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राहुल गांधी के पासपोर्ट पर क्यों है विवाद, स्वामी क्यों कर रहे विरोध, क्या होता है डिप्लोमेटिक पासपोर्ट?

राहुल गांधी को इसी साल मार्च में आपराधिक मानहानि मामले में सूरत की कोर्ट ने दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई थी. इसके बाद जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द हो गई थी. संसद सदस्यता रद्द होने के बाद राहुल गांधी ने अपना डिप्लोमेटिक पासपोर्ट सरेंडर कर दिया था. अब राहुल को अमेरिका दौरे पर जाना है. ऐसे में उन्हें इसके लिए पासपोर्ट चाहिए.

राहुल गांधी और सुब्रह्मण्यम स्वामी (फाइल फोटो) राहुल गांधी और सुब्रह्मण्यम स्वामी (फाइल फोटो)
aajtak.in/संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 26 मई 2023,
  • अपडेटेड 11:23 AM IST

कांग्रेस नेता राहुल गांधी अगले हफ्ते अमेरिका के दौरे पर जाने वाले हैं. इससे पहले उन्होंने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में याचिका दाखिल कर ऑर्डिनरी पासपोर्ट के लिए NOC जारी करने की मांग की है. भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने राहुल की याचिका का विरोध किया है. उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी के पास 10 साल के लिए पासपोर्ट जारी करने का कोई वैध या प्रभावी कारण नहीं है. स्वामी ने कोर्ट में कहा कि वह (राहुल गांधी) बार-बार विदेश जाते हैं. उनके बाहर जाने से जांच में रुकावट पैदा हो सकती है. आज इस मामले में फिर सुनवाई हो रही है. आइए जानते हैं कि आखिर राहुल गांधी को नए पासपोर्ट की जरूरत क्यों पड़ी और यह पूरा विवाद क्या है?

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राहुल को क्यों पड़ी नए पासपोर्ट की जरूरत?

राहुल गांधी को इसी साल मार्च में आपराधिक मानहानि मामले में सूरत की कोर्ट ने दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई थी. इसके बाद जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द हो गई थी. संसद सदस्यता रद्द होने के बाद राहुल गांधी ने अपना डिप्लोमेटिक पासपोर्ट सरेंडर कर दिया था. अब राहुल को अमेरिका दौरे पर जाना है. ऐसे में उन्हें इसके लिए पासपोर्ट चाहिए. लेकिन उनके खिलाफ नेशनल हेराल्ड मामले में केस चल रहा है. इस केस में वे जमानत पर हैं. ऐसे में उन्हें नए पासपोर्ट के लिए NOC की जरूरत है और इसके लिए उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 

क्या होता है डिप्लोमेटिक पासपोर्ट ? 

डिप्लोमेटिक पासपोर्ट सरकार के प्रतिनिधि, भारतीय राजनयिकों और सरकार के वरिष्ठ अफसरों को जारी किए जाते हैं. यह मरून रंग का पासपोर्ट होता है. डिप्लोमेटिक पासपोर्ट धारकों को विदेशों में एमबेंसी से लेकर यात्रा के दौरान तक कई सुविधाएं दी जाती हैं. साथ ही इमिज्रेशन भी सामान्य लोगों की तुलना में काफी जल्दी और आसानी से हो जाता है.

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राहुल ने ऑर्डिनरी पासपोर्ट के लिए मांगी NOC

राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द हो गई है, ऐसे में उन्होंने अपना डिप्लोमेटिक पासपोर्ट सरेंडर कर दिया है. अब उन्हें अमेरिकी दौरे पर जाने के लिए ऑर्डिनरी पासपोर्ट की जरूरत है. इसी के लिए उन्होंने कोर्ट से NOC मांगी है. ऑर्डिनरी पासपोर्ट भारत के आम नागरिकों को जारी किया जाता है. यह नीले रंग का होता है. नीला रंग भारत को रिप्रजेंट करता है. इससे विदेश में पासपोर्ट चेक करने वालों को भी आसानी होती है.

राहुल ने अपनी याचिका में क्या कहा?

राहुल गांधी की ओर से पेश वकील तरन्नुम चीमा ने कोर्ट से मांग की कि उन्हें एनओसी जारी की जाए, ताकि वे नया पासपोर्ट बनवा सकें. राहुल की ओर से कहा गया, मार्च 2023 से राहुल संसद के सदस्य नहीं हैं. ऐसे में उन्होंने अपना राजनयिक पासपोर्ट सरेंडर कर दिया और वे ऑर्डिनरी पासपोर्ट के लिए आवेदन कर रहे हैं. इसमें कोर्ट से NOC की जरूरत है. वहीं, कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सुब्रमण्यम स्वामी का जवाब जरूरी है. 

