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अबू सलेम-छोटा राजन की तरह गोल्डी बराड़ भी आएगा भारत? प्रत्यर्पण के लिए माननी पड़ती हैं कुछ शर्तें

गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को कैलिफोर्निया में हिरासत में ले लिया गया है. कैलिफोर्निया प्रशासन ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी दी है. पंजाब के सीएम भगवंत मान का कहना है कि जल्द ही गोल्डी बराड़ को भारत लाया जाएगा. हालांकि, किसी भी अपराधी को दूसरे देश से अपने देश में लाना आसान नहीं है. ऊपर से कुछ शर्तों को भी मानना पड़ता है.

सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड का मास्टरमाइंड है गोल्डी बराड़. (फाइल फोटो) सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड का मास्टरमाइंड है गोल्डी बराड़. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 2:18 PM IST

कनाडा से भागकर कैलिफोर्निया पहुंचे गोल्डी बराड़ को हिरासत में ले लिया गया है. गोल्डी बराड़ पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या का मास्टरमाइंड है. तीन महीने पहले ही गोल्डी बराड़ कनाडा से भागकर कैलिफोर्निया पहुंचा था. 

सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि गोल्डी बराड़ को हिरासत में ले लिया गया है. उसे 20 नवंबर के आसपास ही डिटेन कर लिया गया था. 

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का कहना है कि कैलिफोर्निया ने भारत सरकार और पंजाब पुलिस को गोल्डी बराड़ को डिटेन किए जाने की जानकारी दी है. मान ने कहा कि अमेरिका के साथ प्रत्यर्पण संधि के अनुसार गोल्डी बराड़ को भारत लाया जाएगा, ताकि जिन लोगों ने अपने बेटे और बेटियों को खोया है, उन्हें कुछ सांत्वना मिल सके.

उन्होंने कहा कि बराड़ अपनी गैंग के जरिए पाकिस्तान से अपना काम करवाता था. मान ने दावा किया कि गोल्ड बराड़ जल्द ही पंजाब पुलिस की कस्टडी में होगा.

हिरासत में क्यों लिया गया?

गोल्डी बराड़ की उम्र अभी सिर्फ 28 साल है और उस पर कई सारे क्रिमिनल केस दर्ज हैं. बताया जा रहा है कि उसके खिलाफ 16 मामले दर्ज हैं. 

इसी साल 29 मई को पंजाबी सिंगर सुखदीप सिंह सिद्धू उर्फ सिद्धू मूसेवाला की हत्या हो गई थी. इसका मास्टरमाइंड गोल्डी बराड़ ही था. गोल्डी बराड़, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का मेंबर है, जिसने सिद्धू मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी ली थी. बराड़ को डेरा सच्चा सौचा के अनुयायी परदीप सिंह की हत्या का मास्टरमाइंड भी माना जाता है.

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गोल्डी बराड़ यानी सतिंदरजीत सिंह पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब का रहने वाला है. वो 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा गया था. वहीं से वो अपनी गैंग चलाता था. 

मूसेवाला की हत्या के बाद से गोल्डी बराड़ को कनाडा में खतरा महसूस हो रहा था. इसकी वजह ये थी कनाडा में मूसेवाला के बहुत फैन्स हैं. साथ ही लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दुश्मन बमबीहा गैंग के दर्जनों लोग भी वहां रहते हैं. इसलिए वो सितंबर में कनाडा से कैलिफोर्निया शिफ्ट हो गया था. 

सूत्रों का कहना है कि कैलिफोर्निया में गोल्डी बराड़ राजनीतिक शरण लेने की कोशिश कर रहा था, ताकि पकड़े जाने पर उसे भारत न भेजा जा सके. हालांकि, ऐसा हो नहीं सका. गोल्डी बराड़ के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था.

गोल्डी बराड़.

तो क्या गोल्डी बराड़ भारत आ सकता है?

किसी भी आरोपी को दूसरे देश से अपने देश में लाने के लिए दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि यानी एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी होना जरूरी है. अगर प्रत्यर्पण संधि न भी हो तो एक्स्ट्राडीशन अरेंजमेंट से भी काम चल जाता है. 

भारत में 1962 में प्रत्यर्पण कानून बना था. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की 48 देशों के साथ एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी है और 12 देशों के एक्स्ट्राडीशन अरेंजमेंट है. 

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एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी में ये समझौता किया जाता है कि अगर उन्हें अपने देश में दूसरे देश का वॉन्टेड व्यक्ति मिलेगा, तो वो उसे वापस भेज देंगे. हालांकि, ये मामला अक्सर लंबी कानूनी प्रक्रिया में फंस जाता है.

भारत ने 1997 में अमेरिका के साथ एक्स्ट्राडीशन ट्रीटी की थी. विदेश मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2002 से 31 जनवरी 2019 के बीच अमेरिका से 10 अपराधियों को भारत लाया गया है. 

गोल्डी बराड़ भारत लाया जाएगा या नहीं? ये तो वक्त बताएगा. हालांकि, हर देश का प्रत्यर्पण कानून अलग होता है और इसकी प्रक्रिया भी अलग. लेकिन बराड़ को वापस लाने के लिए भारत को कई सारे सबूत और दस्तावेज दिखाने होंगे. 

