
ये कहानी 'क्रैश' हो चुके उस अमेरिकन ड्रीम की है जिसका प्लेन बुधवार को अमृतसर एयरपोर्ट पर लैंड हुआ. दर्जनों 'बेवतन' चेहरों को वापस वतन लेकर. जिन्हें दुनिया के सबसे बड़े 'चौकीदार' के कानून ने बगैर पहचान के, बगैर कागज के घोषित कर दिया. झुकी हुई निगाहें, पैरों में बेड़ियां, हाथों में हथकड़ियां और दिल में ढेर सारा गुस्सा और जिल्लत.
ये कहानी किसी हरविंदर की, किसी जसपाल, किसी निकिता तो किसी केतुल पटेल की है. सबने एक ही सपना देखा था. अच्छी जिंदगी का. लेकिन ये सपना ट्रंप के पॉलिटिकल डिजाइन की भेंट चढ़ गया. ट्रंप, जिनकी राष्ट्रवाद और 'अमेरिका फर्स्ट' की अहंकारी व्याख्या ने अमेरिकी उदारवाद को बेदम कर दिया. फिर ऐसे 'घुसपैठियों' को सफाई देने का मौका कब मिलता कि वे कैसे अपने सपनों का पीछा करते-करते उनके देश में पहुंचे.
पैर में बेडियां, हाथों में हथकड़ी
उन्हें अमेरिकी एजेंटों ने न जाने कहां से कैसे उठाया, एक परेड कराई. पैर में बेडियां बांधी, हाथों में हथकड़ी पहनाए और माल ढोने वाले सेना के महाकाय में लाद दिया.
गुरुदासपुर के हरदोवाल गांव के जसपाल के अमेरिका गमन की कहानी जुलाई 2024 में शुरू होती है. जिस अमेरिका तक दिल्ली से विमान से पहुंचने में 25-30 घंटे लगते हैं वहां पहुंचने में जसपाल को 4400 घंटे लगे यानी की 6 महीने.
अमृतसर एयरपोर्ट पर अमेरिका वायु सेना के मालवाहक विमान C-17 से उतरने वाले 36 साल के जसपाल बुधवार रात को लगभग 6 महीने बाद अपने गांव पहुंचे. वो बताते हैं कि प्लने में उनके हाथों में हथकड़ियां थी, पैरों में चेन बंधे थे. प्लेन में जब उनलोगों बिठाया जा रहा था तो उन्हें नहीं बताया गया कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है.
अमृतसर एयरपोर्ट पर हुए आजाद
अचानक एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें कहा कि उन्हें भारत वापस भेजा जा रहा है. जसपाल कहते हैं, "हमारी बेड़ियां तो अमृतसर एयरपोर्ट पर खोली गईं."
जसपाल अपने साथ हुए कांड के लिए ट्रेवल एजेंट को दोषी ठहराते हैं. उन्होंने कहा, "मैंने एजेंट से कहा था कि वह मुझे वैध वीजा के साथ भेजे. लेकिन उसने मुझे धोखा दिया. जसपाल के अनुसार ये सौदा 30 लाख रुपये में तय हुआ था.
30 लाख खर्च किया, 6 महीने तक बेवतनों की तरह रहे
जसपाल का दावा है कि वो पिछले साल जुलाई में विमान से ब्राजील पहुंचा था. उसने कहा कि उससे वादा किया गया था कि अमेरिका की आगे की यात्रा भी विमान से होगी, लेकिन उसके एजेंट ने उसे 'धोखा' दिया. जसपाल का दावा है कि उसके एजेंट ने उसे अवैध तरीके से बॉर्डर क्रॉस कर अमेरिका घुसने पर मजबूर किया.
ब्राजील में जसपाल ने 6 महीने 'बेवतनों' की तरह जिंदगी गुजारी. उसके पास वैध दस्तावेज थे नहीं, वो किसी से शिकायत कर नहीं सकता था. क्योंकि इससे उसका भेद खुल जाता. वो छिपते-छुपाते रहा.
जसपाल बताते हैं कि वह ब्राजील से बॉर्डर करके अमेरिका में घुसा था. लेकिन 24 जनवरी को उसे यूएस बॉर्डर पेट्रोल ने गिरफ्तार कर लिया. उसे 11 दिनों तक कस्टडी में रखा गया फिर इस प्लेन पर बैठा दिया गया.
जसपाल कहता है कि वह टूट गए हैं, उन्होंने उधार लेकर बहुत बड़ी रकम खर्च की थी.
104 लोगों को लेकर अमृतसर आया अमेरिकी विमान
बता दें कि बुधवार को 104 अवैध प्रवासियों को लेकर अमेरिकी सैन्य विमान बुधवार को अमृतसर एयरपोर्ट पर उतरा था. इस विमान में 33-33 भारतीय हरियाणा और गुजरात से, 30 पंजाब से, तीन-तीन महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से और दो चंडीगढ़ से थे. इनमें 19 महिलाएं और 13 नाबालिग शामिल हैं.
जसपाल सिंह की मां शिंदर कौर और चचेरे भाई जसबीर सिंह रंधावा आजतक से बातचीत में थोड़ी अलग कहानी बताते हैं. उनका कहना है कि 2 साल तक इंग्लैंड में काम करने के बाद जसपाल सिंह 12 दिन पहले अमेरिका गया था. उन्होंने कहा कि हालांकि उनका मन बहुत दुखी है, लेकिन उनका बेटा सकुशल भारत लौट आया है, जिसके लिए वे भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं.
जसपाल सिंह का एक बेटा और एक बेटी है और उनका छोटा भाई शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में काम करता है. जसपाल सिंह के पिता नरिंदर सिंह का निधन हो चुका है. परिवार के अनुसार, जसपाल सिंह एक मेहनती युवक है, जिसने 8 साल तक सऊदी अरब और 4 साल तक कतर में काम किया है.
केतुल पटेल की कहानी
अमेरिका से लौटकर आए केतुल पटेल की कहानी और भी परेशान करने वाली है. केतुल अपने परिवार के साथ सूरत के डिंडोली में रह रहा था. वो एक साल पहले फ्लैट बेचकर अमेरिका गया था. आजतक से बातचीत में फ्लैट के नए मालिक प्रफुल्ल भाई ने ये बात बताई है. केतुल के पिता हसमुख भाई अहमदाबाद के खोरज में रहते है और दर्जी का काम करके अपना परिवार का पालन पोषण करते है. हसमुख पटेल के साथ जब आजतक ने बात करने की कोशिश की तो कैमरा पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.
अमेरिका से अमृतसर पहुंचे 33 गुजरातियों को यहां से अहमदाबाद ले जाया गया है. यहां से उन्हें पुलिस अपने वाहन में बिठाकर उनके घरों तक छोड़ रही है.