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'पता होना चाहिए कौन किस पार्टी को चंदा दे रहा...', चुनावी बॉन्ड पर जया ठाकुर इसलिए पहुंच गई थीं सुप्रीम कोर्ट

लोकसभा चुनावों से पहले सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर फैसला सुना दिया है. शीर्ष अदालत ने इस स्कीम को अवैध करार देते हुए चुनावी बॉन्ड्स पर रोक लगा दी है. चुनावी बॉन्ड्स को चुनौती देने वाली याचिकाकर्ता जया ठाकुर ने कहा कि कितना पैसा, किस पार्टी को मिल रहा है और कौन लोग दे रहे हैं, इसकी जानकारी जनता को होनी चाहिए.

चुनावी बॉन्ड को लेकर याचिकाकर्ता जया ठाकुर ने क्या कहा? चुनावी बॉन्ड को लेकर याचिकाकर्ता जया ठाकुर ने क्या कहा?
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 1:40 PM IST

लोकसभा चुनावों से पहले सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर फैसला सुना दिया है. शीर्ष अदालत ने इस स्कीम को अवैध करार देते हुए चुनावी बॉन्ड्स पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड सूचना के अधिकार (Right To Information) का उल्लंघन है. वहीं चुनावी बॉन्ड्स को चुनौती देने वाली याचिकाकर्ता जया ठाकुर ने कहा कि कितना पैसा, किस पार्टी को मिल रहा है और कौन लोग दे रहे हैं, इसकी जानकारी जनता को होनी चाहिए. इसीलिए चुनावी बॉन्ड की वैधता को चुनौती दी थी.  

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Electoral Bonds को असंवैधानिक बताकर Supreme Court ने किया बैन, खरीदारों की लिस्ट होगी सार्वजनिक

उन्होंने कहा, "आरटीआई हर नागरिक का अधिकार है. कितना पैसा और कौन लोग देते हैं इसका खुलासा होना चाहिए. साल 2018 में जब इस चुनावी बांड योजना का प्रस्ताव रखा गया था तो इस योजना में कहा गया था कि आप बैंक से बांड खरीद सकते हैं और जो पैसा आप पार्टी को देना चाहते हैं उसे दे सकते हैं, लेकिन आपका नाम उजागर नहीं किया जाएगा, जो है यह सूचना के अधिकार के विरुद्ध है और इसका खुलासा किया जाना चाहिए." 

इसलिए मैंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें कहा कि यह पारदर्शी होना चाहिए और उन्हें नाम और राशि बतानी चाहिए, जिन्होंने पार्टी को राशि दान की.  

वहीं वकील प्रशांत भूषण ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया है और इसे लागू करने के लिए किए गए सभी प्रावधानों को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने माना है कि नागरिकों के मालिक अधिकारों का उल्लंघन करता है कि राजनीतिक दलों को दान देने वाले लोग कौन हैं. अदालत ने कंपनियों द्वारा राजनीतिक दलों को दिए जा रहे असीमित योगदान को भी खत्म कर दिया है." 

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सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की वैधता को रद्द करते हुए कहा कि नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि सरकार के पास पैसा कहां से आता है और कहां जाता है. कोर्ट ने माना कि गुमनाम चुनावी बांड सूचना के अधिकार और अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन है. CJI ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड के अलावा भी काले धन को रोकने के दूसरे तरीके हैं. अदालत ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड की गोपनीयता 'सूचना के अधिकार' के खिलाफ है. राजनीतिक दलों की फंडिंग के बारे में जानकारी होने से लोगों को मताधिकार का इस्तेमाल करने में स्पष्टता मिलती है. 

चुनाव आयोग के साथ जानकारी साझा करेगा SBI 

फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि राजनीतिक दलों की फंडिंग की जानकारी उजागर न करना मकसद के विपरीत है. एसबीआई को 12 अप्रैल 2019 से लेकर अब तक की जानकारी सार्वजानिक करनी होगी. एसबीआई को ये जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी. EC इस जानकारी को साझा करेगा. SBI को तीन हफ्ते के भीतर ये जानकारी देनी होगी.

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