अंतरराष्ट्रीय कानून का भी है खेल

प्रत्यर्पण को लेकर हर देश का अपना कानून है और वहां की प्रक्रिया भी अलग है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून में प्रत्यर्पण से जुड़ी कुछ कॉमन बातें हैं. 

अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, राजनीतिक अपराध, सैन्य अपराध या धार्मिक अपराध के आरोपी को प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता. 

इतना ही नहीं, इसके लिए डबल क्रिमिनैलिटी भी होना जरूरी है. यानी जिस व्यक्ति को प्रत्यर्पित करने की मांग की गई है, उसका अपराध दोनों देशों को मानना जरूरी है. मसलन, भारत ने गोल्डी बराड़ को कई सारे मामलों में आरोपी बनाया है, तो अमेरिका को भी ये लगना चाहिए कि उसने जो भारत में किया, वो सच में अपराध है.

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तीसरी बात ये कि जिस अपराध के लिए व्यक्ति को प्रत्यर्पित करने की मांग हो रही है, प्रत्यर्पण के बाद भी उस पर वही मुकदमा चलेगा. ये नहीं कि हत्या के मामले में प्रत्यर्पित कर लिया और प्रत्यर्पण के बाद दूसरे मामले भी उसमें जोड़ दिए गए. 

चौथी और आखिरी बात मानवाधिकार से जुड़ी है. किसी भी व्यक्ति को प्रत्यर्पित तभी किया जाता है जब उस देश को लगता है कि व्यक्ति को वहां भेजने पर उसके मानवाधिकारों का ध्यान रखा जाएगा.

अबू सलेम को 2005 और छोटा राजन को 2015 में भारत लाया गया था. (फाइल फोटो)

 

प्रत्यर्पण के कुछ चर्चित मामलेः-

1. अबू सलेम को शर्तों के साथ लाया गया था भारत

अबू सलेम 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट का दोषी है. इस ब्लास्ट में 250 से ज्यादा लोग मारे गए थे. इन बम धमाकों के बाद अबू सलेम पहले दुबई, फिर अमेरिका और आखिर में पुर्तगाल चला गया. 

सितंबर 2002 में लिस्बन पुलिस ने अबू सलेम और उसकी गर्लफ्रेंड मोनिका बेदी को फर्जी दस्तावेज लेकर सफर करने पर गिरफ्तार किया गया था. अबू सलेम और मोनिका बेदी को जब गिरफ्तार किया गया था, तब भारत और पुर्तगाल के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं हुई थी. दोनों देशों के बीच 2007 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी.

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हालांकि, भारत ने कानूनी लड़ाई लड़ी और नवंबर 2005 में अबू सलेम को भारत लाया गया. लेकिन पुर्तगाल ने एक शर्त रख दी. पुर्तगाल ने कहा कि जिस व्यक्ति को यहां से भारत भेजा जाएगा, उसे न तो मौत की सजा दी जाएगी और न ही 25 साल से ज्यादा समय तक कैद में रखा जाएगा.

2. छोटा राजन को इंडोनेशिया से लाया गया

छोटा राजन को 6 नवंबर 2015 को इंडोनेशिया से भारत लाया गया था. 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट के बाद से ही छोटा राजन फरार था. उसे इंटरपोल ने बाली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था.

छोटा राजन को जब गिरफ्तार किया गया था, तब उसके पास भारतीय पासपोर्ट था जिस पर उसका नाम मोहन कुमार दर्ज था. हालांकि, उसका असली नाम राजेंद्र सदाशिव निखलजे है. 

छोटा राजन मुंबई सीरियल ब्लास्ट के मास्टरमाइंड और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का करीबी हुआ करता था. राजन पर हत्या और किडनैपिंग समेत 70 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे.

3. मलकीत कौर और सुरजीत बदेशा का प्रत्यर्पण

मलकीत कौर और सुरजीत बदेशा को 24 जनवरी 2019 को भारत लाया गया था. दोनों कनाडाई नागरिक थे और उन पर भारत में हत्या और किडनैपिंग का केस था. दोनों पर जसविंदर कौर सिद्धू उर्फ जस्सी की हत्या और किडनैपिंग का आरोप था. 

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जस्सी मलकीत कौर की बेटी थी और सुरजीत बदेशा उसके चाचा थे. ये ऑनर किलिंग का मामला था. पूरा परिवार कनाडा रहता था. लेकिन 1999 में जस्सी छुट्टियां मनाने भारत आई. यहां उसने सुखविंदर सिंह से शादी की और वापस कनाडा चली गई. लेकिन घर वालों को ये शादी मंजूर नहीं थी, जिसके बाद जस्सी फिर भारत आ गई.

जस्सी जब भारत आई थी तब उसको अगवा कर लिया गया और जून 2000 में उसकी हत्या हो गई. जांच में सामने आया कि जस्सी की हत्या के लिए मलकीत कौर और सुरजीत बदेशा ने सुपारी दी थी.

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जनवरी 2019 में दोनों को भारत लाया गया. हालांकि, उन्हें भी इसी शर्त पर भारत लाया गया था कि यहां उन्हें फांसी की सजा नहीं दी जाएगी.

 

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