कैसे हुई सुब्रमण्यम स्वामी की एंट्री?

दरअसल, राहुल गांधी जिस नेशनल हेराल्ड मामले में जमानत पर हैं, वह केस सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा ही दाखिल किया गया था. नेशनल हेराल्ड मामला सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ स्वामी ने निजी आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी. ऐसे में कोर्ट ने राहुल की अर्जी पर स्वामी से जवाब दाखिल करने के लिए कहा.

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स्वामी ने कोर्ट में क्या आपत्ति जताई? 

स्वामी ने सात मुख्य तथ्यों के आधार पर राहुल गांधी की 28 मई से प्रस्तावित अमेरिका यात्रा के मद्देनजर पासपोर्ट बनवाने और इसके लिए अदालत से NOC की गुहार वाली अर्जी का विरोध किया है. 

1- राहुल गांधी को पासपोर्ट जारी किए जाने का कोई ठोस आधार नहीं है.

2- पहले से चल रहे मुकदमों को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी को पासपोर्ट के लिए एनओसी भी 1 साल से ज्यादा समय के लिए नहीं मिलना चाहिए. 

3- स्वामी ने कोर्ट की टिप्पणी के हवाले से कहा, पासपोर्ट रखने या यात्रा का मूलभूत अधिकार एक संपूर्ण अधिकार नहीं है. और इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.

4- सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था, नैतिकता के नजरिए और अपराध रोकने के उद्देश से किसी भी नागरिक के पासपोर्ट रखने पर प्रतिबंध लगा सकती है, या फिर पासपोर्ट जब्त या फिर तलब भी किया जा सकता है.

5- विदेश मंत्रालय की नियमावली में ये साफ है कि अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई मुकदमा चल रहा है तो उस को निश्चित समय के लिए ही पासपोर्ट दिया जा सकता है. 

6- राहुल गांधी ने गृह मंत्रालय की ओर से उनकी नागरिकता को लेकर दिए गए नोटिस पर अब तक कोई जवाब भी नहीं दिया है. 

7- स्वामी का दावा है कि उन्होंने गृह मंत्रालय में राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर कुछ तथ्य भी पेश किए थे.

8- स्वामी के दावे के मुताबिक, राहुल गांधी ने 2003 में बैक ओप्स नाम की कंपनी यूनाइटेड किंगडम में बना रखी है, जिसमें राहुल गांधी ने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया है. 
 

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क्या है नेशनल हेराल्ड केस?

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कुछ कांग्रेसी नेताओं ने गलत तरीके से यंग इंडियन लिमिटेड (वाईआईएल) के जरिए एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण किया है. उन्होंने आरोप लगाया था कि यह सब कुछ दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 2000 करोड़ रुपये की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया. साजिश के तहत यंग इंडियन लिमिटेड को टीजेएल की संपत्ति का अधिकार दिया गया है.

उन्होंने अपनी शिकायत में राहुल- सोनिया समेत अन्य पर धोखाधड़ी, साजिश और आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाया है. कोर्ट ने 2015 में राहुल और सोनिया को जमानत देते हुए कहा था कि आरोपी प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं जिनकी गहरी राजनीतिक जमीनी स्तर है और इस बात की कोई आशंका नहीं है कि वे भाग जाएंगे. 

भारत में कितने प्रकार के पासपोर्ट ?

- भारत में आमतौर पर चार प्रकार के पासपोर्ट होते हैं. पहला ऑर्डिनरी पासपोर्ट जो नीले रंग का होता है और इसे सामान्य नागरिकों के लिए जारी किया जाता है. 

- दूसरा डिप्लोमेटिक पासपोर्ट होता है, जो सरकार के प्रतिनिधि, भारतीय राजनयिकों और सरकार के वरिष्ठ अफसरों को जारी होता है. यह मैरून रंग का होता है. 

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- तीसरा सफेद रंग का पासपोर्ट होता है, यह सरकारी पदाधिकारियों और गवर्मेंट ऑफिशियल के लिए जारी किया जाता है. इसमें वे लोग शामिल है, जो सरकारी कामकाज के सिलसिले में विदेश यात्रा पर जाते हैं. 

वहीं, चौथा पासपोर्ट ऑरेंज रंग का होता है, ऐसे व्यक्ति को इश्यू किया जाता है, जो सिर्फ 10वीं कक्षा तक ही शिक्षित होता है. इन्हें दिशनिर्देशों को समझने के लिए किसी अन्य की जरूरत होती है. ये ज्यादातर विदेश में माइग्रेट मजदूरों के लिए होता है. 

 

 

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