजरीवाल ने विश्वास मत पेश किया और मोदी सरकार समेत पूरी बीजेपी पर जमकर निशाना साधा.लेकिन विश्वास मत के जरिये बीजेपी को घेरने के बाद AAP ने दिल्ली के एलजी विनय कुमार सक्सेना ख़िलाफ़ भी मोर्चा खोल दिया. AAP नेताओं ने उनके ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और पूरे दिन विधानसभा में और विधानसभा के बाहर तख्तियां और पोस्टर-बैनर लेकर प्रदर्शन किया.  इतना ही नहीं, उपराज्यपाल की जांच करने और उनको पद से हटाए जाने की मांग को लेकर पूरी रात असेंबली कैंपस में धरने पर बैठे रहे. तो ये क्या मामला है जिसको लेकर AAP, LG वीके सक्सेना को घेर रही है और रात भर उनका प्रोटेस्ट कैसे चला?

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दशहरा रैली, उद्धव ठाकरे के लिए क्यों अहम है?

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की कुर्सी जाने के बाद शिवसेना में दो-फाड़ हो चुका है. एक धड़ा एकनाथ शिंदे का है और दूसरा उद्धव के साथ खड़ा है. सत्ता से बेदखल हुए उद्धव अपनी बची खुची मिल्कियत बचाने में जुटे हैं और पार्टी पर अपनी पकड़ कायम रखने की हरमुमकिन कोशिश कर रहे हैं. 'असली शिवसेना' को लेकर चल रहा विवाद कोर्ट में तो है ही. लेकिन सियासत के मैदान में भी ख़ूब ज़ोर आजमाइश चल रही है. इस संघर्ष का नतीजा ही है कि पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान दोनों गुटों में हाथा-पाई तक की नौबत आ गई थी. अब उद्धव ने एक दांव चला है. उन्होंने दशहरे पर मुंबई के शिवाजी पार्क में एक रैली आयोजित करने की परमिशन मांगी है. लेकिन उद्धव खेमे के नेताओं का आरोप है कि बीएमसी उन्हें मंज़ूरी नहीं दे रही है. इस बीच कल उद्धव ठाकरे ने ऐलान कर दिया कि दशहरा रैली तो शिवाजी पार्क में ही होगी. ऐसे में ये जानना दिलचस्प है कि आख़िर ये रैली उद्धव ठाकरे के लिए कितनी अहमियत रखती है?

ED-CBI के शिंकजे में फंसे नेताओं के समर्थन में क्यों उतरी ममता बनर्जी?

बंगाल एसएससी घोटाले में पार्थ चटर्जी की गिरफ़्तारी के बाद ममता बनर्जी की चुप्पी पर सवाल उठ रहे थे. तब उन्होंने बस इतना ही कहा था कि वह भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करतीं. लेकिन कल पहली बार वह पार्थ चटर्जी समेत टीएमसी के ऐसे सभी नेताओं का खुलकर बचाव करते दिखीं, जिन पर सीबीआई और ईडी जैसी जांच एजेंसियों का पहरा है. तृणमूल कांग्रेस के स्टूडेंट यूनिट के फाउंडेशन डे पर आयोजित एक प्रोग्राम में बंगाल सीएम ने कहा कि पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी का मामला विचाराधीन है और अभी तक कुछ भी साबित नहीं हुआ है, सिर्फ मीडिया ट्रायल चल रहा है. बीजेपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया, न्यायपालिका और राजनीतिक दलों को डराया जा रहा है. काले धन और केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करके चुनी हुईं राज्य सरकारों को गिराने की साजिश रची जा रही है. ममता के आरोप अपनी जगह लेकिन, अपने आरोपी नेताओं को यूँ खुलकर पब्लिकली डिफ़ेंड करना, इसे कैसे देखा जाए?

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देश में क्यों बढ़ गई आत्महत्याएं?

सुसाइड यानी आत्महत्या आज के सरपट भागती ज़िन्दगी की एक मुश्किल सच्चाई है. खुद से, परिवार और समाज से ऊब चुके…तनाव और डिप्रेशन के शिकार कई लोग सुसाइड की ओर आगे बढ़ रहे हैं. कल जब नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB का डेटा आया तो बहुत से लोग चौंक गए कि पिछले साल, 2021 में, हर रोज़ इंडिया में औसतन 450 लोगों ने खुद की जान ली. टोटल, पिछले साल 1 लाख 64 हजार 33 लोगों ने आत्महत्या की जो कि 2020 की तुलना में करीब 7 फीसदी अधिक थी. एनसीआरबी का कहना है कि फैमिली प्रॉब्लम और बीमारी ख़ासकर, एड्स, कैंसर जैसे, इनसे तंग आकर लोग सबसे ज्यादा आत्महत्या करते हैं. और पिछले साल 33% सुसाइड फैमिली प्रॉब्लम और 19% बीमारी की वजह से हुए. लेकिन एक मनोवैज्ञानिक इस तरह की सुसाइडल टेंडेंसी के बारे में क्या सोचते हैं और वे एनसीआरबी के डेटा से कितने सहमत हैं?

इन ख़बरों पर विस्तार से चर्चा के अलावा ताज़ा हेडलाइंस, देश-विदेश के अख़बारों से सुर्खियां, आज के दिन की इतिहास में अहमियत सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ.

30 अगस्त 2022 का 'आज का दिन' सुनने के लिए यहां क्लिक करें...

 

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