Advertisement

मामले जो तय कर सकते हैं हल्द्वानी अतिक्रमण की तक़दीर: दिन भर, 5 जनवरी

अतिक्रमण मामलों में पहले कोर्ट का रुख़ क्या रहा है, दिल्ली PCR सिस्टम पर क्यों उठ रहे हैं सवाल, त्रिपुरा में क्या गुटबाजी BJP को ले डूबेगी, सुनिए 'दिन भर' में

मामले जो तय कर सकते हैं हल्द्वानी अतिक्रमण की तक़दीर: दिन भर, 5 जनवरी मामले जो तय कर सकते हैं हल्द्वानी अतिक्रमण की तक़दीर: दिन भर, 5 जनवरी
कुलदीप मिश्र
  • ,
  • 05 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 9:11 PM IST

हल्द्वानी मामले के पीछे की राजनीति

उत्तराखंड में हल्द्वानी. हल्द्वानी में बनभूलपुरा और वहां रेलवे लाइन के पास हैं चार हजार तीन सौ पैंसठ मकान. 29 एकड़ ज़मीन, जहां लगभग पचास हजार लोग रहते हैं. ये मकान वैध हैं या अवैध, क्या ये रेलवे की ज़मीन का अतिक्रमण, एनक्रोचमेंट करके बनाए गए हैं? क्या इन्हें ढहा देना चाहिए? इस मसले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और देश की सबसे बड़ी अदालत ने इन मकानों को तोड़ने के हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी.

Advertisement

यहां जिनके घर हैं, वे कह रहे हैं कि उनके पास कागज़ात है और हल्द्वानी के बसने की शुरुआत ही यहां से हुई थी तो ये ज़मीन इल्लीगल कैसे हो सकती है. ये मामला काफी पुराना है लेकिन हाल में नेशनल ख़बर ये तब बना जब नैनीताल हाईकोर्ट ने इस ज़मीन को अतिक्रमण बताते हुए ख़ाली करवाने का आदेश दे दिया. आज सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले पर रोक लगा दी और राज्य सरकार और रेलवे को नोटिस जारी किया, जिस पर 7 फरवरी को अगली सुनवाई होगी. कोर्ट ने रोक लगाते हुए क्या सिग्निफिकेन्ट चीज़ें आज कहीं और अब आगे इस मामले की सुनवाई किस तरफ बढ़ेगी? सुनिए 'दिन भर' में

एनक्रोचमेंट का मामला और इसका इतिहास बहुत पेचीदा है. पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में अतिक्रमण के ही किसी याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जज थे जस्टिस ए एम खानविलकर, उन्होंने इसे एक सैड स्टोरी कहा था. क्योंकि आप जब अतिक्रमण हटाते हो, उसे कहीं और बसाते हो और इस तरह से इनडायरेक्टली आप एक और अतिक्रमण कर जाते हो. ये बड़ा पेचीदा सा मसला है. ये तो एक टिप्पणी थी लेकिन अतिक्रमण को लेकर क्या कोई स्पष्ट रुख़ सुप्रीम कोर्ट का समझ में आता है, पिछले कुछ मामलों की रौशनी में देखें? सुनिए 'दिन भर' में

Advertisement

 

दिल्ली PCR पर क्यों उठ रहे सवाल?


कंझावला में 31 दिसंबर की रात बीस साल की अंजलि की दर्दनाक मौत हुई, उनकी लाश एक कार के नीचे फंसकर घिसटती हुई दिखी सीसीटीवी फुटेज में और बाद में बुरी हालत में उनकी लाश मिली. आप जानते है कि इस मामले में पांच आरोपी गिरफ्तार हो चुकी हैं, एक चश्मदीद लड़की है जो उस वक़्त अंजलि के साथ थी. परिवार की मांग है कि लड़की को भी आरोपी बनाया जाए और सब पर हत्या का मुक़दमा चलाया जाए.  

लेकिन पुलिस अभी कड़ियों को जोड़ नहीं पाई है. दिल्ली के स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस सागर प्रीत हुड्डा ने सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि आरोपियों पर धारा 302 का केस लगाना काफी चैलेंजिंग होता है क्योंकि आपको बहुत सारे एविडेंस और स्प्षट मोटिव चाहिए होता है.  

उधर आज इस केस में कुछ और CCTV फुटेज आए हैं. इसमें एक में दिख रहा है कि जिस रास्ते से आरोपियों की कार जा रही है, उसके पीछे पुलिस वैन भी दिख रही है. वहीं, दूसरे फुटेज में अंजलि के साथ स्कूटी पर दिखी निधि घटना के कुछ वक़्त बाद अकेले घर जाते दिख रही है. ख़बरें हैं कि गिरफ्तार पांचों युवकों का पुलिस लाई डिटेक्टर टेस्ट भी करवा सकती है. क्योंकि आरोपियों के जवाब में काफ़ी अंतर बताया जा रहा है. सवाल है कि क्या साफ हुआ है और क्या अब भी अनसुलझा है इस केस में? सुनिए 'दिन भर' में

Advertisement

 

त्रिपुरा में BJP को दोहरी चुनौती!

त्रिपुरा में कुछ महीने में विधानसभा चुनाव की घोषणा होनी है. बीजेपी फिलहाल सत्ता में कायम है लेकिन पार्टी में अंदरूनी मनमुटाव की ख़बरें हैं. पिछले साल बिप्लब देब ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था जिसके बाद आलाकमान ने मानिक साहा को कुर्सी सौंपी. इसके बाद लगा कि इंटरनल कॉन्फ्लिक्ट पर विराम लगेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं और पांच विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इसी राजनीतिक उहापोह में आज गृह मंत्री अमित शाह त्रिपुरा पहुंचे जहां उन्होंने ‘जन विश्वास यात्रा’ को हरी झंडी दिखाई. 

 इस महीने हालांकि अमित शाह 11 राज्यों के दौरे पर हैं लेकिन त्रिपुरा में पार्टी की उलझी हुई स्थिति को देख कर फोकस यहां ज्यादा है. इन सब से इतर एक ख़बर विपक्षी खेमे से भी है. कहा जा रहा है कि आगामी चुनाव के लिए सीपीएम और कांग्रेस का गठबंधन हो सकता है, ताकि बीजेपी में हो रही खेमेबाजी का फायदा उठाया जा सके. तो अमित शाह इस दौरे से क्या हासिल करना चाहते हैं और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी के सामने चुनौतियां क्या हैं, पिछले साल इंटरनल फाइट के चलते बिप्लब देब को हटा कर मानिक शाह को मुख्यमंत्री बनाया था क्या इससे बीजेपी को फायदा कोई हुआ और क्या ये इंटरनल फाइट अभी भी जारी है, विपक्ष से सीपीएम और कांग्रेस के गठबंधन की जो सुगबुगाहट हो रही है इसमें कितना दम है, सुनिए 'दिन भर' में

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement