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'महिला दिवस पर बड़ा तोहफा मिला है, PM मोदी को शुक्रिया....', राज्यसभा के लिए मनोनीत होने पर बोलीं सुधा मूर्ति

राज्यसभा के लिए मनोनीत होने पर सुधा मूर्ति ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मैं फिलहाल भारत में नहीं हूं. लेकिन महिला दिवस पर ये मेरे लिए बड़ा तोहफा है. ये देश के लिए काम करने की नई जिम्मेदारी है. मैं इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी की आभारी हूं. 

सुधा मूर्ति सुधा मूर्ति
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 08 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 1:59 PM IST

इंफोसिस फाउंडेशन की अध्यक्ष सुधा मूर्ति को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी. 

इस ऐलान पर सुधा मूर्ति ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मैं फिलहाल भारत में नहीं हूं. लेकिन महिला दिवस पर ये मेरे लिए बड़ा तोहफा है. ये देश के लिए काम करने की नई जिम्मेदारी है. मैं इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी की आभारी हूं. 

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बता दें कि इससे पहले पीएम मोदी ने ट्वीट कर जानकरी दी थी कि मुझे खुशी है कि भारत के राष्ट्रपति ने सुधा मूर्ति जी को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है. सामाजिक कार्य, परोपकार और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में सुधा जी का योगदान अतुलनीय और प्रेरणादायक रहा है. राज्यसभा में उनकी उपस्थिति हमारी 'नारी शक्ति' का एक शक्तिशाली प्रमाण है, जो हमारे देश की नियति को आकार देने में महिलाओं की ताकत और क्षमता का उदाहरण है. उनके सफल संसदीय कार्यकाल की कामना करता हूं.

कौन हैं सुधा मूर्ति?

सुधा मूर्ति इंफोसिस के फाउंडर नारायणमूर्ति की पत्नी हैं. वह लेखिका भी हैं. उनकी कई किताबें अंग्रेजी और कन्नड़ भाषा में प्रकाशित हो चुकी हैं. वह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की सास भी हैं. उनकी बेटी अक्षता मूर्ति दरअसल ऋषि सुनक की पत्नी है. 

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सुधा का जन्म 19 अगस्त 1950 को कर्नाटक में हुआ था. वह कंप्यूटर साइंटिस्ट और इंजीनियर रही हैं. वह टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी में काम करने वाली पहली महिला इंजीनियर थीं.

सुधा मूर्ति लगातार महिलाओं और बच्चों के लिए काम करती रही हैं. उन्होंने कई प्रेरणादायक किताबें लिखी हैं. दरअसल, सुधा मूर्ति ने ही 1981 में इंफोसिस की शुरुआत के दौरान पति नारायणमूर्ति को 10,000 रुपये उधार दिए थे. सुधा टीवी शो में बता चुकी हैं कि वे लोग उस समय किराए के मकान में रहते थे और उस समय काफी पैसों की तंगी से गुजर रहे थे.

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