Advertisement

जस्टिस बोबड़े के बाद कौन बनेंगे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश? कानून मंत्री ने पत्र लिखकर पूछा

रविशंकर प्रसाद ने जस्टिस एस ए बोबड़े से पूछा है कि उनके बाद उनका उत्तराधिकारी कौन होगा? देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में किसकी नियुक्ति होनी है?

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबड़े (फाइल फोटोः पीटीआई) सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबड़े (फाइल फोटोः पीटीआई)
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 1:17 PM IST
  • 23 अप्रैल को रिटायर होंगे जस्टिस बोबड़े
  • जस्टिस एनवी रमणा हैं सबसे वरिष्ठ जज

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस एसए बोबड़े का कार्यकाल पूरा होने को है. जस्टिस बोबड़े 23 अप्रैल को रिटायर होने वाले हैं. ऐसे में उनके बाद सीजेआई कौन बनेगा, इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक देश के विधि और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बोबड़े को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है.

Advertisement

सूत्रों की मानें तो विधि और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अपने पत्र में सीजेआई जस्टिस एसए बोबड़े से अगले सीजेआई के बारे में पूछा है. रविशंकर प्रसाद ने जस्टिस एस ए बोबड़े से पूछा है कि उनके बाद उनका उत्तराधिकारी कौन होगा? देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में किसकी नियुक्ति होनी है? गौरतलब है कि जस्टिस बोबड़े 23 अप्रैल को रिटायर होंगे.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एनवी रमणा अभी सबसे वरिष्ठ जज हैं. अब तक की जो परंपरा रही है, उसके मुताबिक जस्टिस रमणा देश के अगले सीजेआई यानी जस्टिस बोबड़े के उत्तराधिकारी होंगे. परंपरा के मुताबिक अपने रिटायरमेंट से करीब महीने भर पहले देश के सेवारत मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को अपना उत्तराधिकारी बनाए जाने की सिफारिश राष्ट्रपति को एक पत्र भेजकर करते हैं.
 
सीजेआई की ओर से इस गोपनीय पत्र के मिलते ही सरकार सभी औपचारिकताएं पूरी कर वरिष्ठतम जज को मुख्य न्यायाधीश के पद पर नियुक्त कर देती है और राष्ट्रपति उनको पद की शपथ दिलाते हैं. इतिहास में एक-दो बार ऐसा भी हुआ है कि सरकार ने दखल देकर वरिष्ठता क्रम का उल्लंघन कर कनिष्ठ जज को ही मुख्य न्यायाधीश बना दिया. उस समय बवाल भी काफी हुए थे. पिछले कई दशकों से देश में राष्ट्रपति को चिट्ठी लिख कर अपने उत्तराधिकारी घोषित करने की सिफारिश वाली परंपरा ही चली आ रही है.

Advertisement

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement