
पंजाब के अमृतसर में गोल्डन टेंपल में अकाली दल के सीनियर नेता सुखबीर सिंह बादल पर जानलेवा हमला हुआ. हालांकि, वो इस हमले में बाल-बाल बच गए और वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने गोली चलाने वाले को तुरंत पकड़ भी लिया. लेकिन धार्मिक स्थल पर जिस तरह से ये सुरक्षा चूक हुई, उससे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर देश के कुछ प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था कैसी है.
स्वर्ण मंदिर, अमृतसर
स्वर्ण मंदिर, जो पंजाब के अमृतसर में स्थित है वहां हर दिन 1.5 लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं. मंदिर के छह प्रवेश द्वार हैं, जिन्हें श्रीरामनी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सेवादारों द्वारा सुरक्षा दी जाती है. सुरक्षा के लिए वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है. सुरक्षा उपायों के तहत गुरुद्वारे के बाहर मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं.
अयोध्या, राम मंदिर
अयोध्या में राम मंदिर की सुरक्षा को अत्याधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए सुनिश्चित किया गया है. यहां 2000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिसमें यूपी एटीएस के कमांडो, पीएसी, सीआरपीएफ के जवान शामिल हैं. अयोध्या की सुरक्षा को दो प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है - यलो जोन और रेड जोन.
राम मंदिर परिसर को रेड जोन में रखा गया है, जहां 12 कंपनियां पीएसी, 6 कंपनियां सीआरपीएफ और सिविल पुलिस के 250 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं. मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और हर गतिविधि पर निगरानी रखी जाती है. मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए किसी भी प्रकार की वस्तु, जैसे बेल्ट, मोबाइल, लाइटर, पर्स आदि लाने पर रोक है.
वाराणसी, काशी विश्वनाथ
काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद की सुरक्षा को चार घेरों में बांटा गया है. सबसे अंदर की ओर रेड जोन, फिर येलो जोन, ऑरेंज जोन और ग्रीन जोन है. इस सुरक्षा व्यवस्था में सीआरपीएफ और सिविल पुलिस के अलावा, तीन पारियों में 925 सिविल पुलिस कर्मी तैनात रहते हैं.
यहां हर एक प्रमुख बिंदु पर चेकिंग की जाती है और किसी भी प्रकार के प्रतिबंधित सामान को अंदर जाने की अनुमति नहीं होती. सुरक्षा में अग्निशमन दल, बम निरोधक दस्ता और अन्य अधिकारी भी तैनात रहते हैं. कुल पांच स्थानों पर चेकिंग की व्यवस्था है.
पुलिस की तैनाती प्रमुख अवसरों पर होती है और मंदिर के भीतर और आसपास SGPC की अपनी टास्क फोर्स होती है जो नियमित रूप से निगरानी करती है.
श्री माता वैष्णो देवी मंदिर
वैष्णो देवी की यात्रा को श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) द्वारा संचालित किया जाता है, जिसकी अध्यक्षता जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल करते हैं. यात्रा की सुरक्षा जम्मू-कश्मीर पुलिस, CRPF और अन्य केंद्रीय अर्धसैनिक बलों द्वारा की जाती है. मंदिर बोर्ड के पास अपनी निजी सुरक्षा भी है, जो यात्रा मार्ग और भवन के आसपास तैनात रहती है.
यात्रियों के लिए पंजीकरण अनिवार्य है. बिना पंजीकरण स्लिप के कोई भी यात्री दर्शन के लिए नहीं जा सकता. यात्रियों को RFID कार्ड भी दिए जाते हैं, जो उनके मार्ग और भीड़ नियंत्रण में मदद करते हैं. यात्रा के दौरान, यात्रियों की पूरी जांच की जाती है, उनके सामान की तलाशी ली जाती है और दस्तावेजों की पुष्टि की जाती है. मुख्य भवन परिसर में प्रवेश से पहले सभी यात्रियों को अपनी बैग, जूते, बेल्ट, पर्स आदि को काउंटरों पर जमा करना होता है.
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महाकाल मंदिर, उज्जैन
महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में मध्य प्रदेश पुलिस, सशस्त्र बल और निजी सुरक्षा एजेंसियां तैनात रहती हैं. मंदिर परिसर में 700 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और 500 से अधिक सुरक्षा गार्ड तैनात हैं.
यहां के दर्शनार्थियों के लिए तीन प्रकार की व्यवस्था की गई है. सामान्य दर्शन, सशुल्क दर्शन और प्रोटोकॉल दर्शन. सुरक्षा में सीसीटीवी निगरानी, हथियारबंद पुलिस और बम निरोधक दल शामिल होते हैं.
तिरुमाला मंदिर
तिरुमला में तीन प्रमुख सुरक्षा बिंदु हैं - आलिपिरी, वैकुंठम और मंदिर के अंदर. सुरक्षा के लिए तिरुमला पुलिस, ऑक्टोपस कमांडो, वेजिलेंस, और एसपीएफ कर्मी तैनात रहते हैं. मंदिर में 24 घंटे निगरानी रखने के लिए 2760 कैमरे लगाए गए हैं.
तिरुमला में रात के समय सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, जिसमें नाइट सिक्योरिटी अधिकारी और गश्ती वाहन तैनात रहते हैं. यात्रियों के लिए निर्धारित समय पर ही पैदल यात्रा की अनुमति दी जाती है, और वाहनों के लिए भी समय सीमा निर्धारित है.