
सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाए जाने के कारण होने वाले प्रदूषण की समस्या पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हरियाणा और पंजाब सरकार के वकीलों से पूछा कि क्या उनके पास एनसीसी कैडेट्स की पर्याप्त संख्या है जो पराली जलाने और निपटाने की समस्या को लेकर जागरुकता फैलाने, किसानों से पराली न जलाने की अपील कर सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाए जाने की मॉनिटरिंग के लिए जस्टिस मदन बी लोकुर की एक सदस्यीय मॉनिटरिंग कमेटी बनाई. याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि पूर्व न्यायाधीश मदन बी लोकुर को पराली जलाने में नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट नियुक्त करे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें जस्टिस लोकुर को नियुक्त करने में परेशानी नहीं है, लेकिन आप एक बार उनसे बात कर लें कि क्या वे तैयार हैं. इन तीनों राज्यों के चीफ सेक्रेटरी जस्टिस लोकुर को सहयोग करेंगे. ये कमेटी फिजिकल सर्वे करेगी. एनसीसी/ एनएसएस और भारत स्काउट गाइड के लोग भी सहयोग करेंगे.
सॉलिसीटर जनरल ने जस्टिस लोकुर के नाम पर आपत्ति जताई और कहा कि इस बाबत हम आवेदन दाखिल करेंगे. सॉलिसीटर जनरल ने आदेश जारी करने से पहले उन्हें सुने जाने की मांग भी की. सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसीटर जनरल की मांग ठुकरा दी. कोर्ट ने कहा कि संबंधित राज्य सरकारें इस कमेटी को सुरक्षा सहित सभी उचित सुविधाएं मुहैया कराएंगी. यह कमेटी 15 दिन में अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेगी. मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी.
याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार ने एक मोबाइल एप से पराली जलाने से रोकने की व्यवस्था की है. इसके जरिए तत्काल शिकायत होती है. यूपी, हरियाणा ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है. वहीं, सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि EPCA को इस मामले में जिम्मेदारी सौंपी गई है. एमाइकस क्यूरे पहले से नियुक्त हैं. याचिकाकर्ता ने कहा कि फिलहाल पश्चिमी यूपी में पराली जलाने कि गतिविधि रोकने के लिए व्यवस्था की जानी चाहिए.
पंजाब ने क्या दिया जवाब?
पंजाब सरकार ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का कारण हम नहीं हैं. हम अदालत के हरेक निर्देश का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं. पंजाब सरकार के एप पर याचिकाकर्ता ने सवाल उठाए और फील्ड मॉनिटरिंग को जरूरी बताया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारी चिंता ये है कि दिल्ली एनसीआर के लोगों को साफ हवा मिले और पराली का प्रदूषण इसमें बाधा न बने.