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सुप्रीम कोर्ट ने महिला जजों को दी बड़ी राहत, रद्द किया मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बर्खास्तगी का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल जनवरी में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जून 2023 तक छह न्यायाधीशों की बर्खास्तगी का स्वत: संज्ञान लिया था. इस मसले मे प्रशासनिक समिति और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की फुल बेंच के विचार विमर्श के बाद यह पाया गया कि प्रोबेशन पीरियड के दौरान उनका प्रदर्शन असंतोषजनक था, जिसके बाद विधि विभाग द्वारा बर्खास्तगी के आदेश पारित किए गए.

सुप्रीम कोर्ट ने महिला जजों को बड़ी राहत दी है सुप्रीम कोर्ट ने महिला जजों को बड़ी राहत दी है
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 28 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 4:48 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले के जरिए महिला न्यायिक अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए उनको फिर से बहाल करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिला न्यायाधीशों को खराब वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) दी गई, जबकि उन्हें कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था. फिर गर्भपात का सामना करना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट को इस स्थिति के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए था.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आप यह गर्व से कहते हैं कि हमारे पास महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़ रही है, तो आपको उनके लिए सुरक्षित और आरामदायक कार्य वातावरण भी उपलब्ध कराना चाहिए. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि लिंग कोई बहाना नहीं है. लेकिन स्थिति पर विचार करना जरूरी है. महिला न्यायाधीशों को न्यायालय में महत्वपूर्ण शारीरिक और मानसिक दबावों का सामना करना पड़ता है. केवल लंबित मामलों की संख्या और निपटान दर को ACR का एकमात्र मापदंड नहीं माना जा सकता.

क्या है पूरा मामला 

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल जनवरी में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जून 2023 तक छह न्यायाधीशों की बर्खास्तगी का स्वत: संज्ञान लिया था. इस मसले मे प्रशासनिक समिति और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की फुल बेंच के विचार विमर्श के बाद यह पाया गया कि प्रोबेशन पीरियड के दौरान उनका प्रदर्शन असंतोषजनक था, जिसके बाद विधि विभाग द्वारा बर्खास्तगी के आदेश पारित किए गए. 

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फरवरी 2024 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से हाईकोर्ट से पूछा था कि क्या वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को तैयार है, जिसमें उन्होंने छह मे दो की बर्खास्तगी को बरकरार रखा था. हालांकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की फुल बेंच ने शर्मा और चौधरी के खिलाफ बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया था और उनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी को सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिया था.

वहीं पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद छह महिला जजों में से चार जजों को बहाल कर दिया गया था, लेकिन अदिति कुमार शर्मा और सरिता चौधरी 2018 और 2017 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा में शामिल हुई थी, उनको बहाल नहीं किया गया था. जिसपर आज शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया और उन्हें राहत दी.

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