
किसान बिल को लेकर विपक्षी दल लगातार विरोध तो कर ही रहे हैं साथ ही सरकार के सहयोगी दल भी इसके समर्थन में नहीं दिख रहे हैं. एनडीए की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल की ओर से मंत्री हरसिमरत कौर ने बिल के विरोध में इस्तीफा दे दिया है. अब एनडीए की पूर्व सहयोगी शिवसेना के नेता संजय राउत का कहना है कि जो बातें प्रधानमंत्री कह रहे हैं इसके बावजूद अगर आपका मंत्री इस्तीफा देता है तो कुछ गड़बड़ी है
किसान के मसले पर सबको साथ लेना चाहिए.
शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि एनडीए हमने नहीं छोड़ा. झूठ की राजनीति की वजह से हमें मजबूर किया गया. हम दोनों सबसे पुराने सहयोगी थे, बाकी पेइंग गेस्ट हैं.
उन्होंने कहा कि जो बातें प्रधानमंत्री कह रहे हैं, इसके बावजूद अगर आपका मंत्री इस्तीफा देता है. पहले शिवसेना ने साथ छोड़ा और अब शिरोमणि अकाली दल, मतलब कुछ तो गड़बड़ी है. किसान के मसले पर सबको साथ लेना चाहिए. अब तो लगता है एनडीए रहा ही नहीं. राउत ने यह भी कहा कि आज भी हम और अकाली दल एक साथ हैं.
किसान बिल के बारे में संजय राउत ने कहा कि आज सबसे बात हो रही है, पहले ही बात करना चाहिए था. फिलहाल इस बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए. इस मामले में हम शरद पवार से बात करेंगे. कांग्रेस और सब मिलकर फैसला लेंगे.
तो हरीशचंद्र कौनः संजय राउत
बिल को लेकर पंजाब के किसानों की नाराजगी पर राउत बोले कि पंजाब में किसान नाराज हैं तो मतलब पूरे देश में किसान नाराज हैं. महाराष्ट्र पंजाब के साथ है. उन्होंने कहा कि पंजाब के बाद अब हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भी किसानों का प्रदर्शन शुरू होगा.
उन्होंने यह भी कहा कि हम झूठ बोल रहे थे, अकाली दल अगर झूठ बोल रहा है तो हरीशचंद्र कौन है.
इस बीच शिवसेना के सांसद संजय राउत शुक्रवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार से दिल्ली में मुलाकात करेंगे. दोनों नेताओं की ये मुलाकात बिल पर क्या फैसला लेना है, इसे लेकर होगी. बता दें कि शिवसेना बिल का विरोध तो नहीं कर रही है, लेकिन उसने अभी तक ये फैसला नहीं लिया है कि राज्यसभा में जब बिल को पेश किया जाएगा तो उसका क्या कदम होगा.
इससे पहले लोकसभा में कल गुरुवार को कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 और 'कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 पास हो गया. हालांकि सरकार को नुकसान भी उठाना पड़ा. बिल का विरोध करने वाली सहयोगी शिरोमणि अकाली की सांसद और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया.